नकारात्मक विचारों से बढ़ती है निराशा : रमेशजी

हैदराबाद, एक्सेप्ट, एप्रिशिएट और एक्नॉलेज जीवन में इन तीन इक्कों का उपयोग कर हम सहज, सरल और सुखी जीवन जी सकते हैं। उक्त उद्गार सद्गुरु रमेशजी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित राजमहल पैलेस होटल में आयोजित सत्संग में व्यक्त किए। रमेशजी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या स्थिति को एक्सेप्ट, एप्रिशिएट व एक्नॉलेज करने में हमारी उनसे अपेक्षाएँ या आशाएँ बाधा बनती हैं।

इसलिए जो जैसा है, उसे उसी रूप में यदि हम स्वीकार कर लेते हैं, तो जीवन सहज और सरल रूप में आगे बढ़ता चला जाता है। मानव जीवन के लक्ष्य को प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को स्वयं सुखी रहना चाहिए, दूसरों को हमेशा सुख देने का प्रयास करना चाहिए। शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक क्षेत्र में विकास करते हुए हमें आत्म स्वरूप को पहचाना है।

सकारात्मक दृष्टि अपनाएं, जीवन में सुख पाएं

स्वयं सुखी रहने के लिए हमें सबको स्वीकारना और सकारात्मक रहना है। दूसरों को सुखी करने के लिए सबकी प्रशंसा करना और सबकी आशाओं-अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करना, सभी क्षेत्रों में विकास के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना तथा आत्मभाव में स्थित होने के लिए किसी संत ज्ञानी या गुरु की शरण में जाना है।

रमेशजी ने कहा कि नकारात्मक विचारों के बंडल से हमारे जीवन में निराशा बढ़ती जाती है। इसलिए हमें अपनी दृष्टि को प्रयास करके सकारात्मक बनाना है और यह ध्यान रखना है कि हमारे भीतर जो सुख का खजाना है, उसे अनावश्यक विचार ही रोकते रहते हैं। बेकार विचारों की श्रृंखला को तोड़ने और विचारों की संख्या तथा गति को कम करने के लिए एक मिनट का ध्यान जादुई कार्य करता है।

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एक दिन में कई बार यह ध्यान हमारे विचारों को बदलने में सहायक है और लेट गो या अतीत की चीजों को भूल जाना भगवान का आशीर्वाद है। एक उदाहरण के द्वारा उन्होंने समझाया कि जब हम किसी एक वस्तु को बहुत देर तक हाथ में पकड़े रहते हैं, तब हमें उसका वजन बढ़ता हुआ महसूस होता है और हमारा हाथ भी दुःखने लगता है। इसी तरह यदि हम अपने मन में पुराने विचारों को जकड़कर रखते हैं, तो मन भी भारी रहता है और हमारी प्रगति भी रुक जाती है।

जीवन का सूत्र देते हुए रमेशजी ने कहा कि इस संसार या सृष्टि को बदलने का प्रयास मत कीजिए। आप स्वयं बदलिए तो आपको यह सृष्टि और संसार बदला हुआ ही नजर आएगा। सबके कल्याण की भावना कीजिए, आपका कल्याण खुद हो जाएगा। अवसर पर गुरु माँ ने कहा कि आपकी जैसी दृष्टि होती है, वैसे ही सृष्टि नजर आती है। उपस्थित साधकों ने दिव्य सत्संग का लाभ उठाया।

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