एक्जिट पोल सत्यानाश हो तेरा !
भाई जी का हृदय वैसे ही धड़क रहा था जैसे जवानी में पहली बार अपनी प्रेमिका से मिलने के समय धड़का होगा! उनकी खुशी छुपाये नहीं छुप रही थी! उनकी घनी खिचड़ी मूंछों के बाहर उनकी कत्थई दागदार, उबड़-खाबड़ दांतों की, दांत निपोरती हंसी, ओढ़ी हुई गंभीरता के बाद भी समुद्र में ज्वार-भाठा की तरह उछालें मार रही थीं! इसका कारण था, अधिकांश चुनावी एग्जिट पोल में उनकी विजय की घोषणा !
पार्टी कार्यालय में उनके शुभचिंतक और समर्थक उनको गुलाल लगाकर बधाई देते हुए, मोगरा और चमेली के सुगन्धित हार पर हार पहनाये जा रहे थे! चार अंगुल की गर्दन का तो पता ही नहीं था, मालाओं के बीच से सिर्फ खल्वाट खोपड़ी ऐसे झाँक रही थी जैसे कोई बिलाव, पीले रंग से सद्य पुते खिड़की से झाँक रहा हो! पार्टी ऑफिस तो छोड़िये उनके बंगले के सामने समर्थक ढोल-ताशे, बैंड बाजे और भैया जी के जय-जयकार के साथ नागिन नृत्य के कम्पीटीशन में ऐसे रंगे हुए थे कि एक बार नागिन भी देख ले तो शर्म से मर-मर जाए !
ढोल-ताशों के बीच परिणाम की बेचैन प्रतीक्षा
बंगले में लगातार मोबाईल और फोन की घंटी टनटना रही थी! प्राणनाथ की विजय का समाचार सुन उनकी श्रीमती जी का मन खुशी के सागर में उभ-चुभ हो रहा था! मनमयूर छम-छमाछम ऐसा नाच रहा था कि शहर और शहर के बाहर से आते बधाइयों का धन्यवाद ज्ञापन करते-करते, उनकी जीभ लटपटाने लगी थी! बंगले में उनके आधा दर्जन शावक बंदरों की तरह बेहिसाब उछल-कूद में मस्त थे! बंगले के बाहर चौराहे पर अनारदानों की छटा और बम की गूँज से पूरा इलाका दीपावली में तब्दील हो चुका था! भैया जी पूरी रात मंत्रीपद के स्वप्न-लोक में ऐसे गुम हुए कि सुबह होने का पता ही नहीं चला !
दूसरे दिन मत-गणना की खुशनुमा सुबह थी। भैया जी एक घंटे तक अपने आराध्य की पूजा-पाठ के बाद अपने समर्थकों से घिरे, धड़कते हृदय से अपने बंगले में के लान में बैठे हुए थे! मत-गणना शुरू हुए चार घंटे बीत चुके थे। वे अपने प्रतिद्वन्दी भुलऊ राम जोल्हे से बीस हजार वोटों से आगे चल रहे थे। उनकी जीत हंड्रेड परसेंट पक्की हो चुकी थी! शाम चार बजे आखिरी दौर की मतगणना शुरू हुई! ढोल-ताशे, बैंड बाजों की तुमुल ध्वनि महाभारत के युद्ध को जीवंत करने लगी!
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भुलऊ जोल्हे के पक्ष में अचानक बढ़त की खबर
समर्थकों का नागिन डांस अपने चरमोत्कर्स पर पहुँच गया ! तभी किसी संदेशिये ने अंदरखाने से आकर खबर दी कि भैया जी के विरुद्ध खड़े भूलऊ जोल्हे के पक्ष में एक तरफा वोट निकल रहे हैं! बाजों की ध्वनि कुछ मंद हुई, नागिन डांस थोड़ा ठिठकने लगा! थोड़ी देर बाद फिर खबर आई कि भूलऊ भैया जी की बराबरी पर आ गया है और दोनों के वोटों में टक्कर चल रही है। कभी भैया जी आगे तो कभी भूलऊ आगे! ढोल-ताशे, बैंड-बाजे एक्का-दुक्का ढप-धिप, प्यूँ-पों करने लगे!

नागिन डांस थम सा गया! बस एक-दो लोगों के कूल्हे कभी-कभार हिल रहे थे! तभी किसी पनौती समर्थक ने मुंह लटकाए, करीब-करीब रो देने वाले अंदाज में आकर खबर दी कि भुलऊ जोल्हे, भैया जी से दस वोटों से जीत गया…! लगा जैसे वे दस वोट नहीं थे, अर्जुन के चलाए दस बाण थे जिसने भीष्म रुपी भैया जी को चारों खाने चित्त कर दिया था! महाभारत युद्ध का अंतिम दृश्य साक्षात हो रहा था। भैया जी के शिविर में कौरव-पक्ष की तरह सन्नाटा पसरा हुआ था ! बैंड-बाजा, ढोल-ताशे के स्वर वायुमंडल में पछाड़ खा रहे थे! नागिन डांस की उड़ती धूल, हाहाकार करती जमीन पर बिखर चुकी थी ! थोड़ी देर बाद नजर गई तो वही बैंड बाजे वाले और नागिन- नृत्य-नर्तक मदमत्त होकर भुलऊ जोल्हे के विजय-जुलूस में उछलते-कूदते, अपनी कला का प्रदर्शन करते झूम रहे थे!
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