हैदराबाद : ऑनलाइन गेमिंग और बेट्टिंग फ्रॉड का आरोपी गिरफ़्तार
हैदराबाद, हैदराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेट्टिंग फ्रॉड के मामले में महाराष्ट्र के पुणे से आरोपी विशाल अनिल निर्मल को गिरफ़्तार कर लिया। आरोपी के पास से एक लैपटॉप, 15 सेलफोन, 57 चेकबुक, 79 सिमकार्ड, 62 डेबिट कार्ड, फर्जी कंपनियों के 15 रबर स्टैम्प, 8 क्यूआर कोड ज़ब्त किए।
यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में नगर पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने बताया कि आरोपी की गिरफ़्तारी साइबर अपराध पुलिस इंस्पेक्टर पी. शिवचंद्रा के नेतृत्व में की गई। उन्होंने बताया कि हैदराबाद निवासी 32 वर्षीय शिकायतकर्ता ने साइबर अपराध पुलिस थाने में शिकायत दर्ज़ करवाई। उसने अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2021 के दौरान उसे व्हॉट्सऐप पर एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें उसे एक बेट्टिंग वेबसाइट का विवरण देते हुए उस पर ऑनलाइन क्रिकेट और कैसिनो गेम पर बेट्टिंग लगाने पर आसानी से पैसा कमाने का सुझाव दिया गया।
क्रिकेट के अलावा उसे फाइव स्टार क्रिकेट एविएटर और फाइट गेम का भी विवरण दिया गया। प्रारंभ में शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये बेट्टिंग पर लगाए, जिस पर उसे कुछ हल्का लाभ प्राप्त हुआ। भरोसा कर शिकायतकर्ता ने बेट्टिंग लगाते हुए वर्ष 2021 के दौरान कुल 10 लाख रुपये जमा किए। इसके बाद वह जमा किए गए 10 लाख रुपये बेट्टिंग में हार गया। इसके बाद आरोपी निर्मल ने वर्ष 2022 के दौरान फिर से शिकायतकर्ता से संपर्क किया और उसे बेट्टिंग के लिए एक और वेबसाइट का विवरण भेजा। इस बार भी शिकायतकर्ता ने बेट्टिंग पर पैसा लगाया।
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शिकायतकर्ता ने 2021-2025 में बेट्टिंग पर 55 लाख रुपये गंवाए
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2021 से 2025 के दौरान बेट्टिंग पर 55 लाख रुपये गँवा दिए। प्राप्त शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी रूप से छानबीन करने के बाद आरोपी विशाल अनिल निर्मल को गिरफ़्तार कर लिया। जाँच-पड़ताल करने पर पता चला कि आरोपी निर्मल अपने सहयोगी गुड्डू, द्वेद और सूरज बूशाल उर्फ बोक्शी के साथ मिलकर ऑनलाइन बेट्टिंग रैकेट चला रहा था।
व्हॉट्सऐप के जरिए वह लोगों को बेट्टिंग संबंधी वेबसाइट का विवरण देकर उनके साथ ठगी कर रहा था। विशाल ने अपनी पड़ाई अधूरी छोड़ कुछ दिन श्रीराम फायनांस, पुणे में रिकवरी एजेंट के रूप में कार्य किया। अक्तूबर, 2021 के दौरान वह जॉब वीजा पर दुबई गया। इस दौरान उसकी मुलाकात नेपाल निवासी सूरज भूसाल से हुई। उसके संपर्क में आने के बाद वह उसके साथ मिलकर बेट्टिंग रैकेट चला रहा था। इसके लिए आरोपी एयरटेल, जीयो, वोडाफोन के दुबई आधारित सिमकार्डों का उपयोग कर रहा था।
सिमकार्ड ब्लॉक होने पर वह इसे बदलकर नया सिमकार्ड हासिल करता था। जाँच-पड़ताल के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि सोशल मीडिया पर बेट्टिंग ऐप का प्रचार करने के लिए विज्ञापनों पर प्रतिदिन लगभग 6 हजार रुपये खर्च करता था। इसके अलावा फर्जी कंपनियों के माध्यम से भी देश भर में 22 साइबर ठगी के मामलों को अंजाम दिया। उसे गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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