आने वाले वर्षों में प्राकृतिक खेती को मिलेगी उच्च प्राथमिकता : तुम्माला नागेश्वर राव

हैदराबाद, कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना तैयार की जा रही है। आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक खेती (एपीसीएनएफ) के प्रतिनिधि विजय कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) और अन्य प्रतिनिधियों ने सचिवालय में मंत्री से मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान एपीसीएनएफ के पड़ोसी राज्यों और विभिन्न देशों में प्राकृतिक खेती के तरीकों और अपने अनुभवों, इस पद्धति से उच्च आय प्राप्त करने वाले किसानों की सफलता की कहानियों, बेहतर मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती में स्वास्थ्य उत्पादों के बारे में बताया। उन्होंने तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की।

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राज्य में प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ेगी

कृषि सचिव रघुनंदन और निदेशक गोपी ने अवसर पर इस वर्ष से शुरू की गई प्राकृतिक खेती की प्रगति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 489 क्लस्टर (प्रति क्लस्टर 50 हेक्टेयर) पहले ही बनाए जा चुके हैं और 61,125 किसानों का चयन कर उन्हें जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जैविक खेती के लिए केंद्र सरकार से निधियाँ मिल रही हैं।

इस पर राज्य सरकार ने कुल 42.07 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंत्री तुम्मला ने कहा कि अभी तक किसानों में यह गलत धारणा थी कि जैविक खेती से पैदावार कम होगी, लेकिन एपीसीएनएफ के प्रतिनिधियों और मेरे तथा साथी किसानों के अनुभवों ने इसे गलत साबित कर दिया। उन्होंने बताया कि पहले वर्ष से ही किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होने लगी है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती में स्वस्थ उत्पादों के विपणन के अवसरों को बढ़ाने की क्षमता है।

वर्षा आधारित क्षेत्रों में 3 फसलें उगाई जा सकती हैं। जैविक खेती पद्धति से खरपतवारों और कीटों की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारा कर्तव्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना है, जिससे न केवल मानवता का स्वास्थ्य बना रहेगा, बल्कि किसान की शुद्ध आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल जैविक खेती के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

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