नासिक TCS मामला – आरोपी निदा खान ने कोर्ट से मांगी राहत

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 नई दिल्ली। महाराष्ट्र के नासिक में आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के खुलासे के बाद से वहां की एचआर मैनेजर निदा खान फरार हो गई थी। अब उसकी लोकेशन सामने आ गई है।

‘दबंग मैम’ निदा खान के परिवार के मुताबिक, वह मुंबई में है और प्रेग्नेंट है। इस समय फरार चल रही निदा ने नासिक की एक स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है। उसने अर्जी में अपनी मेडिकल स्थिति को एक मुख्य आधार बनाया है और इसे मुख्य कारक के रूप में पेश किया जा सकता है। अब इस मामले में नया पहलू जुड़ गया है।

सात लोग हो चुके हैं गिरफ्तार

अधिकारी इन दावों की पुष्टि करेंगे, जबकि विशेष जांच दल (SIT) उसे हिरासत में लेने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है। पुलिस टीसीएस के नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ी नौ शिकायतों की जांच कर रही है। मामले में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छह पुरुष और एक महिला एचआर हेड शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों का दावा है कि उनके वरिष्ठ सहकर्मियों ने उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया और एचआर डिपार्टमें ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। ये घटनाएं फरवरी 2022 और मार्च 2026 के बीच हुईं।

शादी का झूठा वादा करके बनाए शारीरिक संबंध

पुलिस ने बताया कि आरोपियों में से एक ने शादी का झूठा वादा करके एक कर्मचारी के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी ने कर्मचारियों में से एक को गलत तरीके से भी छुआ और उसकी निजी तथा वैवाहिक जीवन को लेकर शर्मनाक टिप्पणियां कीं।

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पुलिस ने एक बयान में कहा, “जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के संबंध में कंपनी के मुख्य अधिकारी से बार-बार मौखिक शिकायतें कीं तो उन्होंने छेड़छाड़ से जुड़ी उनकी शिकायतों पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके बजाय, उन्होंने प्रभावी रूप से उनके कृत्यों को बढ़ावा दिया।”

पुलिस के मुताबिक, निदा खान ने एक महिला कर्मचारी को शिकायत दर्ज न कराने के लिए बोला और उससे कहा, “ऐसी बातें तो होती ही रहती हैं।”

जबरदस्ती नमाज पढ़ने पर किया मजबूर

पुलिस ने बताया कि आरोपी ने एक पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए भी मजबूर किया और उसके धर्म का अपमान किया। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और एचआर हेड अश्विनी चैननी के रूप में हुई है।

18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को बनाया जाता था निशाना 

इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आरोपी एक गिरोह के तौर पर काम करते थे और मुख्य रूप से 18 से 25 साल की उम्र की महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे।

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अब तक नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से एक FIR एक पुरुष कर्मचारी ने भी दर्ज कराई है। उस कर्मचारी ने धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश का आरोप लगाया है।

इन शिकायतों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, जबरन मांसाहारी भोजन खिलाना, धार्मिक उत्पीड़न और दबाव डालना तथा कुछ खास धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर करना जैसे आरोप शामिल हैं।

टीसीएस का क्या कहना है?

टीसीएस ने रविवार को जोर देकर कहा कि उत्पीड़न के मामले में उसकी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति है और वह पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है। 

कंपनी ने एक बयान में कहा, “टीसीएस की किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति लंबे समय से ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति रही है। हमने हमेशा अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई के लिए काम की जगह पर उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया है।”

कंपनी ने कहा, “जैसे ही हमें नासिक के इस मामले के बारे में पता चला, हमने तुरंत कार्रवाई की।” कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है और आगे की कोई भी कार्रवाई इस जांच के नतीजों के आधार पर ही की जाएगी।

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