लोक अदालत के फैसले को लागू करने पर रोक

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने लोक अदालत में निजी व्यक्तियों द्वारा मेड़चल-मल्काजगिरी के कापरा में हजारों करोड़ रुपये की 90.08 एकड़ सरकारी भूमि के आवंटन को लागू करने के लिए निचली अदालत द्वारा जारी ओदशों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही निजी व्यक्तियों को नोटिस भी जारी की गई।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस गादी प्रवीण कुमार की खण्डपीठ ने इसके संबंध में आज अंतरिम आदेश जारी किए। निजी व्यक्तियों को वर्ष 2019 में लोक अदालत से एक आवंटन प्राप्त हुआ था, जिसमें सरकार को शरणार्थियों की भूमि से संबंधित लोक अदालत में लम्बित मामलों में सरकार को प्रतिवादी नहीं बनाया गया था। उन्होंने निचली अदालत का रुख किया और इसे लागू करने के लिए आदेश प्राप्त किए।

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लोक अदालत आवंटन पर सरकार की आपत्ति

इस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका की ओर से दलील देते हुए सरकारी अधिवक्ता काटारम मुरलीधर रेड्डी ने कहा कि हजारों करोड़ों रुपये की भूमि विवादित है। उन्होंने कहा कि मेडचल- मल्काजगिरी में 90 एकड़ भूमि के मामले में लोक अदालत का आवंटन कानून के खिलाफ है। मुरलीधर रेड्डी ने आगे कहा कि सरकार ने इस भूमि को वर्ष 1966 में ही शरणार्थी भूमि के रूप में अधिसूचित कर दिया था।

इस मामले को लेकर कानूनी विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा और वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सरकारी भूमि घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में उन्हें अवैध आदेश प्राप्त हुए थे कि साझेदारों ने लोक अदालत में समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि यदि निचली अदालत ने इसे पहले खारिज दिया था और वर्ष 2023 में फिर से याचिका दायर की गई थी, तो निचली अदालत ने पिछले विवाद की जाँच किए बिना ही आदेश दे दिए थे। इन दलीलों का जवाब देते हुए खण्डपीठ ने लोक अदालत के फैसले को लागू करने के लिए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी।

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