हैदराबाद एयरपोर्ट को एसीए स्तर 5 कार्बन मान्यता

हैदराबाद, जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएचआईएएल) द्वारा संचालित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आरजीआईए) को एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) द्वारा विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त एयरपोर्ट कार्बन मान्यता (एसीए) कार्यक्रम के तहत स्तर 5 मान्यता प्रदान की गई। आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एसीए कार्यक्रम कार्बन उत्सर्जन को प्रबंधित कर कम करने के लिए हवाई अड्डे के प्रयासों के आकलन के लिए उद्योग मानक है।

यह उपलब्धि आरजीएआई को एसीआई एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्व क्षेत्र में शीर्ष चार हवाई अड्डों में से एक बनाती है, जिसने एसीए ढाँचे के तहत कार्बन प्रबंधन प्रमाणन का उच्चतम स्तर (स्तर 5) प्राप्त किया है। यह मान्यता वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने, स्कोप 1 और 2 के लिए शुद्ध शून्य सीओटू उत्सर्जन बनाए रखने और 2050 या उससे पहले शुद्ध शून्य स्कोप 3 उत्सर्जन की दिशा में प्रयास करने की आरजीएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

2050 तक शुद्ध शून्य स्कोप 3 उत्सर्जन का लक्ष्य

जीएमआर एयरपोर्ट्स के कार्यकारी निदेशक और चीफ इनोवेशन ऑफिसर और एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) एशिया प्रशांत और मध्य पूर्व (एसीआई एपीएसी एवं एमआईडी) के अध्यक्ष एस.जी.के. किशोर ने कहा कि हैदराबाद एयरपोर्ट स्कोप 1 और 2 उत्सर्जन पर शुद्ध शून्य उत्सर्जन को बनाए रखने के लिए प्रयासों को जारी रखेगा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए यूएनएफसीसीसी पेरिस समझौते (2015) के तापमान लक्ष्य के साथ तालमेल बिठाते हुए 2050 तक शुद्ध शून्य स्कोप 3 उत्सर्जन को प्राप्त करने हेतु हवाई अड्डे के हितधारकों के साथ सहयोग करेगा।

हैदराबाद एयरपोर्ट को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए एसीआई एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्व के महानिदेशक स्टेफानो बैरोन्सी ने कहा कि भारतीय एयरपोर्ट पर्यावरणीय स्थिरता के मामले में अग्रणी है। हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की उपलब्धियाँ डी-कार्बोनाइजेशन में भारत की अग्रणी भूमिका निभाती है। यह अन्य एयरपोर्ट को स्थिरता को अपनाने और अधिक पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार विमानन उद्योग के लिए पहलों को लागू करने हेतु प्रेरित करेंगे।

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हरित उड्डयन के लिए कार्बन उत्सर्जन प्रबंधन रणनीति

राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन श्रेणियों में कई तरह की पहलों के माध्यम से कार्बन प्रबंधन के लिए रणनीतिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। स्कोप 1 (प्रत्यक्ष उत्सर्जन) में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की तैनाती, जैव ईंधन का उपयोग, ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना, कम-जीडब्ल्यूपी (ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल) रेफ्रिजरेंट का उपयोग शामिल हैं। इसी प्रकार स्कोप 2 (अप्रत्यक्ष ऊर्जा उत्सर्जन) में ऑन-साइट 10 एमडब्ल्यूपी सौर ऊर्जा संयंत्र और हरित ऊर्जा खरीद के माध्यम से 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग शामिल है।

प्रकाश व्यवस्था, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी), हवाई अड्डे के संचालन में ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का कार्यान्वयन भी प्रमुख है। स्कोप 3 (थर्ड-पार्टी उत्सर्जन) के अंतर्गत सिंगल-इंजन टैक्सींिग, इलेक्ट्रिक ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट (जीएसई), स्टैंड पर विमानों के लिए प्री-कंडीशन्ड एयर सप्लाई, जीएसई टनल का संचालन, भविष्य में एसएएफ के उपयोग की खोज सहित कम उत्सर्जन प्रथाओं के लिए एयरलाइंस और ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों के साथ सहयोग किया है।

कार्बन उत्सर्जन में कमी के उपायों की मुख्य विशेषताओं में लीड-प्रमाणित यात्री टर्मिनल बिल्डिंग सहित ऊर्जा-कुशल हरित भवन, ग्रीन बेल्ट विकास, एक प्राकृतिक कार्बन सिंक के रूप में कार्य किया है। पारंपरिक ग्राउंड वाहनों को सौर और इलेक्ट्रिक विकल्पों से बदला है। स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों, एलईडी रेट्रोफिट्स और उन्नत एचवीएसी अपग्रेड की तैनाती की गई है। कार्यक्रम में सात प्रगतिशील स्तर शामिल हैं, जिसमें स्तर 5 उन हवाई अड्डों को मान्यता देता है, जिन्होंने प्रत्यक्ष उत्सर्जन के लिए नेट ज़ीरो सीओ2-ई हासिल किया है और अप्रत्यक्ष उत्सर्जन को संबोधित करने के लिए मजबूत हितधारक भागीदारी स्थापित की है।

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