संसद का बजट सत्र ऐतिहासिक रहा, राष्ट्रगीत के साथ हुआ समापन

नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभाका बजट सत्र 2026 शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 18वीं लोकसभा का सातवां सत्र और राज्यसभा का 270वां सत्र राष्ट्र के विकास की नई प्राथमिकताओं और विधायी सक्रियता का गवाह बना। जहाँ राज्यसभा ने 109.87% की शानदार उत्पादकता दर्ज की, वहीं लोकसभा में भी 93% कार्य संपन्न हुआ।
लोकसभा में क्या हुआ
विधायी कार्यों और चर्चाओं का केंद्रलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सूचित किया कि 28 जनवरी से शुरू हुए इस सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं, जो लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। बजट के दौरान वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। 18 मार्च को विनियोग विधेयक और 25 मार्च को वित्त विधेयक पारित किया गया।
प्रमुख विधेयक
सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026, वित्त विधेयक, 2026, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 प्रमुख रहे। हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सदन द्वारा पारित नहीं किया जा सका।
राज्यसभा: उच्च उत्पादकता और कूटनीतिक विमर्श
राज्यसभा के सभापति ने सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे राष्ट्र के विकास पथ का निर्धारक बताया। सदन की कार्यवाही 157 घंटे 40 मिनट चली। इस दौरान 117 प्रश्न और 446 शून्य काल के मामले उठाए गए।
कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा:
सदन ने ‘भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ और ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर सरकार के वक्तव्यों का संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर राष्ट्र के सामूहिक संकल्प को रेखांकित किया।सदन की बैठक 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि 18वीं लोकसभा के इस (सातवें) सत्र में कुल 31 बैठकें हुईं और सदन की कार्यवाही 151 घंटे तथा 42 मिनट तक चली। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कार्य उत्पादकता 93 प्रतिशत रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई अन्य दलों के प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे।
संसदीय गौरव:
हरिवंश नारायण तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित हुए, जिसे सभी दलों ने सराहा।
भाषाई विविधता की मिसाल
दोनों सदनों में भारत की भाषाई शक्ति का प्रदर्शन हुआ। लोकसभा में 18 भारतीय भाषाओं में 181 बयान दिए गए, जबकि राज्यसभा में 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 94 बार सदस्यों ने अपनी बात रखी। दोनों ही सदनों में ‘सिमल्टेनियस इंटरप्रिटेशन’ (एक साथ अनुवाद) की सुविधा ने इस संवाद को सुगम बनायाI
संपूर्ण राष्ट्रगीत के साथ संपन्न हुआ संसद का बजट सत्र
पहली बार “वंदे मातरम्” को पूर्ण रूप में गाया गया और देश के राष्ट्रगीत को उसका वास्तविक सम्मान मिला। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। आज यह साबित हो गया कि जब राष्ट्र पहले होता है, तब “वंदे मातरम्” सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि पूरे देश की भावना बन जाता है। पूरे छह छंदों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अटूट राष्ट्रभक्ति को दर्शाता है। अपनी जड़ों और संस्कृति से ऐसा गहरा जुड़ाव ही उन्हें सबसे अलग बनाता है। हमें अपने प्रधानमंत्री पर गर्व है। वंदे मातरम् भारत माता की जय जय हिंद।राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की धुन के साथ ही लोकसभा की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।(भाषा)
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