ओवैसी के क्या कोई अवैध निर्माण दिखाई नहीं दे रहे : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों को हैदराबाद के सालकम तालाब में ओवैसी शिक्षण संस्थान द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण नहीं दिखाई दे रहे हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या गरीबों, मध्यम वर्ग और अदालती विवादों में फँसे निर्माणों को ध्वस्त करने वाली हैद्रा एजेंसी इन ढाँचों को नहीं देख रही। अदालत ने यह भी सवाल किया कि अवैध ढाँचों को ध्वस्त करने में इतना भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
अदालत ने इस बात की आलोचना की कि वर्ष 2005 से चल रहे इन निर्माणों के दौरान किसी भी अधिकारी ने यह देखने के लिए न्यूनतम निरीक्षण तक नहीं किया कि निर्माण के संबंध में अनुमति है या नहीं और कोई कार्रवाई नहीं की। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इन ढाँचों के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों यहाँ तक कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी जाँच की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रों के हित में स्थानांतरण व सीट आवंटन के निर्देश
अदालत ने राजस्व, सिंचाई, नगरपालिका, विद्यालय शिक्षा विभागों के प्रधान सचिवों को आदेश जारी कर इन अवैध ढाँचों की अनदेखी करने वाले सभी अधिकारियों की पहचान करने और एक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। इसके अलावा अदालत ने ओवैसी प्रबंधन को ओवैसी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों के साथ सहयोग करने, जो शिक्षण संस्थान छोड़कर जाना चाहते हैं और शिक्षा विभाग को ऐसे छात्रों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों में सीटें आवंटित करने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एन.वी. श्रवण कुमार ने गुरुवार को अधिवक्ता विजय गोपाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें सालकम तालाब पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य कर रहे ओवैसी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान एचएमडीए के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि तालाब संरक्षण समिति के अध्यक्ष को सालकम तालाब का दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एफटीएल और बफर जोन की पुष्टि करते हुए अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो माह की समयसीमा माँगी। जीएचएमसी की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि ज़िलाधीश को पत्र लिखकर राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को संयुक्त सर्वेक्षण के लिए नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट प्राप्त होते ही झील संरक्षण समिति के अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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2012 और 2014 के नक्शों से अवैध निर्माण का संकेत
दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने सवाल किया कि पिछले कुछ वर्षों से निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान अधिकारी क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि आप वर्ष 2014 के नक्शे को देखे तो यह स्पष्ट है कि तालाब में विवादित निर्माण कार्य हो रहे हैं। वर्ष 2012 के सेटेलाइट मानचित्र में देखें, तो तालाब के बीच घास के मैदान और जमीन दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि 2014 में शुरू हुए अवैध निर्माणों के चलते 2026 तक पूरा तालाब डूब जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि किसी भी अधिकारी ने यह जाँच नहीं की कि इन निर्माण कार्यों के लिए अनुमति है या नहीं और इनके पूरा होने से पहले कोई कार्रवाई नहीं की।
न्यायाधीश ने कहा कि 13 अप्रैल को इस अदालत द्वारा जारी आदेशों से अधिकारियों में हलचल मच गई और कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा बहस में किसी भी सरकारी वकील ने यह नहीं बताया कि ओवैसी कॉलेज के पास अनुमति है या नहीं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को तालाब में किए गए निर्माणों को मजबूती सुनिश्चित करने के लिए शुरू से ही कार्रवाई करनी चाहिए थी।
सिंचाई, नगर प्रशासन, शिक्षा और राजस्व विभागों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया गया कि वे उन अधिकारियों की पहचान करें, जिन्होंने वर्षों से चल रहे ऐसे निर्माण कार्यों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और 3 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करें। सुनवाई स्थगित करते हुए संस्था प्रबंधन को आदेश दिया गया कि यदि कोई छात्र ओवैसी संस्थाओं को छोड़ना चाहता है, तो वे सहयोग करें और शिक्षा विभाग ऐसे छात्रों को सरकारी संस्थानों में प्रवेश के अवसर प्रदान करें।
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