हैदराबाद में एनएमडीसी राजभाषा संगोष्ठी में विचारों का आदान-प्रदान
हैदराबाद, इस्पात मंत्रालय के तत्वावधान में एनएमडीसी मुख्यालय, हैदराबाद द्वारा आज राजभाषा अधिकारियों की अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में इस्पात मंत्रालय एवं सम्पूर्ण भारत में इसके अधीनस्थ कार्यरत उपक्रमों के राजभाषा अधिकारियों एवं उच्चाधिकारियों, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), हैदराबाद-सिकंदराबाद के सदस्य कार्यालयों के राजभाषा अधिकारियों, एनएमडीसी की भारत में स्थित सभी परियोजनाओं एवं कार्यालयों के राजभाषा अधिकारियों एवं कार्मिकों ने प्रतिभागिता की।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता एनएमडीसी लिमिटेड की निदेशक (कार्मिक) जी. प्रियदर्शिनी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार, इस्पात मंत्रालय के संयुक्त निदेशक (राजभाषा) आनन्द भोई, विशिष्ट अतिथि के रूप में महाप्रबंधक (मानव संसाधन) सुधांशु वर्मा, अतिथि वक्ता के रूप में सहायक महाप्रबंधक (रा.भा.)-से.नि., केनरा बैंक डॉ. वी. वेंकटेश्वर राव, सदस्य-सचिव, नराकास (उ.) हैदराबाद-सिकंदराबाद डॉ. राजनारायण अवस्थी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। महाप्रबंधक (मानव संसाधन) सुधांशु वर्मा ने स्वागत भाषण में इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों, इसके उपक्रमों से आए राजभाषा अधिकारियों, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति एवं एनएमडीसी की सभी परियोजनाओं एवं क्षेत्रीय कार्यालयों से आए राजभाषा कार्मिकों का स्वागत कर राजभाषा के क्षेत्र में उनके द्वारा दिए जा रहे योगदान की प्रशंसा की। उप महाप्रबंधक (राजभाषा) रुद्रनाथ मिश्र ने एनएमडीसी में राजभाषा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं गतिविधियों की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत कर राजभाषा हिन्दी के क्षेत्र में परियोजनाओं एवं मुख्यालय के राजभाषा कार्मिकों द्वारा दिए जा रहे योगदान के प्रति आभार जताया।
संगोष्ठी से विभिन्न उपक्रमों को एक मंच पर लाने की सराहना
जी. प्रियदर्शिनी ने राजभाषा हिन्दी को अत्यंत सरल तथा मीठी बोली बताते हुए राजभाषा के क्षेत्र में प्राप्त पुरस्कारों एवं उपलब्धियों के लिए बधाई दी। साथ ही सभी से अपने कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा हिन्दी का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से भारत के सभी उपक्रमों के राजभाषा अधिकारियों को विचार साझा करने एवं नए अवसरों को तलाशने का मंच मिलता है।
आनन्द भोई ने कहा कि राजभाषा संगोष्ठी के आयोजन से राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सहायता मिलती है तथा दूसरे संगठनों को एनएमडीसी की तरह प्रति वर्ष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी के माध्यम से विभिन्न उपक्रमों को एक ही मंच पर लाने का एनएमडीसी का यह प्रयास अत्यन्त सराहनीय एवं अनुकरणीय है।
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संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डॉ. वी. वेंकटेश्वर राव ने राजभाषा प्रबंधन पर पीपीटी के माध्यम से विचार रखे। संगोष्ठी के तीसरे सत्र में डॉ. राजनारायण अवस्थी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुवाद विषय पर सत्र लिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के अनुवाद पर प्रकाश डालते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अनुवाद कार्य में किए जाने से संबंधित जानकारी दी। संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) देबाशीष घोष ने किया। कार्यक्रम में अप्रेंटिस प्रशिक्षु सुरेखा ने सहयोग किया। सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) राजेश कुमार गोंड के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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