तेलंगाना आरटीसी हड़ताल: 23 अप्रैल को हर डिपो के सामेन होगा ‘महाधरना’

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हैदराबाद, आरटीसी जेएसी अब राज्य में हड़ताल को और तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जेएसी ने  23 अप्रैल से आंदोलन को उग्र करने का ऐलान करते हुए सभी डिपो के सामने ‘महाधरना’ आयोजित करने का आह्वान किया। यूनियन नेताओं ने कर्मचारियों से सुबह से ही बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील करते हुए राज्य सरकार और आरटीसी प्रबंधन पर कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। 

जेएसी नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति ने तत्काल समाधान देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद हड़ताल निश्चित हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन और सरकार जनता को गुमराह करने और कर्मचारियों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

हड़ताल के कारण परिवहन सेवाएं पहले से ही प्रभावित

नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने राज्य के सभी बस डिपो, यूनिट्स और वर्कशॉप में काम करने वाले कर्मचारियों से आंदोलन को मजबूत करने के लिए सक्रियता से भाग लेने की भी अपील की। उधर, हड़ताल के कारण परिवहन सेवाएं पहले से ही प्रभावित हैं और आने वाले दिनों में इसका असर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल का पहला दिन, राज्यभर में मिला-जुला असर

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) कर्मचारी संघों की हड़ताल के पहले दिन राज्यभर में मिला-जुला असर देखने को मिला। आम दिनों में जहां सड़कों पर आरटीसी बसों की भारी आवाजाही रहती थी, वहीं आज कई इलाकों में सड़कें हमेशा की तुलना में खाली नजर आईं।हालांकि कुछ रूटों पर सेवाएं बनाए रखने के लिए निगम ने निजी चालकों की मदद से बसें संचालित कीं।

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इसके बावजूद बसों की संख्या सीमित रही, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर बस स्टॉप पर यात्रियों की भीड़ भी देखी गई, जो लंबे समय तक बसों का इंतजार करते भी देखे गए।उल्लेखनीय है कि आरटीसी कर्मचारी संघ निगम का सरकार का विलय समेत समेत 12 मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।

हड़ताल के कारण निजी परिवहन संचालकों की सक्रियता भी बढ़ गई

कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार के साथ कई चरणों में बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसके बाद यूनियनों ने 22 अप्रैल की मध्यरात्रि से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। उधर, सरकार और निगम प्रबंधन ने हड़ताल को लेकर सख्त रुख भी अपनाया हुआ है।

कई जगहों पर प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किराए की बसें और निजी चालक भी तैनात किए गए हैं, ताकि परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप न हों। साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बस डिपो और प्रमुख बस स्टेशनों पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। उधर, हड़ताल के कारण निजी परिवहन संचालकों की सक्रियता भी बढ़ गई है।

ऑटो, कैब और अन्य निजी वाहनों द्वारा यात्रियों से अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आई। फिलहाल, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध बना हुआ है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है, तो आने वाले दिनों में आम जनता की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

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