अमेरिका के क्लीवलैंड में गूंजी गुलाब खंडेलवाल की अमर काव्यधारा 

हैदराबाद, हिंदी साहित्य के महाकवि गुलाब खंडेलवाल की 102वीं जयंती के अवसर पर 10 अप्रैल को अमेरिका के क्लीवलैंड में एक गरिमामयी एवं भावपूर्ण काव्य-संध्या का भव्य आयोजन किया गया। गुलाब खंडेलवाल फाउंडेशन के मार्गदर्शन में सुसज्जित वातावरण में संपन्न इस कार्यक्रम ने साहित्य, संगीत और भावनाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का आरंभ रश्मि चोपड़ा एवं सुनीता द्विवेदी द्वारा प्रभावशाली प्रस्तावना से हुआ, जिसने पूरे आयोजन की भावभूमि को सजीव रूप प्रदान किया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना ‘आई मनस कमल विहारिणी’ (राग केदार) की प्रस्तुति निलेश कुलकर्णी एवं विवेक खंडेलवाल ने गिटार की मधुर संगत के साथ दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात गुलाब खंडेलवाल जी की रचनाओं की प्रस्तुतियों ने संपूर्ण वातावरण को काव्यमय बना दिया, जहाँ प्रत्येक कलाकार ने अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से उनके साहित्य की संवेदनाओं को जीवंत कर दिया। इसी क्रम में डॉ. अदित आदित्यन ने ‘मेरे भारत, मेरे स्वदेश’ के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की ओजस्वी अभिव्यक्ति दी।

रोशिनी चावली ने द्वारिका गीत पर दी भावपूर्ण प्रस्तुति

कार्यक्रम के मध्य एक विशेष क्षण तब आया जब मिस्टर माइल्स रीड को मंच पर आमंत्रित कर डॉ. आनंद एवं डॉ. शोभा खंडेलवाल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करने वाला रहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्मिता राव एवं रिचा ने ‘रहिए चलकर वृंदावन में, कहा रुक्मिणी ने माधव से’ पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भक्ति-रस में तल्लीन कर दिया। रोशिनी चावली ने ‘द्वारिका में जब कोयल बोली’ पर अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण को और अधिक मधुर बना दिया।

भक्ति एवं गीत प्रस्तुतियों में विद्या खंडेलवाल ने ‘मैंने तेरी तान सुनी है’ के माध्यम से आध्यात्मिक भावों का संचार किया। मोक्ष बाफना (गरिमा) ने ‘जीवन फिर से भी यदि पाऊँ’ को मार्मिक अभिव्यक्ति दी, जबकि श्रीमती सुगता चटर्जी ने ‘अंतर से मत जाना…’ प्रस्तुत कर भावनाओं की गहराई को स्पर्श किया। ग़ज़लों की श्रृंखला में सुभाष अग्रवाल ने ‘कभी होठों पे दिल की बेबसी लाई नहीं जाती’ को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया।

यह भी पढ़ें… शमशाबाद जोन में पीस कमेटी ने की सभा

युगल चावला ने गीत से पुरानी यादें की ताज़ा

वंदना हरियाणी ने ‘रत्ना! तू जीती, मैं हारा’ (राग हंसध्वनि) के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। युगल चावला ने ‘ऐसी तुम्हारी याद है’ (1948) गीत को सुमधुर स्वर में प्रस्तुत कर पुरानी स्मृतियों को सजीव कर दिया। इसी क्रम में प्रत्यूष रंजन, परेश कुलकर्णी, डॉ. मिथिलेश तामिरिसा तथा ज्योत्सना हैरिस ने अपनी-अपनी ग़ज़लों जैसे ‘ज़िंदगी फिर कोई पाते…’, ‘कहनी है कोई बात…’, ‘खुल के आओ तो कोई बात बने'(राग कामोद) एवं ‘जब तेरा दर करीब होता है…’के माध्यम से भावनाओं की विविध छवियों को मंच पर जीवंत किया। ग़ज़ल युगल प्रस्तुति में वैद्यनाथन बी. राजन ने ‘आँखें भरी-भरी मेरी…’ के माध्यम से गहन संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन विश्वनाथ नारायण एवं नीलेश कुलकर्णी द्वारा प्रस्तुत ‘दिल में ये प्यार के वहम क्या है…’ तथा अशेष परोब की गरिमामयी प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण आयोजन को एक सुंदर और संतोषप्रद विराम दिया। इस काव्य-संध्या की विशेषता यह रही कि इसमें 8 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के प्रतिभाशाली कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। काव्य, संगीत और नृत्य के अद्भुत समन्वय ने पूरे वातावरण को भावमय और काव्यमय बना दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गुलाब खंडेलवाल जी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक, प्रेरणादायक और जीवंत हैं। यह आयोजन न केवल उनकी स्मृतियों को सजीव करने में सफल रहा, बल्कि नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने की दिशा में भी एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ है ।

गुलाब खंडेलवाल फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह भव्य काव्य-संध्या साहित्य-प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनकर सभी के हृदय में अपनी अमिट छाप छोड़ गई। यह आयोजन इस बात का सजीव प्रमाण है कि हिंदी साहित्य की सुगंध सीमाओं से परे जाकर विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button