‘स्टैंड विद हर’ नारा सही नहीं : कविता

हैदराबाद, तेलंगाना जागृति की संस्थापक व पूर्व विधान परिषद सदस्य कल्वाकुंट्ला कविता ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा महिला संरक्षण के तहत स्टैंड विद हर (महिला के साथ खड़े हों) नारे के साथ जारी किए गए पोस्टर पर घोर आपत्ति जताते हुए कविता ने इसकी कड़ी निंदा की और मुख्यमंत्री पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नारा गिव हर स्पेस होना चाहिए।

महिला दिवस पर कविता का बयान देते हुए दृश्य

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पूर्व एमएलसी कविता ने मुख्यमंत्री से स्टैंड विद हर नारा बदल कर गिव हर स्पेस करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्टैंड विद हर का अर्थ ऐसा है जैसे महिला सरपंच या विधायक बने तो पीछे पति खड़ा दिखाई देता है, मंत्री बनीं तो पुत्र या पति पीछे खड़े दिखाई देते हैं यानि पुरुष हों, तो ही महिला की सुरक्षा है। इसलिए स्टैंड विद हर कहना महिलाओं का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि पुरुष-महिला एकसमान हैं।

परिवार और समाज में महिलाओं के सम्मान पर जोर

महिला की रक्षा करना जिम्मेदारी है, कोई भीख नहीं है। उन्होंने कहा कि पिता, भाई या पति हर कोई परिवार में महिला को तुझे दिमाग नहीं है कहकर अपमानित करते हैं। अकेले बाहर नहीं जाने दिया जाता है। इसलिए महिलाओं को अपने बल पर ताकतवर बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि महिला दिनोत्सव केवल एक दिन तक सीमित न किया जाए। हर दिन महिला दिनोत्सव होना चाहिए।

कविता ने कहा कि महिला दिनोत्सव की तर्ज पर कुछ लोग पुरुष दिनोत्सव मनाने की मांग कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि सरकार भी पुरुषों के अनुकूल कानून बनाने के प्रयास कर रही है लेकिन वे चेतावनी देती हैं कि यदि महिला कानूनों को कमजोर बनाने जैसे कोई कानून बनाए गए तो जागृति चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि अभी महिला शक्तिशाली नहीं बनी है, पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं हुई है, पर्याप्त प्रतिनिधित्व तक नहीं मिला है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि पति को पीटने के स्तर पर भी अभी महिला नहीं पहुंची है, फिर कहा कि वे पतियों को पीटने की बात नहीं कर रही हैं क्योंकि जागृति हिंसा के खिलाफ है।

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रेवंत सरकार में महिला प्रताड़ना बढ़ी

कविता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार में महिलाओं पर प्रताडना बढ़ने का उल्लेख करते हुए चिंता जताई और राज्य के डीजीपी से प्रश्न किया कि क्राइम रेट बढ़ चुका है तो डीजीपी क्या कर रहे हैं? उन्होंने केरल की तर्ज पर महिलाओं को फ्री एजुकेशन देने की मांग करते हुए कहा कि केवल फ्री बस सुविधा देने तक सीमित न हों। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 99 दिनों का समीक्षा कार्यक्रम तो दिया है लेकिन पहला धोखा मुख्यमंत्री ने महिलाओं को ही दिया है। प्रति माह 2,500 रुपये देने का वादा करके भुला दिया गया, इसलिए सरकार को एक्सपोज करने का जिम्मा जागृति की महिलाओं पर है।

महिला सेना तैयार करेगी तेलंगाना जागृति

कविता ने महिलाओं से राजनीति में प्रवेश करने का आह्वान किया और कहा कि यदि राजनीति को साफ करना हो तो हाथ में झाडू रखने वाली महिलाओं को अवश्य ही राजनीति में आकर सफाई करनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का भी आह्वान किया और कहा कि यदि महिला के हाथ में पैसा होगा तो पॉवर होगा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना जागृति तेलंगाना में महिला सेना तैयार करने जा रही है।

वर्तमान समय राजनीतिक दल महिलाओं को पर्याप्त अवसर तक प्रदान नहीं कर रहे हैं लेकिन तेलंगाना जागृति की नई राजनीतिक पार्टी का गठन होते ही सबसे अधिक अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि महिला राज्य को उंगली पकड़कर आगे ले जाए। उन्होंने कहा कि तेलंगाना जागृति हर निर्वाचन क्षेत्र में लीडर कार्यक्रम का आयोजन करेगी और महिलाओं में नेतृत्व की क्षमता बढ़ाएगी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कविता का बयान

कविता ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देते हुए लोकसभा में केंद्र सरकार के पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम – 2023 का उल्लेख करते हए कहा कि दरअसल महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण चाहिए था और भरोसा है भविष्य में मिलेगा लेकिन इस बिल से महिलाओं ने दरवाजे में कदम तो रख दिया है, जिसका श्रेय तेलंगाना जागृति को जाता है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना जागृति के दिल्ली में आंदोलन के दबाव में ही बिल को केंद्र ने लोकसभा में पारित किया है। उन्होंने कहा कि पारित बिल पोस्ट डेटेड चेक बन चुका है। राष्ट्रीय जनगणना के बाद इसे लागू किए जाने के लिए रोककर रखा गया है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना जागृति का मानना है कि महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए लेकिन जगह-जगह पर उनकी उपेक्षा की जा रही है, अपमान किया जाता रहा है।

कविता ने महिलाओं से आह्वान किया कि यदि महिलाओं को कोई कुछ दे तो हरगिज न लें। पुरुष प्रधान आधिपत्य हरगिज बर्दाश्त न करें। उन्होंने कहा कि शरीर महिला का, 9 महीने पेट में बच्चे को महिला रखती है लेकिन जन्मे बच्चे का नाम तक रखने की स्वतंत्रता महिला को नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि रसोई में रखे बर्तन तक पर पुरुष का नाम लिखा होता है।

कविता ने हर मां को उनके बच्चे को भोजन कराने के बाद बचा खाना हरगिज न खाने की सलाह दी और कहा कि मां का भी आत्मसम्मान होता है। उन्होंने कहा कि मां कोई कचरे का डिब्बा नहीं है जो बचा हुआ खा जाए। उसका भी आत्मसम्मान होता है। सभी महिलाएं पौष्टिक आहार लें। यदि बीमार होकर बिस्तर पकड़ लेंगी तो कोई आदर नहीं करेगा। उन्होंने महिलाओं विशेषकर तेलंगाना जागृति की महिलाओं को प्रतिदिन व्यायाम करने की सलाह दी और कहा कि प्रतिदिन अखबार पढ़ें। हर खबर पर ध्यान दें।

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