तेलंगाना : डेटा केन्द्रां को ग्रे वॉटर की आपूर्ति करने की योजना

हैदराबाद, तेलंगाना सरकार डेटा केन्द्रां को ठंढा रखने के लिए ग्रे वॉटर (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी) की आपूर्ति करने की योजना बना रहा है। इस योजना से सरकार और डेटा केन्द्रां दोनों को फायदा होगा। इससे मूसी नदी का गंदा पानी कम होगा और डेटा केन्द्रां की पानी की ज़रूरतें पूरी होंगी।

हैदराबाद में लगभग 800 मेगावाट की कुल क्षमता वाले डेटा केन्द्रां बनने के अलग-अलग चरण में हैं। डेटा केन्द्र सभी व्यापार में सबसे ज़्यादा पानी की ज़रूरत वाले व्यापार में से एक है, जिनकी हर मेगावाट कैपेसिटी के लिए हर साल लगभग 15 मिलियन लीटर पानी की ज़रूरत होती है।

मेगावाट क्षमता के साथ बढ़ती ऊर्जा खपत

हैदराबाद और उसके आसपास मौजूदा और आने वाले डेटा केन्द्रां को ठंढा रखने के लिए हर साल लगभग 210 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत हो सकती है। डेटा केन्द्रां की क्षमता मेगावाट में मापी जाती है, वे जितनी ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं और केन्द्रां से पैदा होने वाली गर्मी, इस्तेमाल की गई ऊर्जा से मेल खाती है। यहीं से सिस्टम्स को ठंढा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की ज़रूरत होती है।

पता चला है कि राज्य सरकार डेटा केन्द्रां को ठंढा करने के लिए बड़ी मात्रा में ग्रे वॉटर का इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि अगले हफ़्ते अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और डेटा सेंटर कंपनियों के प्रतिनिधियों की एक बैठक होने की उम्मीद है, बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने दावोस जाने से पहले कहा था कि जब तक वह विदेश यात्रा से लौटें, तब तक एक आधारभूत योजना तैयार रखी जाए। अभी की योजना यह है कि शहर में हर दिन बनने वाले 1,100 मिलियन लीटर ग्रे वॉटर का कुछ हिस्सा डेटा सेंटर्स को आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाए। इससे दो काम होंगे।

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ग्रे वॉटर डायवर्जन से सफाई योजनाओं को मिलेगा बल

एक तो यह डेटा केन्द्रां की पानी की ज़रूरतों को पूरा करेगा, और दूसरा यह उस ग्रे वॉटर की मात्रा को कम करेगा जो अब हर दिन मूसी में छोड़ा जाता है। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ही सुझाव दिया है कि सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को दो होल्डिंग टैंकों से जोड़ने वाली एक रिंग मेन पाइपलाइन लगाने की संभावना पर विचार किया जाए, जहाँ से ग्रे वॉटर को डेटा सेंटर तक पंप किया जा सके।

सरकार मूसी नदी को साफ करके और गोदावरी के पानी का इस्तेमाल करके नदी को नया जीवन देने के साथ-साथ कई दूसरे उपायों के साथ आगे बढ़ रही है। ग्रे वॉटर को नदी से दूर ले जाने से नदी की स़फाई की योजनाओं में और मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि हालांकि इसके लिए पाइपलाइन और पंपिंग स्टेशन के तौर पर नयी संरचना बनानी होगी, ताकि पानी को उन क्षेत्रों तक ले जाया जा सके जहाँ डेटा केन्द्र बनने की उम्मीद है, जिसमें भारत फ्यूचर सिटी भी शामिल है।

क्योंकि कानून मीठे पानी या पीने के पानी की आपूर्ति करने वाले स्त्रोत से लिए गए पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं, इसलिए ग्रे वॉटर का उपयोग करना सबसे अच्छा विकल्प है। साथ ही भारत सरकार के फंड से संरचना की लागत का 25 प्रतिशत तक उपयोग किया जा सकता है, जबकि उद्योगों को 50 प्रतिशत और शेष राज्य को देना होगा। इसलिए यह सभी के लिए फायदे का सौदा होगा।

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