ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमताएं दिखाईं : राजनाथ सिंह

नयी दिल्ली/प्रयागराज, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से कुछ दिन पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इसे भारतीय सेना द्वारा उन्नत तकनीक का उपयोग करके आतंकी समूहों और उनके आकाओं पर निर्णायक प्रहार करने का एक ‘अद्वितीय’ उदाहरण बताया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि सशस्त्र बलों ने ‘‘धैर्य’’ दिखाते हुए आतंकी ढांचे को नष्ट करने में दक्षता दिखाई।

सिंह ने आगे कहा कि इस अभियान ने पूरी दुनिया को भारतीय सेना की क्षमताओं का एहसास कराया। भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान का लक्ष्य पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था। इन हमलों के कारण चार दिन तक भीषण सैन्य संघर्ष हुआ और इसे 10 मई को रोकने पर सहमति बनी।

सिंह ने कहा, ‘‘हमारे सैनिकों ने आतंकवादियों और उनके आकाओं को जो निर्णायक जवाब दिया, उससे पूरा देश गौरवान्वित हुआ। अच्छी बात थी कि हमने धैर्य दिखाया और केवल आतंकवादियों को तबाह किया; अन्यथा, पूरी दुनिया जानती है कि हमारे सशस्त्र बल क्या करने में सक्षम हैं।’’

रक्षा मंत्री ने इस अभियान को तकनीक के उपयोग का एक अनूठा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “इस अभियान में आकाश और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ कई नवीनतम उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।’’ सिंह ने कहा, “इससे साबित होता है कि हमारी सेनाएं बदलावों को समझती हैं और आत्मविश्वास के साथ उनका उपयोग करती हैं।”

रक्षा मंत्री का संदेश: सेना से अनुकूलन और चौंकाने वाली क्षमता पर जोर

वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने सेना के लिए सतर्क रहने और बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आज के जटिल और तेजी से बदलते परिवेश में आगे बढ़ने का एक ही मंत्र है: अनुकूलनशीलता। बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

सिंह ने किसी भी संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती के लिए “सक्रियता से तैयारी” का आह्वान किया। सिंह ने कहा, “जब मैं सक्रियता से तैयारी की बात कर रहा हूं, तो इसका एक और महत्वपूर्ण पहलू है – हैरत में डालने वाला तत्व। हमें ऐसी क्षमताएं भी विकसित करने की आवश्यकता है ताकि जरूरत पड़ने पर हम ऐसी कार्रवाई कर सकें जिसके बारे में दुश्मन ने कभी सोचा भी न हो।”

सिंह ने कहा, “वे हैरान रह जाएं। इतिहास गवाह है कि युद्ध में निर्णायक बढ़त हमेशा उसी के पास होती है जिसके पास हैरत में डालने की खूबी हो। मुझे पता है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं इस दिशा में काम कर रही हैं।” रक्षा मंत्री ने कहा, “लेकिन हमें और भी अधिक सक्रिय होने और इस दिशा में काम जारी रखने की आवश्यकता है।’’ (भाषा)

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