तेलंगाना हाईकोर्ट : धर्मस्व विभाग के रवैये पर कोर्ट नाराज़
हैदराबाद, तेलंगाना हाईकोर्ट ने धर्मस्व विभाग द्वारा विस्तृत जानकारी और दस्तावेज़ दाखिल करने में देरी के लिए आज अधिकारियों पर कड़ी नाराज़गी जतायी। अदालत ने मेड़चल मलकाजगिरी जिले के शामीरपेट मंडल के देवरयामजाल गाँव में श्री सीताराम स्वामी मंदिर की 1521 एकड़ ज़मीन के विवाद से जुड़ा विवरण देने में देरी पर विभाग से कई सवाल किये। अदालत ने विभाग की लापरवाही पर क्रोध जताते हुए अधिकारियों के रवैये की कड़ी आलोचना की।
अदालत ने कहा कि जब विभाग को 1925-28 से अब तक के असली रिकॉर्ड के साथ पेश होने का आदेश दिया गया था, लेकिन अब तक केवल सिर्फ पाहनी जमा की गयी है। विभाग के निदेशक एवं प्रभारी आयुक्त हरीश से अदालत ने विभाग की लापरवाही पर खरी खोटी सुनाई। अदालत ने धर्मस्व विभाग को निर्देश दिये कि एंडोमेंट्स ट्रिब्यूनल में कितने केस लंबित हैं, कितनी याचिकाओं पर आदेश दिए गए हैं, सर्वे नंबर तथा ज़मीन का क्षेत्रफल जैसी संपूर्ण जानकारी पेश की जाए।
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धर्मस्व आयुक्त को सुनवाई में खुद शामिल होने का आदेश
न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने देवरयामजाल की ज़मीनों पर अधिकारों को लेकर दायर 54 याचिकाओं पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि धर्मस्व आायुक्त हरीश खुद सुनवाई में शामिल हों। सरकारी वकील मुरलीधर रेड्डी और भुक्या मांगीलाल नायक ने दलील दी कि आयुक्त ने दो माह पहले चार्ज संभाला है, इसलिए विवरण प्राप्त करने में समय लगेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भूमि धर्मस्व विभाग की है, तो उसके सबूत भी बताने होंगे, केवल भूमि विभाग की है, यह दावा करने से नहीं चलेगा। केवल समिति की रिपोर्ट के आधार पर ज़मीनों पर अधिकार नहीं मिल सकते। कानूनी सबूत जमा किए जाने चाहिए। अदालत ने विभाग को प्रतियाचिका दाखिल करने के आदेश दिये। अदालत ने ट्रीब्यूनल सहित इस संबंध में अदालत के पहले दिये गये आदेशों के बारें में जानकारी तलब कर निर्देश दिये कि अगली सुनवाई तक विस्तृत जानकारी दाखिल की जाए।
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