आरटीसी हड़ताल समाप्त मैराथन चर्चा के बाद राजी हुए कर्मचारी संघ

हैदराबाद, आरीटीसी कर्मचारी संघों की संयुक्त कार्रवाई समिति और सरकार द्वारा उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का के नेतृत्व में गठित उप समिति के बीच लगभग 12 घंटे तक चली मैराथन चर्चा के बाद हड़ताल समाप्त कर दी गयी। संभावना है कि शनिवार सुबह पहली शिफ्ट से आरटीसी बसें फिर से सड़कों पर उतरेंगी, जिससे राज्यभर के लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। हालाँकि समाचार लिखे जाने तक हड़ताल समाप्ति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है।
इंदिरम्मा घर और उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी
उप मुख्यमंत्री भट्टी शंकर गौड़ के परिवार को आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ की अचानक मौत पर दुख जताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार शंकर गौड़ के परिवार के साथ खड़े रहेगी। सरकार की ओर से सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने प्रार्थना की कि शंकर गौड़ की आत्मा को शांति मिले और परिवार के सदस्यों को हिम्मत और ताकत मिले। उन्होंने गहरा दुख जताया कि एक पल में लिए गए निर्णय ने परिवार को दुख के सागर में डुबो दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार आरटीसी मजदूर संघों से बातचीत करेगी और उनकी समस्याओं को हल करने की पूरी कोशिश करेगी। परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने घोषणा की कि शंकर गौड़ के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, इंदिरम्मा घर और उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी।
भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि आरटीसी जेएसी के साथ बातचीत सफल रही है। सरकार ने प्रमुख मांगों जैसे 10 प्रतिशत वेतन संशोधन को मंजूर कर लिया है। सरकार ने आरटीसी के सरकार में विलय की प्रक्रिया शुरू करने और कर्मचारी संघों के चुनाव को भी हरी झंडी दिखा दी है। हड़ताल के तीसरे दिन आज सुबह पहले आईएएस अधिकारी दल ने सचिवालय में आटीसी जेएसी नेताओं से भेंट कर चर्चा की। तत्पश्चात उप-मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का के नेतृत्व में सरकार द्वारा गठित समिति ने आरटीसी नेएसी नेताओं से चर्चा की।
29 मांगों पर सरकार सकारात्मक
आरटीसी जेएसी नेताओं के साथ हुई चर्चा की जानकारी सीएम रेवंत रेड्डी को दी गयी। सीएम द्वारा आरटीसी को सरकार में विलय करने के मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने संबंधित स्पष्ट आश्वासन दिया है। बताया जाता है कि सरकार ने वेतन संशोधन और लंबित बकाया जारी करने के लिए सरकार ने कुछ समय मांगा है। हालांकि यूनियनों को मान्यता की मांग पर सरकार राजी हो गयी है। चर्चा के दौरान आरटीसी जेएसी नेताओं ने मंत्रियों के सामने कुल 32 मांगें रखी। ज्ञातव्य है कि मंत्री पोत्रम प्रभाकर ने पहले ही ऐलान किया था कि 29 मांगों पर सरकार सकारात्मक है। इसके चलते आज की बैठक के दौरान बची हुए तीन मुख्य मांगों पर चर्चा हुई।
इन तीन मांगों में आरटीसी का सरकार में विलय, ट्रेड यूनियनों को मान्यता और पीआरसी का गठन शामिल है। इन तीनों मांगों पर दिन भर बातचीत चली। मंत्रियों ने आरटीसी की परिधि में आने वाले मुद्दों को प्रबंधन से चर्चा करके सुलझाने का सुझाव दिया और कहा कि सरकार की परिधि में आने वाले मांगों को वे सुलझायेंगे।
सचिवालय में आज भट्टी विक्रमार्का की अध्यक्षता में आरटीसी जेएसी नेताओं के साथ लंबी बैठक हुई। इस बैठक में मंत्री पोत्रम प्रभाकर, श्रीधर बाबू, विवेक, लक्ष्मण कुमार शामिल हुए। इसके अलावा सरकार के मुख्य सचिव रामकृष्ण राव, विशेष सीएस विकास राज, वित्त सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया, दाना किशोर, आरटीसी एमडी नागि रेड्डी भी इन चर्चाओं में शामिल हुए। बैठक की शुरूआत में आत्महत्या करने वाले आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये चर्चाएं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई।
पिछली सरकार में 55 दिनों की हड़ताल के बावजूद उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ
इस दौरान सभी संघों की राय को मंत्रियों के दल ने विस्तार से दर्ज किया। बैठक के दौरान आरटीसी संघों के नेताओं ने यह राय व्यक्त की कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही उनकी दशकों पुरानी लंबित समस्याओं का समाधान निकला। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार में 55 दिनों की हड़ताल के बावजूद उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ था। उन्होंने मंत्रियों को बताया कि यूनियनों के अभाव के कारण कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कई श्रम कल्याण कार्यक्रमों का प्रचार नहीं हो सका।
उप-मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का ने स्पष्ट आश्वासन देते हुए कहा कि आरटीसी से जुड़े प्रशासनिक और नीतिगत समस्याओं पर अच्छी तरह से चर्चा कर मजदूरों की समस्याओं को सकारात्मक सोच के साथ हल किया जाएगा। उन्होंने शंकर गौड़ की मौत पर दुख व्यक्त किया। साथ ही कहा कि किसी भी इंसान की जिंदगी सबसे कीमती होती है। शंकर गौड़ की मौत से उनका परिवार टूट गया है। उन्होंने कहा कि समस्याओं को बातचीत से सुलझाना चाहिए।
जीवन लेना सही निर्णय नहीं है। समस्या कितनी भी मुश्किल क्यों न हो अगर हम बैठकर बात करेंगे तो हल ज़रूर निकलेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में किसी को दुश्मन समझना सरकार का स्वभाव नहीं है। आरटीसी राज्य का सबसे बड़ा सार्वजनिक उपक्रम है। निगम को मजबूत करने की ज़रूरत है। पिछली सरकार के दौरान आरटीसी को दस साल तक कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। निगम की स्थिति काफी बिगड़ गयी थी।
त्रिसदस्यीय समिति के माध्यम से 270 लोगों को फिर से नौकरी दी
मजदूर हड़ताल पर चले गए, तो उस समय के शासकों ने कितना बुरा बर्ताव किया, यह किसी ने नहीं भूला है। उन्होंने साफ़ कर दिया कि उनकी सरकार पहले के शासकों जैसा बर्ताव नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, मैं और दूसरे मंत्री बजट बैठकें, चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन, महिला बिल और दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। इस बीच अचानक आरटीसी मजदूर हड़ताल पर जाने से एक मजदूर की जान चली गई। यह बहुत दर्दनाक है। उन्होंने कहा कि आरटीसी हम सबका संगठन है। इसकी सुरक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।
विशेषकर गरीबों और महिलाओं के लिए आरटीसी ही आने-जाने का एकमात्र विकल्प है। इस बात को हमें हमेशा याद रखना चाहिए। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जेएसी प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रजा सरकार आने के बाद दो वर्षों के भीतर ही 2013 के 280 करोड़ के बांड्स क्लियर किए गए, 2017 से संबंधित पीआरसी दिया गया, लंबित डीए का भुगतान किया गया, सेवा से स्थायी रूप से हटाए गए लोगों के मामले में त्रिसदस्यीय समिति के माध्यम से 270 लोगों को फिर से नौकरी दी गई, सीसीएस, पीएफ बकाया भी चुकाए गए।
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