सम्मक्का सारलम्मा जातरा : वन देवियों के आंगन में देशभर से उमड़े भक्त
हैदराबाद सम्मक्का सारलम्मा जातरा के मद्देनजर मुलुगु जिले स्थित मेडारम लाखों श्रद्धालुओं से भर गया। वन देवियों के प्रांगण में लाखों की संख्या में आए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मेडारम में न केवल तेलंगाना बल्कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों से भारी संख्या में आदिवासी और श्रद्धालु आए। इस कारण मेडारम आने वाले सभी रास्ते वाहनों से भरे हुए हैं। भक्तजन अपने साथ लाए हुए मुर्गों को वन देवताओं के पास हवा में उड़ा रहे हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देने वाली माता का आह्वान करते हुए देवी की पूजा कर रहे हैं।





वन देवताओं को सोना (गुड़) चढ़ा रहे हैं। अगले दो दिनों में और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेडारम आयेंगे। मेडारम पहुंचने वाले सभी रास्तों में आदिवासी महिलाओं के नृत्य और आदिवासी संगीत उपकरणों की आवाज़ें श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही है। यहाँ का वातावरण श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में डुबो देता है। विदेशों से भी मानव विज्ञान के शोधकर्ता इस दुर्लभ आदिवासी संस्कृति का अध्ययन करने के लिए आ रहे हैं। भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए पिछले महीने से ही श्रद्धालु मेडारम आ रहे हैं।
राज्य सरकार ने इस बार 251 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी विकास कार्यों को पूरा किया है। आदिवासी परंपराएँ आधुनिक समय में भी कितनी सशक्त है, यह इस जातरा से पता चलता है, जो केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था को भी साबित कर रहा है। मेडारम में हर जगह सोना (गुड़) ही दिखायी दे रहा है। भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए माताओं को सोना चढ़ा रहे हैं। जनजातीय प्रथा के अनुसार वन देवताओं को मन्नतें दी जा रही हैं। किलोमीटरों तक फैला जम्पन्ना वागु अब श्रद्धालुओं के स्नान से एक जन-समुद्र जैसा प्रतीत हो रहा है।
50 से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट व एयर एम्बुलेंस तैनात
श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि जम्पन्ना वागु में पवित्र स्नान करने से पापों का नाश होता है। जम्पन्ना वागु अब पुष्कर के वैभव की याद दिला रहा है। इस बीच भीड़ पर लगातार नजर रखने के लिए अत्याधुनिक सेंसरों के माध्यम से भक्तों को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि भीड़-भाड़ से बचा जा सके। मेडारम में 50 से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट और आपातकालीन एयर एम्बुलेंस सुविधा भी उपलब्ध करवायी गयी है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से मेडारम ऐप लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से पार्किंग स्थल और ट्रैफिक अपडेट की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मंत्री सीतक्का, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और जिलाधीश दिवाकर स्वयं इंतजामों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए 42 हजार सरकारी कर्मचारियों को तैनात किया गया है। रात के समय मेडारम बिजली से जगमगाता है और रात के समय यहाँ पर एक अद्भुत दृश्य दिखने मिलता है। छोटी-छोटी नहरों के किनारे, पेड़ों के नीचे, हजारों भक्त अपने परिवार के सदस्यों के साथ भोजन बनाते हैं और छोटे-छोटे दीपों की रोशनी में आनंद लेते हुए इस यात्रा का आनंद ले रहे हैं।
यह भी पढ़ें… चेर्लापल्ली व तिरुचिरापल्ली के बीच विशेष ट्रेनें
बंधु मित्रों के साथ जाति और धर्म से परे एक साथ बैठकर भोजन करना यहां की विशेषता है। कई भक्त अपने घरों से चावल और दाल लाते है और मेडारम के पेड़ों के नीचे वन भोजन करते हैं। यह एक शानदार पर्यटन अनुभव भी प्रदान करता है। मेडारम केवल मन्नतों को पूरा करना ही नहीं है, बल्कि यह तेलंगाना के आदिवासी अस्तित्व और साहस का प्रतीक है। यह जातरा आधुनिक दुनिया में मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट बंधन को दर्शाता है।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



