समाज के परिवर्तन का मार्गदर्शक है अध्यात्म : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला
हैदराबाद, कान्हा शांति वनम में बाबूजी महाराज की 127वीं जयंती तथा सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुरजी का 350वाँ शहीदी दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। एक मानवता-एक हृदय : श्री गुरु तेग बहादुरजी की शिक्षाएँ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक कमलेश पटेल दाजी सहित अन्य उपस्थित थे।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने समारोह का संबोधित करते हुए भारत की महान आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की पावन धरा उन महान आध्यात्मिक गुरुओं की जननी रही, जिन्होंने युगों-युगों से मानवीय मूल्यों का मार्ग प्रशस्त किया है। गुरु तेग बहादुरजी का जीवन और उनकी शिक्षाएँ हमें मानवाधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए निर्भय होकर खड़े होने का साहस प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ बाबूजी महाराज ने हमें आध्यात्मिक साधना में निरंतरता और अनुशासन का पाठ पढ़ाया, वहीं तुकडोजी महाराज ने मानवता के समग्र उत्थान का मार्ग दिखाया। इन संतों के दिखाए मार्ग पर चलकर ही समाज में वास्तविक शांति और समरसता स्थापित की जा सकती है।
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नैतिकता व करुणा में ही वास्तविक प्रगति
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग ही समाज के परिवर्तन का मार्गदर्शक है। बाहरी दुनिया में किसी भी सकारात्मक बदलाव के लिए व्यक्ति का आंतरिक रूपांतरण अनिवार्य है। राज्यपाल ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान आध्यात्मिक दृष्टिकोण में बताते हुए कहा कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक सफलताओं में नहीं, बल्कि नैतिकता, विनम्रता तथा करुणा जैसे मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि बाबूजी महाराज सार्वभौमिक प्रेम और आध्यात्मिक जागृति के महान पुंज थे।
राज्यपाल ने शांति और आंतरिक संतुलन को बढ़ावा देने में हार्टफुलनेस जैसे संगठनों की भूमिका की सराहना की।
सत्य, शांति और सार्वभौमिक चेतना के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम में अन्य वक्ताओं ने गुरु तेग बहादुरजी के सर्वोच्च बलिदान और साहस का स्मरण करते हुए उनके द्वारा दिखाए गए आपसी भाईचारे के मार्ग को आज के समय में प्रासंगिक बताया।
सामूहिक ध्यान और आध्यात्मिक चर्चाओं के साथ संपन्न कार्यक्रम ने शांति, एकता और मानवीय मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर विशेष रूप से बल दिया। कार्यक्रम में देशभर के 30,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। विश्वभर से बड़ी संख्या में लोगों ने वर्चुअल रूप से सहभागिता की। प्रतिभागियों ने प्रेरणादायक प्रवचन, प्रदर्शनी और गुरु तेग बहादुरजी के जीवन पर आधारित विशेष फिल्म का आनंद लेते हुए सामूहिक ध्यान का लाभ प्राप्त किया।
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