जागो हिन्दू नहीं, जागो सरकार का नारा देना जरूरी : अश्विनी उपाध्याय
हैदराबाद, हर बीमारी की दवाई और हर समस्या केवल चर्चा करने से हल नहीं होती, बल्कि उसके उचित समाधान देने से होती है। वर्तमान में देश में असुरक्षा व अशांति, उग्रवाद, धोखाधड़ी, आतंकवाद, घुसपैठ, धर्मांतरण जैसी घटनाएँ केवल चर्चा बनकर रह गई हैं। इसलिए जरूरी है कि शासन इस दिशा में समाधान निकालने के लिए देश के मंत्री, सांसद एवं विधायक है, उनके कानों तक बात पहुँचाये।




















वर्तमान में जागो हिन्दू का नारा नहीं, जागो सरकार जागो सरकार का नारा बुलंद करना होगा। लोगों को जगाने के लिए सोशल मीडिया पर अनर्गल कंटेंट की जगह सामाजिक समस्याओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की नितांत आवश्यकता है। उक्त उद्गार कोठी स्थित उस्मानिया मेडिकल कॉलेज सभागार में राजस्थानी स्नातक संघ द्वारा आयोजित 37वें श्री रामकृष्ण धूत स्मृति व्याख्यान सुरक्षित भारत में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, चिंतक एवं राष्ट्रवादी प्रखर वक्ता अश्विनी उपाध्याय ने व्यक्त किए।
अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि देश में ऐसा कोई स्थान नहीं, जहाँ भ्रष्टाचार न हो। देश में करप्शन बाय डिफॉल्ट नहीं, बल्कि बाय डिजाइन है। हर कार्य की योजना के लिए कमीशन बंधा हुआ है। इसका पैसा हम सभी देते हैं। टैक्स बढ़ रहे हैं, खून चूसा जा रहा है, पर हम उफ नहीं करते, क्योंकि हमने अपनी सोचने-समझने की क्षमता को सीमित कर दिया है। शासन ने मानसिक रूप से गुलाम बना दिया है। राजनीतिक पार्टियों ने मानसिक खतना कर दिया है।
जनमानस की सोच और नेतृत्व पर निर्भरता पर टिप्पणी
इसलिए जो नेता, नौकरशाही और जो राजनीतिक पार्टी कहती है, वही हमें ठीक लगता है। देश ने अभी तक दस प्रतिशत की जीडीपी हासिल नहीं की, जबकि आचार्य चाणक्य के समय जीडीपी 40 प्रतिशत थी और कोई टैक्स भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुराने समय में कोई टैक्स नहीं था, तो भारत सोने की चिड़िया और आज इतने टैक्स देने के बाद भी देश के ऊपर 250 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है।
वर्तमान में जो नेताओं, विधायकों और सांसदों को फ्री बीज दिये जा रहे हैं, उन पर पीआईएल चल रही है। भारत में कुल 5000 सांसद विधायक है। इन पर वेतन भत्ता, गाड़ी, फ्री टिकट, सुरक्षा सहित कई सेवाओं पर साल में 50,000 करोड़ खर्च होता है। जिन पाँच हजार लोगों पर 50,000 हजार करोड़ खर्च होता है, इनमें से कोई भी उक्त समस्या पर संसद या विधानसभा में आवाज नहीं उठाता। उन्होंने कहा कि देश में जो हो रहा है, वह कड़वा सच है, लेकिन मीडिया, समाचार पत्र सभी को मीठा झूठ परोस रहे हैं।
सभी थाना, कचहरी, तहसील भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा घूसखोरी, दलाली, कमीशनखोरी, हवाला, कबूतरबाजी भारत में होती है। दुनिया में सबसे ज्यादा लव जिहाद, धर्मांतरण, घुसपैठ भारत में होता है। पिछले 75 वर्षों से स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, लेकिन गुलामी से अभी भी मुक्त नहीं हुए। शिक्षा व्यवस्था, कुरीतियों, पुलिस व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, टैक्स व्यवस्था, व्यापार व्यवस्था, चुनाव व्यवस्था गुलामी का शिकार हैं।
सुप्रीम कोर्ट में 250 जनहित याचिकाओं का उल्लेख
आज भी देश में उड़ रहे विमानों पर वीटी यानि विक्टोरिया टेरिटरी का लेबल लगा है, जो गुलामी को दर्शाता है। इसे लेकर भी पीआईएल दायर की है। बीमारी का इलाज समय पर हो जाए, तो दवाई कम देनी पड़ती है। समय पर न हो तो, दवाई ज्यादा देनी पड़ती है। कई बार तो बीमारी लाइलाज हो जाती है। वीटी की समस्या लाइलाज है। इन्हीं विषय को लेकर कोर्ट में मैं लड़ता हूँ। आज विभिन्न विषयों को लेकर 250 पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में हैं।
अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि देश का संविधान कहता है थक एक भारतीय नाम संहिता बनाए और एक झटके में वहशी दरिंदों के गुलामी का नाम मिटा दें, यह इसका समाधान है। एक भारतीय धरोहर संहिता बनाएँ और देश में जितने मठ और मंदिर तोड़े गये, उनका सर्वे व तकनीक का उपयोग कर कार्बन डेटिंग से जिनकी है, उसे सौंपी जाए। कब तक एक-एक के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाएँ। ऐसी कोई बीमारी नहीं, जिसकी कोई दवाई नहीं, ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका कोई समाधान नहीं।
अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि पूर्वजों ने जो पाँच सिद्धांत दिये, उसे हम भूल गये, इसलिए दुर्गति हो रही है। भय बिन होय न प्रीत, लोहे लोहे को काटता है, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी, मानव का मानवाधिकार और दानव को कठोर दंड इन पाँच सिद्धांत का पालन देश में नहीं हो रहा है। इन सिद्धांतों को चीन, जापान, सिंगापुर ने अपनाया, इसलिए वहाँ सतयुग चल रहा है और भारत में कलयुग। कलयुग को सतयुग में बदलना है, तो पाँचों सिद्धांतों को अपना ले। उन्होंने कहा कि मुगलों ने एक हजार मदरसे खोले थे और आज 3.5 लाख मदरसे हैं।
गुरुकुल प्रणाली बनाम मॉन्टेसरी शिक्षा पर बहस
अंग्रेजों ने एक हजार मांटेसरी और कॉन्वेंट खोले, आज देश के अंग्रेजों ने 3.5 लाख मांटेसरी और कॉन्वेंट खोल दिये। देश में 7.25 लाख गुरुकुल थे, लेकिन आज 7.25 हजार गुरुकुल भी नहीं बचे। उन्होंने कहा कि मुगल चले गये, तो मदरसे नहीं रहने चाहिए और अंग्रेज चले गये, तो मांटेसरी और कॉन्वेंट नहीं होने चाहिए। घर परिवार में आपसी रिश्ते खराब होने का कारण ही कॉन्वेंट-मोंटेसरी हैं। वृद्धाश्रम खुल रहे हैं, यह भी उन्हीं की देन है।
मदरसे अलगाववाद, मांटेसरी-कॉन्वेंट उपभोक्तावाद, जबकि गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था इंसानियत सीखाती है। पूर्व की हमारी शिक्षा से चौमुखी विकास होता था। शिक्षा से डॉक्टर, इंजीनियर ही नहीं बनते थे, बल्कि आध्यात्मिक, नैतिक, चारित्रिक और मानसिक विकास होता था। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था केवल डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टेड अकाउंटेंट ही बना रही है। वर्तमान की शिक्षा तबाही की ओर ले जा रही है।
देश में यूनिफार्म एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए, जहाँ सभी एक साथ शिक्षा ग्रहण कर सकें। कोई ऊँच नीच का भेद न हो। जातिवाद, पंथवा। क्षेत्रवाद खत्म होना चाहिए। वर्तमान में जिस प्रकार सीबीएसई का पाठ्यक्रम देश भर में एक सा है, वैसा ही यूनिफार्म एजुकेशन सिस्टम हो। वन नेशन वन टैक्स लागू कर सकते हैं, तो वन नेशन वन एजुकेशन भी लागू कर सकते हैं।उन्होंने बताया कि देश में मठ मंदिरों को अंग्रेजों ने नियंत्रित किया, जबकि मस्जिद-मदरसों और चर्चों पर नियंत्रण नहीं रखा।
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मठ-मंदिर संपत्ति के दुरुपयोग पर उठे सवाल
आज भी देश में मठ मंदिरों की एक लाख करोड़ की संपत्ति पर नेता मालपुआ खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव तभी आयेगा, जब स्नातक यानी पढ़े-लिखे लोग समस्या के मूल कारण और स्थाई समाधान पर चर्चा करेंगे। सोशल मीडिया है, पर इसका उपयोग पर्सनल मीडिया के तौर पर कम और सामाजिक मीडिया यानी समाज के भले करने वाली मीडिया के तौर पर करें। समस्या के मूल स्थायी समाधान की चिंता करो। समस्या पर चर्चा से यह ठीक ही नहीं होती।
देश में एक एडमिनिस्ट्रेटिव चार्टर्ड रिफॉर्म की आवश्यकता है। न्यायिक व्यवस्था में 5 करोड़ मुकदमें है। जूडिशल रिफॉर्म हो। झूठी शिकायत, झूठी जाँच, झूठी गवाही, झूठा एफिडेविट को गंभीर अपराध बनाया जाए। झूठे मुकदमे को गंभीर अपराध बनाया जाए, तब मुकदमे कम होंगे। उन्होने कहा कि नियम कानून बदलने की जिम्मेदारी शासन की है। अधिवक्ता ने कहा कि धर्म की जय हो, यह काम हमारे समाज का है।
धर्म की जय यानी धर्मार्थ कार्य में कमाई का दशांक खर्च कर गरीबों को शिक्षा व अन्य में मदद करें। दूसरा अधर्म का नाश करना सरकार का कार्य है। जब धर्म की जय होगी, तो अधर्म का नाश होगा, प्राणियों में सद्भावना होगी और इन तीनों से विश्व का कल्याण होगा। उन्होंने कहा कि संविधान का उद्देश्य राम राज्य की स्थापना करना होना चाहिए। राम राज्य के लिए राम नीति लागू करनी होगी, लेकिन वर्तमान में परशुराम नीति लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विकास में बाधा जनसंख्या विस्फोट है।
जनसंख्या नियंत्रण और कानून व्यवस्था पर जोर
जनसंख्या नियंत्रण के बिना कुछ नहीं हो सकता। देश में बच्चों व बालिकाओं का अपहरण हो रहा है, क्योंकि अपहरण के खिलाफ कठोर कानून नहीं है। देश में साल में पाँच लाख बेटियाँ गायब हो रही हैं, लेकिन केवल ढेड लाख मिलती हैं। 3.5 लाख नहीं मिल रही हैं। वह सब लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। प्रतिदिन 1500 हिन्दुओं का धर्मांतरण हो रहा है। धर्मांतरण आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है। धर्मांतरण बड़ा कारोबार बन चुका है। इस पर पीआईएल चल रही है।
सभी का स्वागत आरजीए के अध्यक्ष मनोज गोयल ने किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी स्नातक संघ का स्वर्णिम इतिहास रहा है रामकृष्ण धूत व्याख्यान माला। इस कड़ी में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को आमंत्रित किया गया। रामकृष्ण धूत और आरजीए को अलग कर देखना संभव नहीं, वह आरजीए की आत्मा रहे हैं। आरजीए की परंपरा के अनुसार पूर्व अध्यक्ष स्नातक संघ की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका अनुभव व मार्गदर्शन सभी को स्फूर्ति प्रदान करता है। उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के कई डाक्टर भी आरजीए के सदस्य हैं।
मंत्री अजय अग्रवाल ने संघ की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि आरजीए सक्रिया व गतिशील संस्था है, जो विचारों, चिंतकों, विश्लेषकों का उपवन है। यह शिक्षा, सेवा, जागृति का कार्य कर रही है। आरजीए में 21 से 92 वर्ष के सदस्य हैं। 21 वर्ष वाले सदस्य का सुझाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना 92 वर्ष के सदस्य का होता है। समय-समय पर ज्वलंत विषयों पर चर्चा होती रही है। विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं।
10,000 छात्रों को अब तक मिली आर्थिक सहायता
गत 15 वर्ष से आरजीए शिक्षा न्यास शिक्षा को प्रोत्साहित कर छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है। गत वर्ष 1 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति एक हजार छात्रों में वितरित की गई। अब तक 10,000 छात्रों को यह सुविधा प्राप्त हो चुकी है। आरजीए ने गत दिनों आनंद उत्सव किया। आरजीए के मंच से कई गणमान्यों ने आर के धूत की स्मृति में व्याख्यान दिया। आरजीए द्वारा भविष्य में परंपरागत गतिविधियों जैसे प्रतिभा विकास, यूथ कॉन्क्लेव, डॉक्टरों की चौपाल कार्यक्रम की योजना है।
आरजीए स्वर्ण जयंती शिक्षा न्यास के चेयरमैन नंदगोपाल भट्टड़ ने शिक्षा न्यास के उद्देश्यों की जानकारी सभी के साथ साझा करते हुए कहा कि आरजीए ने 15 वर्ष पूर्व स्वर्ण शिक्षा न्यास का गठन इस सोच के साथ किया कि अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करना है, तो ज्ञान रूपी शिक्षा का प्रसार करना होगा। इस भाव को लेकर आगे बढ़े हैं। यह छोटा भाव बड़ा रूप लेकर सबके सामने है। शिक्षा न्यास ने दस हजार बच्चों को छात्रवृत्ति दी, लेकिन एक करोड़ की राशि कम है।
एक होनहार बच्चे में प्रतिभा है, लेकिन उसके पास साधन नहीं है, तो उसके लिए साधनों को उपलब्ध करवाना होगा। कई परिवार बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियों के साथ समझौता करना पड़ता है। इसलिए सभी से निवेदन है शिक्षा न्यास से जुड़कर अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करें। शिक्षा न्यास ने स्किल विकास का कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें अब तक 99 बच्चों ने भाग लिया और पारंगत होकर विभिन्न संस्थानों पर नौकरी कर रहे हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं का परिचय और आभार प्रदर्शन
कल से एक और स्किल विकास का कार्यक्रम आरंभ 25 बच्चो के साथ होगा। आपका दिया दान, अनुदान नहीं, यह बच्चों के लिए ऐसा सहयोग है, जो उनके भविष्य को उज्ज्वल करेगा। अरुण लाहोटी ने रामकृष्ण धूत का परिचय दिया। चेयरमैन डॉ. मोहन गुप्ता ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संयोजक कैलाश मंत्री ने किया। मुख्य वक्ता का परिचय अशोक बंसल ने दिया। समन्वयकर्ता दीपक बंग ने सभी का आभार प्रकट किया।
अवसर पर भाग्यनगर काँवड़ सेवा संघ के चंपालाल बैद, राइस राइटर पन्ना माहेश्वरी, ट्विन सिटी पॉन ब्रोकर असोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार जैन, संस्कार धारा के रामनिवास बंसल, अनिल बंसल, विजय कुमार जिंदल, मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, हैदराबाद-सिकंदराबाद, सिखवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष हरिकिशन ओझा, श्री विप्र सेवा संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष उमेश शर्मा, सुरेश शर्मा, रमेश कुमार बंग, प्रेम कुमार मुणोत, भगवानदास विजयवर्गीय, जसमत पटेल, तरुण मेहता, महेश बैंक के वाइस चेयरमैन गोविन्द नारायण राठी, निदेशक रूपेश सोनी, अमित लड्डा, विप्र फाउंडेशन सहित अन्यों ने वक्ता का सम्मान किया।
अवसर पर आरजीए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.एम. साबू, सोहनलाल कड़ेल, श्याम सुन्दर मूंदड़ा, ओमप्रकाश अग्रवाल, हरिकिशन ओझा, सुरेशचंद काबरा, प्रकाश नारायण राठी, ए.के. वाजपेयी, अरविन्द नाराणिया, गिरधारीलाल तोष्णीवाल, गिरधारीलाल गुप्ता, लाजपत राय गुप्ता, डी.पी. अग्रवाल, जितेन्द्र विजयवर्गीय, संदीप झँवर, अमित झँवर, संपत दरक, आरजीए के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य व अन्य उपस्थित थे।
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