संन्यास लेना आसान है, लेकिन अहंकार से संन्यास लेना कठिन : जयश्रीजी
हैदराबाद, करोड़ों रुपये की संपत्ति को छोड़कर संन्यास लिया जा सकता है, संसार के सुख को छोड़कर संयम जीवन अंगीकार किया जा सकता है, माता-पिता, भाई-बहन रिश्ते-नातों के बंधन को तोड़कर साधु-संत बना जा सकता है, लेकिन जीवन में अहंकार से संन्यास लेना कठिन होता है।
उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक में चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी जयश्रीजी म.सा. आदि ठाणा-3 ने व्यक्त किये। म.सा. ने कहा कि घर-परिवार और संघ-समाज में जो रोज झगड़े हो रहे है, उनका मूल कारण मूछ और पूछ ही है, क्योंकि जहाँ हमारी पूछ नहीं होती, वहाँ हमेशा क्रोध आ जाता है और क्रोध अहंकार के कारण ही आता है, और जब यह आता है, तो हमारे नाम के लिए क्या कुछ नहीं कर बैठते हैं, इसके कई जीवंत उदाहरण देखने को मिलते हैं। नाम के लिए हम कितने आडंबर करते हैं, कितना पैसा खर्च करते हैं, वर्तमान समय में यह नजारा देखने को मिल रहा है।
अहंकार छोड़ विनय से जीवन को करें प्रकाशित
चातुर्मास संयोजक ब्रिजेश कोचेटा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, साध्वीश्री ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों में नाम और दाम की भूख अधिक देखी जा रही है।लोग नाम की भूख मिटाने के लिए कुछ भी कर गुजरने से पीछे नहीं हटते। जहाँ नाम की भूख हमें नीचे गिराती जाती है, वहीं दाम की भूख हमें पतित कर देती है। म.सा. ने कहा कि जीवन में जब कभी भी हमें किसी बात को लेकर अहंकार आ जाता है, तो हमें श्मशान का एक चक्कर लगा लेना चाहिए, क्योंकि श्मशान में जो राख हुए हैं, हम उनके सामने कुछ भी नहीं हैं। रावण से लेकर कंस, दुर्योधन तक अहंकार के कारण राख हो गये।




म.सा. ने कहा जिस प्रकार से शाख पर खिला फूल हवा का झोंका आने से गिर जाता है, उसी प्रकार मानी का मान भी समय आने पर जलकर राख हो जाता है। जो फूल शाख पर बैठकर अपनी सुगंध और सुंदरता को लेकर इतरा रहा था, उसे हवा के एक झोंके ने उसकी वास्तविकता दिखा दी। अहंकार हमारी आत्मा को मलीन कर हमें पतन की ओर ले जाती है, लेकिन विनय गुण हमारे जीवन में निखार लाता है। धनवान होकर भी जो झुकता है, वह अहंकार के कारण हवा में उड़ने वाले से भी ऊँचा होता है।
विनयवान आसानी से झुक जाता है, लेकिन अहंकारी मरना पसंद करता है, लेकिन झुकना नहीं। जीवन में यदि ज्ञान प्राप्त करना है, तो हमें विनयवान की तरह झुकना ही होगा। हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि मेरी जरूरत सबको है, बल्कि यह सोच रखनी चाहिए कि मुझे तुम्हारी जरूरत है। आपके रहने ना रहने से इस संसार में कोई फर्क नहीं पड़ता है, आपके रहने से भी संसार चलता है और न रहने से भी संसार चलता है, संसार का कोई कार्य रुकने वाला नहीं है। गुरूर किस बात का, आज मिट्टी के ऊपर हैं और कल मिट्टी के नीचे होंगे।
यह भी पढ़ें.. अहंकार को तोड़ना आसान नहीं : जयश्रीजी म.सा.
विनय और अहंकार पर मार्मिक धर्मसंदेश
म.सा. ने कहा कि धर्म का मूल विनय है और विनय वह माँ है, जो अन्य गुणों को जन्म देती है। जहाँ विनयवान झुकना जानता है और ज्ञान प्राप्त कर इसका अहंकार नहीं करता, वहीं अहंकारी को यदि थोड़ा सा भी ज्ञान प्राप्त हो जाए तो वह वाटर की तरह उफनता रहता है। अहंकार नींबू जैसा होता है, जो अपनी खटाई से हर रिश्ते में दरार उत्पन्न कर देता है। सिर बोझ लेकर चलने वाला मजदूर झुकता है, तो यह कोई गौरव की बात नहीं है, कागज हवा में उड़ता है, तो यह भी कोई गौरव की बात नहीं है, लेकिन धनवान होकर जो झुकता है और फलों से लदी डाली झुकती है, तो यह गौरव की बात है। यह उनका विनय गुण है कि वह सम्पन्न होकर भी अहंकार करने के बजाए लोगों के सामने झुक रहे हैं। कभी आपने चंदन में दुर्गंध देखी है, नींबू में शक्कर जैसी मिठास का अनुभव नहीं किया, इसी प्रकार अहंकारी में विनय के भाव कभी नहीं आते, वह झुकता नहीं है। रात का अंधेरा भी हमें प्रकाश की ओर ले जाता है, लेकिन अहंकार का अंधेरा हमें विनाश की ओर ले जाता है।
संघ के महामंत्री पवन कटारिया ने संघ व चातुर्मास की गतिविधियों का ब्यौरा दिया। तेला तप की आराधना में मास्टर रूपचंद परमार की तपस्या जारी है। आदेश पिंचा ने आठ उपवास की तपस्या कर आगे के भाव रखे। आज का आयम्बिल बबिता नाहर का है। धर्म सभा में कर्नाटक से पधारे नरेंद्र पोकरणा का संघ की ओर से बहुमान किया गया। आज के नवकार महामंत्र के लाभार्थी विजय कुमार विमल कुमार डागा परिवार रहे। आगामी 27 जुलाई को जयश्रीजी म.सा. का जन्मोत्सव एकासन दिवस के रूप में स्थानक भवन में मनाया जाएगा।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।





