जीएचएमसी ने रखा 1,116 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स का लक्ष्य

हैदराबाद, ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के लिए करों से होने वाली राजस्व उगाही टेढ़ी खीर बनती जा रही है। निगम के विभाजन के बाद संपत्ति कर का एक बड़ा हिस्सा, बल्कि आधे से अधिक भाग साइबराबाद के नाम होने के बाद, अब जीएचएमसी को कम-कम पर ही संतोष करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकारी संपत्तियों से कर वसूली न हो पाना निगम के ख़ज़ाने के कमज़ोर होने का मुख्य कारण है।

राजस्व को लेकर निगम का वर्तमान लक्ष्य है कि अर्ली बर्ड योजना के तहत अधिकाधिक लोग कर दाखिल करें, ताकि निगम विकासात्मक गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित कर सके। जीएचएमसी आयुक्त आर.वी. कर्णन ने आज संवाददाताओं को बताया कि अब तक जीएचएमसी ने अर्ली बर्ड योजना के अंतर्गत 93 करोड़ रुपये संपत्ति कर प्राप्त किया, जबकि सीएमसी ने 106 करोड़ एवं मल्काजगिरी ने 61 करोड़ रुपये संपत्ति कर प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि जीएचएमसी की संपत्ति कर माँग वर्ष 2026-27 में 1,116 करोड़ है, जबकि महानगर के तीनों नगर निगमों की कुल माँग 2,800 करोड़ रुपये है।

जीएचएमसी में खैरताबाद जोन में सर्वाधिक 40 करोड़ रुपये संपत्ति कर प्राप्त हुआ है, जबकि गोलकोंडा जोन में 15 करोड़, सिकंदराबाद में 14 करोड़, चारमीनार में 7 करोड़ एवं शमशाबाद में 6 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि निगम विशेषकर वाणिज्यिक भवनों द्वारा संपत्ति कर की ठीक से अदायगी पर जोर दे रहा है। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने संपत्तिकर अदा नहीं किया। बहु मंजिला इमारतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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शमशाबाद और बंडलागुड़ा में विशेष कर वसूली अभियान

विशेष रूप से शमशाबाद और बंडलागुड़ा में नई इमारतों पर संपत्ति कर वसूली का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।आयुक्त ने बताया कि संपत्ति कर दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए किसी भी कर दाता को कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। वह माई जीएचएमसी, माई क्योर, सिटीजन सेंटर, मी सेवा सहित विभिन्न माध्यमों से संपत्ति कर दाखिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीएचएमसी में अब तक 1.11 लाख अर्थात केवल 10 प्रतिशत कर दाताओं ने ही संपत्ति कर दाखिल किया है, उन्हें 4 करोड़ रुपये से अधिक की रियायत मिली है।

इसलिए वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक कर दाता 5 प्रतिशत की रियायत प्राप्त करते हुए 30 अप्रैल तक संपत्ति कर दाखिल करें। आयुक्त ने स्वीकार किया कि सरकारी संपत्तियों से कर वसूलना मुश्किल कार्य है। हालाँकि निगमों द्वारा संपत्ति कर मिल रहा है, लेकिन अन्य विभागों द्वारा भारी कर लंबित है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, सरकारी भवनों एवं उपक्रमों से वार्षिक 108.33 करोड़ रुपये संपत्ति कर की माँग है, उन पर अब तक 1,580.16 बकाया कर लंबित है, जबकि जुर्माना 4,146.78 करोड़ रुपये हो गया है। यदि वर्तमान वर्ष के साथ सरकारी विभाग बकाया अदा करते हैं, तो 5,834 करोड़ रुपये अदा करने होंगे। इसी तरह केंद्र सरकारी भवनों का वार्षिक संपत्ति कर 50.57 करोड़ रुपये है। उन पर बकाया 181 करोड़ और जुर्माना 242 करोड़ रुपये है।

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