भगवन नाम स्मरण मन की शुद्धि का साधन है

इस कलयुग में भगवन स्मरण, भगवत् नाम जाप, ध्यान, मंत्र जाप आदि को ढोंग व रूढ़िवाद या अंधविश्वास माना जाता है। यह सब क्रियाएं धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक हैं। इनके द्वारा हमारा मन एकाग्र होता है और हमारी आत्मा परम तत्व का सान्निध्य प्राप्त करने में समर्थ होती है। श्रीमद्भागवद्गीता, महापुराण, उपनिषद आदि धार्मिक ग्रंथों में इस विषय को विस्तार से समझाया गया है।

भगवत नाम स्मरण का अर्थ है- भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करना। इसका उद्देश्य अपने मन और आत्मा को सांसारिक विकारों से मुक्त करके ईश्वर के साथ जोड़ना है। भगवत् नाम स्मरण से नाम और नामी में कोई भेद नहीं रहता है। शास्त्रां के अनुसार, भगवान के नाम और स्वयं भगवान में कोई अंतर नहीं है।

जब हम भगवान के नाम का जाप करते हैं, तो हम वास्तव में स्वयं भगवान को ही पुकार रहे होते हैं। इससे हमारा संबंध ईश्वर के साथ गहरा होता है। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ब्राह्मण अजामिल है, जो विष्णु भक्त से व्यभिचारी बन कर अंत समय में अपने पुत्र नारायण का नाम लेने पर विष्णु लोक का अधिकारी बन गया। वास्तव में नारायण नाम की शक्ति से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई, जबकि वह अपने बेटे को याद कर रहा था।

मोक्ष का मार्ग : नाम स्मरण का बल

श्रीमद्भागवद्गीता और अन्य पुराणों के अनुसार, कलियुग में भगवन्नाम का स्मरण ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और शक्तिशाली साधन है। अन्य युगों में कठिन तपस्या और यज्ञों की आवश्यकता होती थी, लेकिन कलयुग में केवल नाम जाप से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। निरंतर नाम स्मरण से मन के भीतर विद्यमान वासनाएँ, क्रोध और लालच जैसे नकारात्मक विचार धीरे-धीरे शांत हो जाते हैं। मन की चंचलता दूर होती है और चित्त में एकाग्रता आती है, जिससे ध्यान और साधना में मदद मिलती है।

कई संतों और गुरुओं ने यह बताया है कि नियमित नाम स्मरण से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति जीवन के उतार-चढ़ावों को बेहतर ढंग से सहन कर पाता है। नाम स्मरण के लिए किसी विशेष विधि-विधान की आवश्यकता नहीं होती है।

यह भी पढ़े : सफलता का द्वार है इच्छा शक्ति

अतीत की नकारात्मकता को मिटाते हुए शांत व्यक्ति
पवन गुरू

इसे चलते-फिरते, उठते-बैठते किसी भी समय किया जा सकता है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है- निष्ठा और भाव। नाम का उच्चारण करते समय केवल मुख से ही नहीं, बल्कि हृदय से भी भगवान को याद करना चाहिए। अंतत नाम स्मरण का परम लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति है। यह भक्ति योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। निरंतर नाम स्मरण से आत्मा का शुद्धिकरण होता है और जीव जन्म-मरण के पा से मुक्त होकर भगवद् धाम को प्राप्त करता है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button