विशेषज्ञों ने नींद के समय गाड़ी चलाने के प्रति आगाह किया

हैदराबाद, हाल ही में हैदराबाद-विजयवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-65) पर चौटुप्पल में आंध्र प्रदेश के दो पुलिस उपाधीक्षकों की हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने विषम समय में गाड़ी चलाने के सुरक्षा पहलू को उजागर किया है। चौटुप्पल पुलिस को संदेह है कि दुर्घटना का कारण तेज़ गति और नींद आना हो सकता है, लेकिन निद्रा विकार विशेषज्ञों ने चालकों को विषम समय, खासकर रात 1 बजे से सुबह 5 बजे के बीच, यात्रा न करने की चेतावनी दी है।

चौटुप्पल दुर्घटना कोई अकेली घटना नहीं है। पुणे से हैदराबाद और विजयवाड़ा होते हुए मछलीपट्टनम तक एनएच-65 पर पहले भी कई सड़क दुर्घटनें हो चुकी हैं। यह व्यस्त मार्ग आंध्र प्रदेश से हैदराबाद आने-जाने वाले और वापसी में हज़ारों वाहन चालकों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। राज्य में 4,926 किलोमीटर लंबे कुल राष्ट्रीय राजमार्गों में से एनएच-65 तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जहाँ प्रतिदिन भारी यातायात होता है।

त्यौहारों, खासकर संक्रांति के दौरान वाहनों की आवाजाही कई गुणा बढ़ जाती है। विषम समय में राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए सोमनोलॉजिस्टों ने कहा कि स्लीप डिसऑर्डर सिस्टम के अनुसार, मस्तिष्क रात 1 बजे से सुबह 5 बजे तक गहरी नींद में चला जाता है और ऐसे समय में गाड़ी चलाना जीवन के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर सकता है। राजमार्गों और अन्य मुख्य सड़कों पर तड़के होने वाली विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण वाहन चलाते समय चालकों का झपकी लेना था।

रात में नशे और थकान से ड्राइविंग पर विशेषज्ञ की चेतावनी

स्लीप डिसऑर्डर विशेषज्ञ डॉ. व्याकरणम नागेश्वर ने कहा कि यह सब थकान के कारण होता है। सड़क दुर्घटनाओं के कारणों पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि ज़्यादातर ड्राइवरों को नींद आने के लिए मज़बूर करने वाले दो मुख्य कारण हैं, गाड़ी चलाने से पहले शराब या गांजा पीना। अगर कोई ड्राइवर शाम को और आधी रात 12 बजे तक शराब पीता है, तो मेलाटोनिन की वजह से उसकी सर्कैडियन लय (सर्कैडियन रिदम) बढ़ जाती है।

मेलाटोनिन मानव सर्कैडियन लय शरीर का प्राकृतिक नींद और जागने के चक्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। डॉ. नागेश्वर ने बताया कि यह शरीर को एक संकेत के रूप में काम करता है, जो उसे सोने का समय बताता है। यह मुख्यत शाम को बढ़ता है और रात में अंधेरे के कारण चरम पर पहुँच जाता है। उन्होंने कहा कि इसलिए नशे की हालत में गाड़ी चलाना हमेशा खतरनाक होता है।

एक और कारण गांजा का सेवन है, जो आजकल बहुतायत में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि गांजा पीने से व्यक्ति शराब से ज़्यादा नशे में होता है और 25 से 40 साल की उम्र के कई ड्राइवर गाड़ी चलाते समय इसका सेवन करते हैं, जो जोखिम भरा भी है। उन्होंने बताया कि मोटापे, पेट की चर्बी और गर्दन के घेरे वाले लोग रात में गाड़ी चलाते समय ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।

जब उनका ध्यान विषम समय में आपातकालीन स्थितियों में ड्राइवरों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों की ओर दिलाया गया, तो उन्होंने कहा कि प्रत्येक ड्राइवर को स्लीप एपनिया सिंड्रोम या पॉलीसोम्नोग्राफी परीक्षण करवाना चाहिए।

रात में ड्राइविंग से पहले भोजन व गति सीमा पर सख्त सलाह

परीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर ड्राइवर को अपनी ड्यूटी जारी रखने की अनुमति देने का निर्णय लिया जा सकता है। ड्राइवर रक्तचाप (बीपी) के अलावा स्लीप एपनिया की निगरानी करने वाली डिजिटल घड़ियाँ भी अपने साथ रख सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के ड्राइवर रात में ड्यूटी पर आने से पहले पॉलीसोम्नोग्राफी परीक्षण करवा रहे हैं। डॉ. नागेश्वर ने हाल ही में आरटीसी ड्राइवरों के साथ आयोजित एक कार्यशाला में पॉलीसोम्नोग्राफी परीक्षणों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

रात में गाड़ी चलाने से पहले खाने के संबंध में उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को दही और मसालेदार भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इससे ड्राइवर उनींदापन महसूस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग से पहले हमेशा हल्का भोजन करना चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारी वाहनों के चालक लेन अनुशासन का पालन करते हैं और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँचते हैं।

हालाँकि कई कार चालक गति सीमा के नियमों का पालन नहीं करते पाए गए, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनें हुईं। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को सावधान करने के लिए ब्लैक स्पॉट पर 80 किमी प्रति घंटे की गति सीमा दर्शाने वाले साइन बोर्ड लगाए गए थे। उच्च गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा है, लेकिन इसे घटाकर 80 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है, क्योंकि कई कार चालक 120 किमी प्रति घंटे की गति से वाहन चला रहे थे और अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे।

अधिकारी के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के डिजाइन, निर्माण और उद्घाटन से पहले नियमित सुरक्षा ऑडिट के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

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