तेलंगाना हाईकोर्ट : किसान ऋण माफी पर विवरण तलब

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को भारास नेता व सिद्दिपेट विधायक टी. हरीश राव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया है कि सिद्दिपेट विधानसभा क्षेत्र के किसानों के लिए ऋण माफी योजना पूरी तरह से लागू नहीं की गई है। अदालत ने राज्य सरकार को इस योजना के संबंध में पूरी जानकारी देने का आदेश दिया और सुनवाई 8 जून तक के लिए स्थगित कर दी गई।उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने हरीश राव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. रामचंदर राव ने दलील देते हुए कहा कि सिद्दिपेट शहर, सिद्दिपेट ग्रामीण, चिन्नाकोडुरु, नंगुनुरु, नरवनरावपेट, इन पाँच मंडलों के किसानों के बैंक खातों में दो लाख रुपये की ऋण माफी राशि जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यह अवैध, एकतरफा और प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के विरुद्ध है।

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किसानों के खातों में राशि जारी करने की मांग

इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन माना जाए। उन्होंने यह भी माँग की है कि सरकार कानून द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर किसानों के बैंक खातों में नकद राशि जारी करे। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और उन्होंने किसानों की तत्काल सहायता करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले किए गए वादे के अनुसार दो लाख रुपये का ऋण माफ नहीं किया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक समस्याओं के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं और लगभग 285 किसानों ने आत्महत्या की है।

विधानसभा में बजट भाषण (2024-25) के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार 25 लाख किसानों के ऋण माफ करने के लिए चार चरणों में 31 हजार करोड़ रुपये जारी करने के लिए तैयार है। हालाँकि केवल 20 हजार करोड़ रुपये ही जारी किए गए। दलील सुनने के बाद खण्डपीठ ने किसान ऋण माफी के संबंध में विस्तृत जानकारी पेश करने के आदेश देते हुए सुनवाई 8 जून तक के लिए स्थगित कर दी।

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