महेश बैंक चुनाव के लिए मन की बात
प्रिय अंशधारकों, पिछले पाँच सालों से झूठे आरोपों द्वारा मुझे आहत किया जा रहा है। मैं अपनी पीड़ा आपके सिवा किसे कह सकता हूँ। बैंक के चुनाव आए, तो सोचा था कि कुछ अच्छा होगा, लेकिन यह क्या, केवल गंदगी उछाली जा रही है। मैं साफ-साफ देख पा रहा हूँ कि झूठ तंत्र फिर मैदान में हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने मुझे पिछले पाँच सालों में कई-कई बार पीड़ा दी। यह तो भला हो अंशधारकों का, जिन्होंने 2005 से 2020 तक के समय में मुझे इस काबिल बनाया कि मैं दर्द सह सकूँ। लेकिन, अब नहीं। चुनाव प्रचार के दौरान मुझे नीचा दिखाने की कोशिश की गयी है, उससे मैं बहुत क्षुब्द हुआ।
मुझे याद आता है वह समय, जब बैंक की शाखाएँ बढ़ रही थीं और व्यापार भी बढ़ रहा था और मुझे मेरे साथियों, बैंक के स्टॉफ, ग्राहकों व अंशधारकों पर गर्व हो रहा था। अंशधारकों, जहाँ तक घोटालों की बात है, तो मुझे पता है कि कुछ हुआ ही नहीं था। अगर होता तो अब-तक बाहर आ ही जाता। विगत पाँच वर्षों से सिर्फ वे ही आरोप। याद कीजिए उन लोगों द्वारा मुझे कहाँ-कहाँ घसीटा गया, जिनका ध्येय मात्र बैंक के विकास को अवरुद्ध करना था।
झूठे आरोपों की सच्चाई और बनावट का पर्दाफाश
शेयर होल्डर वेल्फेयर असोसिएशन बनाकर उन लोगों ने कई सरकारी महकमों में मुझ पर, मेरे साथियों पर व बैंक के विरुद्ध कई झूठे आरोप लगाए, लेकिन अगर आरोप सही होते तो अब तक बाहर आ जाते। आज इल्जामों को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है कि वे सरकारी महकमों के निर्णय हों। सच्चाई छिप नहीं सकती, बनावट के उसूलों से, खुशबू आ नहीं सकती, कागज़ के फूलों से। बैंक को बनावट के उसूल नहीं चाहिए और न ही वे लोग चाहिए, जो मझधार में छोड़कर भाग जाएँ। मुझे उस नीति और नीयत की जरूरत है, जो बैंक को फिर से प्रगति पथ पर दौड़ा सके।
2005 से 2020 तक की प्रगति की रफ्तार 2020 के बाद भी चलती रहती तो आज आपका बैंक दक्षिण भारत के सर्वश्रेष्ठ बैंकों की पंक्ति में खड़ा रहता, लेकिन विगत पाँच वर्षों में जिन्होंने आप द्वारा चुने गए बैंक के निदेशकों की पीठ में छुरा घोंपकर आपके अपने बैंक को नीचे गिराने की कोशिश की, उन्हें आप जरूर पहचानते हैं। मुझे पता है कि ये लोग न केवल स्वार्थी हैं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए बैंक की जड़ें खोदने से भी परहेज नहीं करेंगे।
अंशधारकों का साथ—बैंक की नई दौड़ की ताकत
पूरे चुनाव प्रचार के दौरान मुझे एक बात समझ में आयी कि चमड़े की जुबान से झूठे आरोप गढ़ना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना असम्भव है। अंशधारकों, मुझे पता है कि अगर बैंक को सच्चे लोगों का साथ मिला तो बैंक में अभी भी दौड़ने की शक्ति है। इसके लिए संस्थापक पैनल के सभी सदस्यों को आपके समर्थन की जरूरत है। अंशधारकों, बैंक है तो हम हैं और हम हैं तो बैंक है। आपका एक-एक वोट संस्थापक पैनल के लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा।
आपका वोट केवल मुहर पर लगी स्याही नहीं है, बल्कि यह बैंक के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। ऐसा न हो कि आपका वोट गलत लोगों को चला जाए जो बैंक की प्रगति में बाधक बनें। मेरी इच्छा है कि बैंक आगे बढ़े। देशभर में बैंक की शाखाएँ व व्यापार बढ़े। अंशधारकों उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य न मिल जाए। मेरे संस्थापकों (अंशधारकों) आज अगर आप चूक गए तो बैंक गलत हाथों में चला जाएगा। इसलिए मैं एक ही बात कहना चाहता हूँ ‘संस्थापकों’ पर विश्वास – बैंक की प्रगति की रफ्तार।
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