35 Hyderabad
हिन्दी साहित्य जगत को गोदान जैसा कालजयी उपन्यास और कई कहानियां देने वाले प्रेमचंद पहले सिर्फ उर्दू में लिखते थे…
साहित्यपुरुष प्रेमचंद को मैं अपना मित्र, अपना विचार और अपना सरोकार मानता हूं। 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के पास…