पर्वों की गरिमा बनाए रखें
पाम पंचांग के अनुसार राखी का त्यौहार अपने साथ व्रत-पर्वों की झड़ी लगा देता है, जैसे- गणेश उत्सव, नवरात्रि, दीपावली आदि। इन त्योहारों को लोग भव्य रूप से मनाते हैं। बुद्धि के देवता गणेश, शक्ति की देवी दुर्गा और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा भव्य रूप से करते हैं। वास्तव में यह व्रत-त्यौहार हमें अध्यात्म की शक्ति या ऊर्जा का अपने जीवन में संचार करने, सामूहिक एकता बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।
पर्वों के अवसर पर जीवनोपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। इस परंपरा का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करके उन्हें भी सुखी और आनंदित जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। समय के साथ समाज में हुए परिवर्तन को देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि अब इन त्योहारों से दर्शन और अध्यात्म की भावना कोसों दूर हो गई है। लोगों में उत्साह दिखाई देता है, जो कभी-कभी अशोभनीय-सा लगता है।
त्यौहारों के नाम पर चंदा इकट्ठा किया जाता है। विशाल पैमाने पर पंडाल बनाए जाते हैं, किंतु उनमें पूजा-पाठ व श्रद्धा का कुछ और ही रूप दिखाई देता है। इनके माध्यम से लोग अपने रुपये-पैसे का बढ़-चढ़ कर दिखावा करते हैं। ऐसे कर्म अध्यात्मक जीवन में हानिकारक माने जाते हैं। मेरा भक्तों से अनुरोध है कि इन त्यौहारों में हुड़दंग मचाने की बजाय इन्हें सद्भाव व सादगी के साथ मनाएँ।
धर्म और त्यौहार : आस्था, स्वच्छता और संस्कार का संगम
अपने देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा भाव रखें। ऐसा कोई अवसर न दें, जिसका लाभ उठाकर अन्य समाज के लोग अपने पर्व-त्यौहारों के साथ-साथ देवी-देवताओं का मजाक बनाए सकें। हमारे पूर्वजों ने इन त्यौहारों के माध्यम से एक सभ्य एवं श्रेष्ठ समाज की व्यवस्था की है। पंडालों में समूह में पूजा-पाठ करें। अपने मुहल्लों को सुंदर सजाएँ, स्वच्छता बनाए रखें, लोगों की मदद करें, धर्म ग्रंथों से संबंधित प्रतियोगिताओं का आयोजन करें, भजन-कीर्तन करें, भगवान की लीलाओं का मंचन करें।
इससे आने वाली पीढ़ियों को सभ्य व सुंदर समाज में रहने का मौका मिलेगा। त्यौहारों के नाम पर अश्लीलता का प्रदर्शन नहीं करें। अपने घर-परिवार तथा मुहल्ले के बुजुर्गों व महिलाओं तथा बच्चों को सुरक्षित माहौल देने का प्रयास करें। धर्म और त्यौहारों की आड़ में अपनी शोहरत का दिखावा न करें। किसी प्रकार की पुरानी रंजिश न निकालें।
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इस समय पूजा-पाठ में डूबकर अपने कर्म सुधारने का प्रयास करें। जीवन में अध्यात्म भावना का अति महत्व होता है। गीता में भगवान अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं- मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, क्योंकि वह तुम्हारा ही कर्म है, लेकिन तुम्हें इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको। मैं तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।
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