हाईकोर्ट : यूरिया ऐप को लेकर जनहित याचिका

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हैदराबाद, किसानों को यूरिया की आपूर्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए ऐप को भ्रामक बताते हुए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने सरकार से यूरिया आपूर्ति के लिए अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का स्पष्टीकरण देने को कहा। न्यायालय ने राज्य सरकार को खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के मद्देनजर यूरिया आपूर्ति के लिए लागू की जा रही प्रक्रियाओं की जानकारी देने का आदेश दिया।

न्यायालय ने याचिका पर स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी किया कि युद्ध के मद्देनजर यूरिया आपूर्ति के लिए सरकार द्वारा बनाए गए ऐप के कारण किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उच्च न्यायालय ने सरकार से सवाल किया कि सभी किसान तकनीकी विशेषज्ञ नहीं है और उनमें से कितने लोगों के पास फोन है। न्यायालय का मानना था कि फोन के साथ स्मार्ट फोन की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि ऐप के माध्यम से यूरिया बुकिंग की तकनीकी आम ग्रामीण किसानों के लिए कैसे उपयोगी होगी।

किसानों ने यूरिया आपूर्ति की अनियमितता को दी चुनौती

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने गुरुवार को नलगोंडा ज़िले के मिर्यालगुड़ा के सी.एच. श्रीनिवास रेड्डी व चार अन्य किसानों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें किसानों को यूरिया की अनियमित आपूर्ति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि यूरिया की आपूर्ति अनियमित है और हर तरफ अव्यवस्था फैली हुई है, जिस कारण किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।

यूरिया न मिलने के कारण किसान धरने और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए किसानों द्वारा शिकायत करने पर भी कोई परिणाम नहीं निकला। असाइंड (आवंटित) भूमि पर खेती करने वाले किसानों को यूरिया की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इसके जवाब में सरकारी अधिवक्ता मोहना रेड्डी ने कहा कि सरकार ने यूरिया की समस्या से निपटने के लिए एक ऐप बनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आपूर्ति को नियमित करने के लिए एक विशेष ऐप लांच किया है, जहाँ एक बोरी यूरिया की कीमत तीन हजार रुपये है।

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सरकार रियायत दर पर 266 रुपये में दे रही यूरिया

वहीं सरकार इसे रियायत के साथ 266 रुपये में उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा कि यदि पात्र लोग आरटीसी की माध्यम से पहले से ही पंजीकरण करा लेते हैं, तो वे तुरन्त इसका लाभ उठा सकते हैं और उन्हें कतार में इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है, जिनके पास फोन नहीं है, उनके लिए ऐप एक विकल्प है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को यूरिया के बारे में जानकारी नहीं है, उनके पंजीकरण के लिए संबंधित केंद्रों पर स्वयं सेवक उपलब्ध रहेंगे।

यदि किसान के पास फोन नहीं है, तो वे अपने मित्रों और रिश्तेदारों के फोन के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निर्धारित किसानों को यूरिया की आपूर्ति कर रही है। दलील सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने यूरिया आपूर्ति योजना, ऐप के उपयोग, टीवी होर्डिंग और अन्य अभियानों के माध्यम से यूरिया आपूर्ति के संबंध में जागरूकता कार्यक्रमों और अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे युद्ध को ध्यान में रखते हुए यूरिया आपूर्ति योजना पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। सरकार को आगामी मानसून फसलों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने का आदेश दिया। साथ ही सरकार को चार सप्ताह के भीतर प्रतियाचिका दायर करने का आदेश देते हुए मामले की सुनवाई गर्मियों की छुट्टी तक टाल दी गई।

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