महिलाओं के लिए कुछ और सुरक्षित हो सार्वजनिक परिवहन
हैदराबाद, सरकार की महालक्ष्मी योजना के बाद हैदराबाद और तेलंगाना के दूसरे शहरों और ग्रमीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा सार्वजनिक परिवहन के उपभोग में वृद्धि तो हुई है, लेकिन सुरक्षा एवं जागरूकता की दृष्टि से काफी कुछ है, जो बदला नहीं है। अब भी अधिकतर महिलाएं सार्वजनिक यात्रा के लिए हिचकिचाती हैं और किसी भी प्रकार की घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया कहाँ और किस तरह व्यक्त की जाए इसकी जानकारी से अनभिज्ञ हैं।
शहर के एक कॉलेज के पाँच विद्यार्थियों की टीम ने आरटीसी बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं पर एक सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें 52 प्रतिशत महिलाएं भीड़ के कारण असहज महसूस करती हैं, हालाँकि 23 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि सब कुछ ठीक है। सर्वेक्षण टीम ने यह जताने का प्रयास किया है कि सार्वजनिक परिवहन सब के लिए है, और इसे अपनाने और सभी के लिए सुखद अनुभव में परिवर्तित करने के लिए उचित व्यवहार की आवश्यकता है।
ईथेम्स प्रबंधन शिक्षा संस्थान की टीम ने महिला यात्रियों के वास्तविक अनुभवों पर सर्वेक्षण कया है। सहायक प्रोफेसर डॉ. साहेरा फातिमा और डॉ. नागा लक्ष्मी कुंदेटी के मार्गदर्शन में छात्रों दिव्या बेंगानी, मिशिका चिराग कोटेचा, दृष्टि जैन, सैयद उस्मान अली और संयम जैन ने भाग लिया। सर्वेक्षण के परिणामों पर आधारित रिपोर्ट और सिफारिशें उन्होंने आरटीसी के प्रबंध निदेशक वी.सी. सज्जनार और महिला सुरक्षा शाखा की पुलिस महानिदेशक को सौंपे हैं। सिफारिशों में कहा गया है कि बसों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे ऐसे स्थान पर क्यूआर कोड प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की घटना के बारे में महिलाएं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को रिपोर्ट कर सकें। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता के लिए और अधिक काम किया जाने की आवश्यकता है। आधारभूत संरचना में वृद्धि और आरटीसी के स्टाफ के व्यवहार में परिवर्तन की सिफारिशों के साथ सर्वेक्षण टीम का मानना है कि विशेष रूप से हैदराबाद की आरटीसी बस व्यवस्था को देश और दुनिया के लिए आदर्श बनाया जा सकता है।

युवा शोधकर्ताओं का मानना है कि आवागमन के अनुभव पर गहराई से विचार करते हुए दोष न ढूँढा जाएँ, बल्कि आगे बढ़ने के रास्ते खोजे जाएं। मुफ्त यात्रा को झगड़े का कारण बनाने के बजाय यात्रियों के बीच सम्मान के भाव को प्रोत्साहित किया जाए। डॉ. साहेरा ने बताया कि टीएसआरटीसी बसों में महिला यात्रियों के बीच सीट संबंधी विवादों के हालिया वायरल वीडियो सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढाँचे की बढ़ती माँग को उजागर करते हैं, खासकर व्यस्त समय के दौरान बेहतर सहायता प्रणालियों, जागरूकता और साझा यात्री ज़िम्मेदारी की भावना से पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना की आरटीसी बस व्यवस्था लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। तेलंगाना की आरटीसी प्रतिदिन 9,000 से ज़्यादा बसें चलाती है, जिस में राज्य के 40 लाख से ज़्यादा यात्री लाभान्वित होते हैं और उनमें से महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं का है। मुफ़्त यात्रा योजना ने अनगिनत महिलाओं को नई आज़ादी, शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच प्रदान करके सशक्त बनाया है। इसके बावजूद यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ भीड़भाड़, आराम और सुरक्षा की चुनौतियाँ भी बढ़ गयी हैं। छात्र छात्राओं ने अपने सर्वेक्षण के दौरान 43 दिनों में 480 महिलाओं से संपर्क किया और इनमें से कुछ महिलाओं के साथ गहन चर्चा के रूप में विस्तार से बातचीत की। 52 प्रतिशत महिलाओं ने असुविधा और असहजता का अनुभव होने की बात कही, जबकि केवल 23 महिलाओं ने बताया कि उन्हें ऐप या हेल्पलाइन जैसे सुरक्षा उपकरणों के बारे में जानकारी है। कुछ यात्रियों की चिंताओं में भीड़भाड़, कम प्रशिक्षित कर्मचारी और शिकायतों की सीमित दृश्यता जैसी बातें शामिल थी।
विद्यार्थियों ने किया आरटीसी बस यात्रा पर सर्वेक्षण
सर्वेक्षण टीम का मानना है कि एक सुरक्षित और समावेशी यात्रा के लिए आरटीसी कर्मचारियों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण, बसों और टर्मिनलों में क्यूआर-कोड-आधारित शिकायत प्रणाली, प्रमुख बस स्टॉप पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय, व्यस्त समय के दौरान केवल महिलाओं के लिए बसें और साथी यात्रियों को सशक्त बनाने के लिए बाईस्टैंडर्स प्रशिक्षण और सादे कपड़ों और वर्दीधारी कर्मचारियों के साथ सहयोगात्मक पुलिसिंग जैसे सुझाव दिये गये हैं।
टीजीएसआरटीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वी.सी. सज्जनार ने इन जानकारियों का स्वागत किया करते हुए कहा है कि टीजीएसआरटीसी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सुझावों पर पहले से ही काम चल रहा है। बसों की संख्या बढ़ाने से लेकर चालक दल के प्रशिक्षण, सुरक्षा हेल्पलाइन, सीसीटीवी, बस ट्रैकिंग ऐप्स और एसएचई टीमों के साथ सहयोग तक निरंतर सुधार को प्राथमिकता दी जा रही है।
पुलिस महानिदेशक शिखा गोयल ने कहा है कि हर महिला को स्वतंत्र और निडर होकर यात्रा करने का अधिकार है। इस अध्ययन रिपोर्ट से सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित और अधिक समावेशी बनाने के मिशन को और मज़बूती मिलेगी।
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