शहरी बस्तियों में बढ़ रही हैं स्वास्थ्य असमानताएँ : एचएचएफ रिपोर्ट

हैदराबाद, हैदराबाद आधारित गैर लाभकारी संस्था हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन (एचएचएफ) द्वारा जारी वार्षिक शहरी स्वास्थ्य रिपोर्ट-2026 में यह तथ्य सामने आया कि शहर की डेढ़ सौ से अधिक शहरी और अर्ध-शहरी बस्तियों में हाशिए पर रहने वाले समुदायों में स्वास्थ्य असमानताएँ बढ़ रही हैं। इसके अलावा बढ़ते गैर-संक्रामक रोगों के प्रसार के बीच कम आय वाले परिवारों में वित्तीय असुरक्षा बनी हुई है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मीडिया प्लस सभागार में आज कार्यक्रम में वार्षिक रिपोर्ट-2026 जारी की गयी। हकीमपेट, किशन बाग, काला पत्थर, याकूतपुरा, अमानगर, गंगानगर, बंड्लागुड़ा, शाहीन नगर, जलपल्ली और पहाड़ी शरीफ जैसे क्षेत्रों में किए गए सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त रोगी आँकड़ों तथा घरेलू सर्वेक्षणों के आधार पर यह बात सामने आई कि 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच एक प्रमुख चिंता का विषय है। इसके अलावा 51 प्रतिशत लोगों ने परिवहन खर्च से बचने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पैदल जाने की बात स्वीकारी। यह स्वास्थ्य सेवा के उपयोग में निकटता और पड़ोस के स्तर पर पहुँच के महत्व को रेखांकित करता है। रिपोर्ट द्वारा सुलभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित किया गया।

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सर्वेक्षण में लगभग 1,500 परिवारों के शहरी बस्तियों में बढ़ते चयापचय संबंधी स्वास्थ्य संकट पर प्रकाश डाला गया। 35 से 40 प्रतिशत परिवारों ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह और दोनों की शिकायत की। तीन में से एक वयस्क मोटापे से ग्रस्त पाया गया, जिनमें पेट की चर्बी अधिक थी। ऐसे लगभग 70 प्रतिशत वयस्क इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता या पूर्व-मधुमेह से ग्रसित थे, जिन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट में युवा महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे पीसीओएस, पीसीओडी, फाइब्रॉएड तथा अनियमित मासिक धर्म चक्र में वृद्धि का उल्लेख किया गया।

गैर-संचारी रोगों के मामलों में देखी जा रही है वृद्धि

साथ ही सिर और गर्दन के कैंसर, विशेष रूप से युवा पुरुषों में मुख कैंसर, बिना धूम्रपान वाले तंबाकू, गुटखा और पान के अधिक सेवन के कारण अधिक प्रचलित पाए गए। इसके अलावा युवा और मध्यम आयु वर्ग के व्यक्तियों में गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग, क्रॉनिक किडनी रोग तथा हृदय एवं मस्तिष्क स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ते देखे गए। रिपोर्ट में गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ के पीछे एक सामान्य कारक की पहचान की गई, जिनमें खराब आहार, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, अपर्याप्त नींद, गतिहीन जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि के लिए अपर्याप्त सार्वजनिक स्थान, स्वास्थ्य के प्रति खराब जागरूकता, समय पर उपचार प्राप्त करने में वित्तीय बाधाएँ आदि शामिल हैं।

शहरी झुग्गी-झोपड़ी परिवारों पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ

रिपोर्ट में कहा गया कि कई शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में परिवार मौसमी बीमारियों के लिए हर बार 500 से 1,000 रुपये तक खर्च करते हैं। इससे बार-बार जेब से खर्च और वित्तीय तनाव होता है। इन कमियों को दूर करने के लिए सीड-यूएसए तथा एएमपीआई-यूएसए सहयोग से हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन 20 शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित कर रहा है। यह केंद्र निशुल्क बाह्य रोगी परामर्श, प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल, नेत्र एवं दंत चिकित्सा सेवाएँ, डे केयर सुविधाएँ और गैर-संक्रामक रोग प्रबंधन प्रदान करते हैं।

अकेले 2025 में 5,88,900 रोगियों ने निशुल्क सेवाओं का लाभ उठाया, जिनमें से 65 प्रतिशत महिलाएँ थीं। निष्कर्षों में 89.2 प्रतिशत लाभार्थियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि निशुल्क प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा ने परिवारों की बचत में सुधार कर समग्र वित्तीय स्थिरता को मजबूत किया। इसके अलावा 81.3 प्रतिशत के अनुसार बताया कि वह स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए उधार लेने से बच सके।

एचएचएफ के संस्थापक मुजतबा हसन असकरी के अनुसार, निरंतर सामुदायिक आधारित हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप समय के साथ परिवारों की संचयी बचत लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। निष्कर्षों के आधार पर प्रवासी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में ऐसी स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है, जो सुलभ, सस्ती और घर के करीब हो। सुदृढ़ रेफरल व्यवस्था और मजबूत सामुदायिक संपर्क न केवल स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करते हैं, बल्कि परिवारों को कर्ज में डूबने से भी बचाते हैं। जब स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से प्रदान की जाती हैं, तो वह सामाजिक न्याय का साधन बन जाती हैं।

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