दो-दो हाथ करने की तैयारी में रेवंत, मोदी को लिखा खुला पत्र

हैदराबाद, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रस्तावित परिसीमन पर विचार-विमर्श करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक योगदान पर विचार किए बिना आनुपातिक आधार पर लोकसभा सीट में वृद्धि से देश के संघीय संतुलन में विकृति आएगी।

रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे खुले पत्र में परिसीमन के लिए अपने हाइब्रिड मॉडल का सुझाव दिया, जिसमें 50 प्रतिशत सीट आनुपातिक आधार पर बढ़ाने और शेष सीट जीएसडीपी और अन्य प्रदर्शन मानदंडों के आधार पर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने कहा कि आनुपातिक मॉडल दक्षिण भारत की जनता और सरकारों को स्वीकार्य नहीं होगा और उनकी चिंताओं को दूर किए बिना आगे बढ़ने का कोई भी प्रयास अनिवार्य रूप से व्यापक विरोध तथा प्रतिरोध को जन्म देगा, क्योंकि यह न्यायोचित प्रतिनिधित्व के मूलभूत सिद्धांत को प्रभावित करता है।

सीट वृद्धि पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग तेज

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री को लिखे खुले खत में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर राष्ट्रीय, राजनीतिक सहमति निर्माण, एक हाइब्रिड मॉडल का सुझाव तथा महिला आरक्षण को सीटों की वृद्धि से जोड़े बिना तत्काल लागू करने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने लिखा है कि यह हमारे लोकतंत्र और देश के भविष्य पर दूरगामी प्रभाव डालने वाला विषय है। महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन, लोकसभा सीटों में वृद्धि तीन अलग-अलग मुद्दे हैं, जिनके बारे में लोगों के मन में यह भ्रम पैदा किया जा रहा है कि वे अनिवार्य रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का पूर्ण समर्थन करती है।

इसे वर्तमान 543 सीटों के साथ ही तुरंत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में भी लागू किया जाए। रेवंत रेड्डी ने कहा कि पहले भी बिना सीटों की संख्या बदले परिसीमन किया गया है और केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ बदली हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों में वृद्धि का प्रस्ताव, चाहे वह जनसंख्या या प्रो-राटा मॉडल पर आधारित हो, कई राज्यों विशेषकर दक्षिणी राज्यों के लिए स्वीकार्य नहीं है।

यह गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यदि इसे प्रो-राटा आधार पर किया गया, तो यह देश के लिए खतरनाक हो सकता है। प्रो-राटा आधार पर सीटों की वृद्धि यदि आर्थिक योगदान तथा सामाजिक और मानवीय विकास के परिणामों को ध्यान में रखे बिना की गई, तो यह देश के संघीय संतुलन में गंभीर और स्थायी विकृति उत्पन्न करेगी। प्रो राटा का अर्थ है अनुपात में। इसका उपयोग किसी भुगतान, लाभांश या देनदारी के आनुपातिक आवंटन को दर्शाने के लिए किया जाता है।

केंद्र पर दक्षिणी राज्यों के प्रभावों की अनदेखी का आरोप

रेवंत रेड्डी ने पत्र में लिखा है कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव के दक्षिणी राज्यों पर प्रभावों का पूरी तरह और सावधानीपूर्वक विश्लेषण नहीं किया है। दक्षिणी राज्य तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और केरल ने पिछले कई दशकों में जनसंख्या स्थिरीकरण, बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और उच्च मानव विकास परिणामों की दिशा में सचेत नीतियाँ अपनाई हैं। ये प्रयास राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप किए गए हैं और भारत की समग्र प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

हालाँकि वर्तमान प्रस्ताव के अंतर्गत इन्हीं राज्यों को संरचनात्मक रूप से नुकसान पहुँचाया जा रहा है और राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आगे लिखा है कि दक्षिणी राज्य वित्तीय वितरण के मामले में पहले से ही गंभीर अन्याय, पक्षपात और भेदभाव का सामना कर रहे हैं, जहाँ कुछ राज्य जैसे बिहार या उत्तर प्रदेश अपने योगदान की तुलना में अधिक प्राप्त करते हैं, जबकि तेलंगाना अपने योगदान से कम प्राप्त करता है।

लोकसभा सीटों में इस परिवर्तन के साथ हमें वित्तीय और नीतिगत भेदभाव के साथ-साथ राजनीतिक अन्याय भी सहना पड़ेगा। दक्षिणी राज्य, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपने महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, संसद में अपनी आवाज़ के सापेक्ष ह्रास का सामना करेंगे, जबकि उत्तर-मध्य क्षेत्र के उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को असंगत रूप से अधिक लाभ मिलेगा। इससे राष्ट्रीय एकता पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।

रचनात्मक विकल्प के रूप में हाइब्रिड मॉडल

रेवंत रेड्डी ने लिखा है कि रचनात्मक विकल्प के रूप में एक हाइब्रिड मॉडल पर चर्चा की जा रही है, जो प्रतिनिधित्व और योगदान के बीच संतुलन स्थापित करेगा और यह एक आदर्श समाधान हो सकता है। इसमें आरक्षण और योग्यता के मुद्दे पर 50-50 का संतुलन सुझाया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव में नई सीटों का आधा भाग प्रो-राटा आधार पर निर्धारित किया जा सकता है तथा शेष आधा भाग आर्थिक योगदान (डीएसडीपी) और अन्य प्रदर्शन मानकों के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए।

रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुझाव है, यदि हम अपने मन की खिड़कियाँ खोलें और नए विचारों को आने दें, तो लोकतांत्रिक प्रक्रियों हमें सर्वोत्तम, न्यायसंगत और सभी के लिए स्वीकार्य समाधान तक पहुँचाएँगी। रेवंत रेड्डी ने कहा कि हाइब्रिड मॉडल यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी राज्य को उसकी प्रगति के लिए दंडित न किया जाए। साथ ही लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को बनाए रखते हुए सभी राज्यों और क्षेत्रों को राष्ट्रीय शासन में उचित आवाज़ मिले।

इस मुद्दे की गंभीरता और इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए इसे व्यापक परामर्श और सहमति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएम से अनुरोध किया कि शीघ्र ही एक सर्वदलीय बैठक बुलाएँ, जिसमें सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हों, ताकि इस विषय पर पारदर्शी और समावेशी चर्चा की जा सके।

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दक्षिण के मुख्यमंत्रियों को भी उकसाया

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने लोकसभा सीटों को प्रो-राटा पद्धति से बढ़ाने के प्रस्ताव से दक्षिणी राज्यों को संभावित नुकसान पर चिंता जताते हुए दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे हैं। रेवंत रेड्डी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया, तमिलनाडू के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री रंगा स्वामी, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायुडू को लिखे पत्र में परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों को इसके खिलाफ खड़े होने का आग्रह किया है।

पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि महिलाओं का आरक्षण, परिसीमन और लोकसभा सीटों की वृद्धि इन तीन अलग-अलग विषयों को मिलाकर लोगों में भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 कर दिया गया और उन्हें प्रो-राटा पद्धति से बाँटा गया, तो दक्षिणी राज्यों का महत्व कम हो जाएगा। देश के विकास में योगदान देने वाले राज्य नुकसान में रहेंगे, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्य लाभान्वित होंगे। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि सभी राज्यों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए हाइब्रिड मॉडल पर विचार किया जाए और इस मुद्दे पर सभी राज्य एकजुट होकर आगे बढ़ें।

बाबू ने समर्थन करने का आह्वान किया

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को राज्य के राजनीतिक दलों और सभी सांसदों से संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया। नायडू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मैंने आज राज्य के सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और राज्यसभा व लोकसभा सदस्यें को संसद में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) का समर्थन करने के लिए पत्र लिखा है।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से कानून बनाने वाली संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण उनके सशक्तीकरण के साथ-साथ राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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