सफलता का द्वार है इच्छा शक्ति

प्रवचन

इच्छा शक्ति एक भावना है। कहते हैं कि दृढ़ इच्छा शक्ति से ही मानव महान बन सकता है। इच्छा शक्ति ही मानव को सफल बनाती है। इसके होने पर ही मानव अपने लक्ष्य प्राप्त करता है। दृढ़ इच्छा शक्ति किसी कार्य को करने की इच्छा जगाती है और जब तक वो कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक मानव को चैन से बैठने नहीं देती है। इच्छा शक्ति एक ऐसी शक्ति होती है, जो मानव को सदैव अहसास दिलाती रहती है कि यह कार्य करना है या अपने लक्ष्य को पूर्ण करना है।

इच्छा शक्ति के अभाव में मानव मन में निराशा या निरूत्साह की भावना पनपने लगती है। उसके मन में कोई कार्य करने का विचार ही नहीं आता है। इच्छा शक्ति के अभाव में मानव कोई कार्य ही नहीं कर सकता है। इसके अभाव में वह बेमन से कार्य करता है, जिससे वह कार्य ठीक से नहीं हो पाता है, जिस कारण उसे सफलता मिलने की संभावना कम होती है। इच्छा शक्ति मानव मन में कार्य करने के प्रति उत्साह उत्पादन करती है।

सफलता की कुंजी: दृढ़ इच्छाशक्ति और एकाग्रता

सफलता का एक ही नियम है कि अपने लक्ष्य को हर पल अपने मन में बनाए रखना और ऐसा करने में इच्छा शक्ति ही सहायता करती है। हमेशा विचार से ही कार्य शुरू होते हैं। यदि विचार ही नहीं होगा तो कार्य की शुरुआत ही नहीं हो पाएगी। दृढ़ता का आशय है कि यह लक्ष्य प्राप्त करना ही है। दृढ़ इच्छा शक्ति ही लक्ष्य को हमेशा हमारे सामने रखती है।

जैसे कुण्डलिनी शक्ति हर किसी के अंदर होती है, लेकिन अधिकतर लोगों में सुप्त होती है, वैसे ही इच्छा शक्ति भी हर किसी के अंदर होती है, लेकिन बहुत कम लोगों के मन में विकसित होती है। हम अपने मन में इच्छा शक्ति को विकसित करके सफल हो सकते हैं और अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

सारा का सारा खेल विचारों का है। इन विचारों को नियंत्रित करने वाली शक्ति अंदर से पैदा हो जाए तो सफलता के लिए बाहर से कुछ भी लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। अंदर की दुनियां में कोई भी शक्ति ध्यान से प्रकट की जा सकती है। एकाग्रता इस शक्ति को विकसित करने का मूल पदार्थ है।

योग निद्रा और ध्यान से बढ़ेगी इच्छाशक्ति

एकाग्रता, नियमित ध्यान से आती है। इसलिए हमें ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। एकाग्रता के द्वारा ही हम इच्छा शक्ति की भावना में वृद्धि करके अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। ध्यान की वैसे तो हजारों विधियां हैं, लेकिन योग निद्रा एक ऐसी विधि है, जो आसानी से ध्यान की दुनिया में लेकर जाती है।

अत इच्छा शक्ति बढ़ाने की शुरुआत योग निद्रा से करनी चाहिए। उसके बाद इच्छा शक्ति बढ़ाने के लिए त्राटक विधि या मंत्र जाप के द्वारा भी इच्छा शक्ति में वृद्धि होती है। कुछ ऐसी आदतें हैं जिनसे इच्छा शक्ति की भावना सुप्त पड़ जाती है, जैसे बहुत देर तक सोते पड़े रहना, अधिक भोजन करना, अश्लील साहित्य पढ़ना या ऐसी फिल्में देखना, किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करना आदि।

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जीवन में यदि सफल होने की आशा हो तो इच्छा शक्ति को बढ़ाना होगा। इच्छा शक्ति द्वारा मन में इच्छा उत्पादन होती है और उस इच्छा की पूर्ति होती है तो ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। इच्छा शक्ति को बीज मान कर किसी शायर के विचार पढ़े जा सकते हैं-

अतीत की नकारात्मकता को मिटाते हुए शांत व्यक्ति
पवन गुरू

क्या हासिल होगा तुम्हें
मुझे ज़मीन में दफना कर।
हूँ बीज-सा उभर आऊँगा
धरती माँ का सीना चीर कर।

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