5 महीने में तीसरी बार क्रैश हुआ फाइटर जेट, राजस्थान में दो पायलट्स की मौत

चूरू: राजस्थान के चूरू में बुधवार को भारतीय वायुसेना को एक और फाइटर प्लेन क्रैश हो गया। यह इस वर्ष पांचवां फाइटर प्लेन क्रैश है। 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर के पास इससे पहला जगुआर दुर्घटना का शिकार हुआ था। तब एयरक्राफ्ट अपनी रुटीन फ्लाइट पर था। यह हादसा रात 9:30 बजे हुआ। वह जगुआर ट्विन सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट था। इसमें दो पायलट सवार थे। एक पायलट तो सुरक्षित जब्कि दूसरे पायलट की मौत हो गई थी।

7 मार्च को जगुआर अंबाला में दुर्घटना का शिकार हो गया था। इस एयरक्राफ्ट ने अंबाला एयर बेस से अपनी रुटीन उड़ान भरी थी, उड़ान के कुछ देर बाद ही फाइटर पंचकुला के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जगुआर फाइटर तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हुआ था। इस हादसे में पायलट सुरक्षित इजेक्ट करने में सफल हो गया था।

इस साल कुल पांच क्रैश, इनमें से तीन जगुआर

इस वर्ष यानी 2025 में अब तक कुल 5 प्लेन क्रैश हुए हैं। इनमें चार फाइटर प्लेन हैं। चूरू में हुए क्रैश के साथ अब तक 3 जगुआर फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। जबकि 1 मिराज भी क्रैश हुआ है। 1 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट – AN 32 क्रैश हो चुका है।

फरवरी में मिराज-2000 हुआ था क्रैश

सबसे पहले 6 फरवरी को मिराज-2000 दुर्घटना का शिकार हो गया था। मिराज ने अपनी रुटीन फ्लाइंग के लिए ग्वालियर एयर बेस से उड़ा भरी थी। यह एयरक्राट मिराज का ट्रेनर वर्जन था। मध्यप्रदेश के शिवपुरी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। दोनों पायलट सुरक्षित इजेक्ट हो गए थे। 7 मार्च को ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट An-32 क्रैश हुआ। ये बागडोगरा एयर बेस में ही दुर्घटना का शिकार हो गया था।

संसद में पेश हुई रिपोर्ट में सामने आया ये आंकड़ा

पिछले साल दिसंबर में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि 2017 से लेकर 2022 के बीच कुल 20 फाइटर, 7 हेलिकॉप्टर, 6 ट्रेनर एयरक्राफ्ट और 1 ट्रांसपोर्टर विमान हादसे का शिकार हुआ।

प्लेन क्रैश होने के बाद क्या होता है

बता दें कि किसी भी प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले इमरजेंसी सर्विस को एक्टिव कर दिया जाता है। उस एरिया को पुलिस सील कर देती है और किसी को भी उस जगह पर जाने की इजाजत नहीं होती है। कोई भी घटनास्थल तक नहीं जा सकता है।  इसके बाद एजेंसियां विमान हादसे की जांच करती हैं और मलबे का निरीक्षण करती हैं।  इसके बाद फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जैसे उपकरणों की खोज की जाती है, जिससे कि यह पता लगाने की कोशिश की जा सके कि विमान क्यों क्रैश हुआ था।

क्रैश हुए विमान के मलबे का क्या होता है ? 

विमान हादसे के बाद उसका मलबा दूर तक जाकर गिरता है। अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में प्लेन क्रैश होकर बिल्डिंग पर जा गिरा था और उसका आधा हिस्सा बिल्डिंग पर था और बाकी का हिस्सा जमीन पर गिरा था। मलबे में से ब्लैकबॉक्स खोजने की कोशिश की जाती है। सबसे पहले तो मलबे का इस्तेमाल जांच में किया जाता है, लेकिन उसके बाद उसे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया जाता है। जो भी एजेंसियां उस विमान दुर्घटना की जांच करती हैं, वे मलबे में जो पुर्जे काम के होते हैं, उनको खोलकर अलग कर लेती हैं। इसके बाद लैब में उनकी जांच की जाती है, जिससे कि यह देखा जा सके कि वे दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं या नहीं। जो भी काम का मलबा नहीं होता है, उसको नीलाम कर दिया जाता है।

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