बतुकम्मा के लिए इंदिराम्मा साड़ी योजना शुरू करेगी सरकार
हैदराबाद, राज्य सरकार 21 से 30 सितंबर तक चलने वाले बतुकम्मा उत्सव के दौरान स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 65 लाख महिला सदस्यों में से प्रत्येक को दो साड़ियाँ वितरित करने की तैयारी कर रही है। जीएचएमसी सीमा के भीतर लगभग 11 लाख महिलाओं को ये साड़ियाँ मिलने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस योजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी के नाम पर रखा जा सकता है, जो पिछली बीआरएस सरकार की बतुकम्मा साड़ी योजना की जगह लेगी।
इसके साथ ही सरकार बड़े पैमाने पर बतुकम्मा उत्सव मनाने की योजना बना रही है, जिसमें 28 सितंबर को एलबी स्टेडियम में एक कार्यक्रम भी शामिल है, जहाँ 10,000 से अधिक महिलाओं को जुटाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद है। इसके लिए लगभग 150 आरटीसी बसों को सेवा में लगाया जाएगा।
सरकार ने 480 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1.3 करोड़ साड़ियों का ऑर्डर दिया है, जिसमें 65 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं को प्रति वर्ष दो-दो साड़ियाँ देने की योजना है। 2017 में शुरू की गई बीआरएस की योजना की खराब गुणवत्ता के लिए आलोचना की गई थी। कई महिलाओं ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया था और कई गाँवों में इन साड़ियों का उपयोग कृषि कार्यों के लिए विशेष रूप से धान खरीद केंद्रों पर अस्थायी तिरपाल के रूप में किया जाता था।
सिरसिल्ला को बड़ा ऑर्डर, साड़ियों की गुणवत्ता बेहतर
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस योजना को जारी रखने का निर्णय लिया, लेकिन गुणवत्ता में सुधार करने और महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को साड़ियाँ वितरित करने का वादा किया। पिछले वर्ष साड़ियाँ वितरित नहीं की गई थीं, लेकिन मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस वर्ष प्रत्येक स्वयं सहायता समूह महिला को दो साड़ियाँ मिलेंगी। सरकार ने बुनकरों की बड़ी आबादी वाले शहर सिरसिल्ला में हथकरघा क्षेत्र को थोक ऑर्डर दिए हैं।
65 लाख साड़ियाँ बनाने के निर्देश जारी किए गए, जिसके लिए दो चरणों में लगभग नौ करोड़ मीटर कपड़े की आवश्यकता होगी। यह पहल हथकरघा श्रमिकों को निरंतर रोजगार प्रदान करने के कांग्रेस के चुनावी वादे से भी मेल खाती है। फरवरी में साड़ी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा महिला शक्ति योजना के तहत 318 करोड़ रुपए के ऑर्डर जारी किए गए थे। इस प्रक्रिया में लगभग 6,000 बुनकर लगे हुए हैं, जिनकी औसत मासिक आय 20,000 रुपए है।
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मजदूरी तय होने के बाद अप्रैल से उत्पादन में तेजी आई और अब तक लगभग 40 लाख साड़ियाँ बनकर तैयार हो चुकी हैं। इस योजना की देखरेख हथकरघा एवं वस्त्र आयुक्त शैलजा राम अय्यर कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि केवल उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े का ही उपयोग किया जा रहा है, जबकि पहले सस्ते पॉलिएस्टर की आपूर्ति की जाती थी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक साड़ी की कीमत लगभग 800 रुपए होगी, जिससे उसकी मजबूती और सुंदरता दोनों सुनिश्चित होगी।
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