‘धरती आबा’ के संकल्पों को पूरा करती मोदी सरकार

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती केवल उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व को याद करने तक सीमित नहीं है; यह समाज में समानता, न्याय और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने का अवसर भी है। धरती आबा का जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय और असमानता के खिलाफ दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास से सामाजिक बदलाव संभव है। हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, अन्याय के खिलाफ साहस से लड़ना चाहिए और अपनी संस्कृति तथा प्रकृति का सम्मान करना चाहिए।

15 नवंबर 2023 को पीएम नरेन्द्र मोदी झारखंड के खूंटी जिली के उस गांव में पहुंचे जहां आज तक देश का कोई प्रधानमंत्री नहीं पहुंचा था। इस गांव का नाम था उलिहातू। ये गांव लोकनायक बिरसा मुंडा की जन्मस्थली है। धरती आबा के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने बिरसा मुंडा के जन्मस्थान की मिट्टी को पवित्र बताते हुए उससे तिलक भी लगाया।

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उरांव क्षेत्र, वर्तमान झारखंड में हुआ था। बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के गौरव, जननायक और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। एक साधारण बालक महज 25 साल की उम्र में बिरसा मुंडा से यूं ही भगवान बिरसा मुंडा नहीं बन गये। सादगी, साहस और आदिवासी समाज के प्रति उनके समर्पण ने उनको धरती आबा का दर्जा दिलाया।

बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध आवाज़ उठाकर समाज में जागरूकता की अलख जगायी। उन्होंने 1894 में उलगुलान आंदोलन शुरू किया, जिसमें ब्रिटिश शासन के खिलाफ और आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज उठाई गई थी। बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म के प्रसार और धर्मांतरण का कड़ा विरोध किया क्योंकि उन्हें लगा कि यह आदिवासी संस्कृति और पहचान को खत्म कर रहा था। उन्होंने अपने जीवन में आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अनेक पहल की।

धरती आबा का संघर्ष: शोषण के खिलाफ उलगुलान और कारावास

जमींदारों और अंग्रेजों की शोषण की नीति के खिलाफ उलगुलान करने वाले धरती आबा को वर्ष 1900 में ब्रिटिश सेना ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें रांची जेल में रखा गया। जेल में उन पर कई अमानवीय व्यवहार हुए, लेकिन आंदोलनकारी धरती आबा कभी कमजोर नहीं पड़े। जेल में भी वह अपने साथियों का हौसला बढ़ाते थे। कहते थे, हमारी जमीन और आजादी के लिए यह बलिदान जरूरी है। उनकी मृत्यु (9 जून 1900) को जेल में ही हो गयी।

29 नवंबर 2023 को मन की बात के 106 एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, भगवान् बिरसा मुंडा हम सबके हृदय में बसे हैं। सच्चा साहस क्या है और अपनी संकल्प शक्ति पर अडिग रहना किसे कहते हैं, ये हम उनके जीवन से सीख सकते हैं। उन्होंने विदेशी शासन को कभी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने ऐसे समाज की परिकल्पना की थी, जहां अन्याय के लिए कोई जगह नहीं थी। वे चाहते थे कि हर व्यक्ति को सम्मान और समानता का जीवन मिले।

धरती आबा के कार्यों ने स्पष्ट रूप से दर्शाया कि उनका संकल्प आदिवासी संस्कृति और गरिमा की रक्षा, सामाजिक सुधार और जल, जंगल और जमीन की रक्षा थे। 24 अक्तूबर 2021 को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, गरीब और मुसीबत से घिरे लोगों की मदद करने में भगवान बिरसा मुंडा हमेशा आगे रहे। उन्होंने सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए समाज को जागरूक भी किया।

बिरसा मुंडा के आदर्शों पर आदिवासी उत्थान को नई दिशा

मोदी सरकार, बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलते हुए, आदिवासी समुदायों के उत्थान, सशक्तिकरण और उनकी सांस्क्तिक विरासत के संरक्षण के लिए कई पहल कर रही है। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए मोदी सरकार ने जो समर्पण दिखाया है, वो ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के सम्मान और सशक्तिकरण को नयी ऊंचाई दी है। देश की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चयन, अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की अवधि बढ़ाना, नयी जातियों को शामिल करना और जनजातीय मंत्रालय के बजट में वृद्धि – इन सबसे सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समुदायों के बलिदान, संस्कृति और विरासत का सम्मान करने और उनके साहस तथा राष्ट्र-निर्माण की कहानियों को राष्ट्रीय चेतना में लाने के लिए जनजातीय गौरव वर्ष मनाने की घोषणा की थी। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत की। आदिवासी समुदाय के विकास के लिये मोदी सरकार की प्रमुख पहलों में जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

2014-15 में 4,497.96 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में यह 14,925.81 करोड़ रुपये हो गया। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान इसे धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना का लक्ष्य व्यापक विकास पहलों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक आदिवासी लोगों को लाभान्वित करना है, जिसमें आवास, बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि विकास शामिल हैं।

जनजातीय गौरव दिवस और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का सम्मान

आदिवासी विरासत और संस्कृति को सम्मानित करने के लिए 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया गया है। आदि महोत्सव आदिवासी विरासत को प्रदर्शित करने और आदिवासी उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय मंच है। वर्ष 2024 में सामाजिक न्याय के प्रतीक, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर एवं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डाक टिकट जारी किया। यह डाक टिकट न सिर्फ धरती आबा, भगवान मुंडा जी के शौर्य और पराम का प्रतीक है बल्कि जनजातीय समुदाय के कल्याण हेतु मोदी सरकार के समर्पण को भी दर्शाता है।

मोदी सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा के स्तर में सुधार देखा गया है, साक्षरता दर 2011 में 59 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 71.6 प्रतिशत हो गई है। आईआईटी दिल्ली और एम्स दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आदिवासी छात्रों के लिए विशेष चेयर और प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। वहीं ट्राइफेड द्वारा शुरू की गई वन धन योजना आदिवासी आबादी के लिए रोजगार सृजन का एक स्रोत बनकर उभरी है, जो वन उत्पादों पर आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देती है।

आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के लिए विभिन्न राज्यों में 10 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं और पहलों का उद्देश्य आदिवासी समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनका सशक्तिकरण करना है। वर्ष 2022 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजग ने जब अपने उम्मीदवार का नाम घोषित किया तो वह नाम आदिवासी समाज से था।

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बिरसा मुंडा की जयंती: समानता और सामाजिक चेतना का संदेश

संपूर्ण आदिवासी समाज और राष्ट्र के लिये ये कितने गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति की कुर्सी पर आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मू आसीन है। दुख के साथ यह कहना पड़ता है कि पूर्व की सरकारों ने आजादी के लंबे कालखण्ड में आदिवासी समाज के साथ घोर अन्याय किया। उन्हें विकास से वंचित रखा। मोदी सरकार में आदिवासी समाज देश की प्रगति का हिस्सेदार है और तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

लोकनायक बिरसा मुंडा का संघर्ष आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा पुंज है जो हमें निराशा और हताशा में नई राह दिखाता है। वास्तव में, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती केवल उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व को याद करने तक सीमित नहीं है; यह समाज में समानता, न्याय और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने का अवसर भी है। धरती आबा का जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय और असमानता के खिलाफ दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास से सामाजिक बदलाव संभव है। हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, अन्याय के खिलाफ साहस से लड़ना चाहिए और अपनी संस्कृति तथा प्रकृति का सम्मान करना चाहिए।

-डॉ. आशीष वशिष्ठ
-डॉ. आशीष वशिष्ठ

इसमें कोई दो राय नहीं है धरती आबा के महान् आदर्शों को स्मरण करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने 24 फरवरी 2019 को मन की बात में कहा था, आज, अगर हमारे नौजवानों को मार्गदर्शन के लिए किसी प्रेरणादायी व्यक्तित्व की जरूरत है तो वह है भगवान बिरसा मुंडा। भगवान बिरसा मुंडा ने दुर्व्यसनों रहित जीवन, अंधविश्वास से मुक्ति व अपनी भूमि के प्रति स्वाभिमान का भाव जनजाति समाज को सिखाया। उन्होंने शोषण के प्रति आवाज उठाई व बेगारी प्रथा का विरोध किया। भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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