कार्यालयों के सरकारी इमारतों में स्थानांतरण की उल्टी गिनती शुरू
हैदराबाद, तेलंगाना सरकार खज़ाने पर खर्चों के बोझ को कम करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। एक तो अधिकारी से मुख्यमंत्री स्तर पर राजस्व में वृद्दि के नित नये तौर तरीकों पर विचार किया जा रहा है, दूसरी ओर सरकारी खर्च किस तरह कम किये जा सकते हैं, इस बात पर भी माथा-पच्ची की जा रही है। ऐसी ही एक पहल में किराए पर चल रहे सरकारी कार्यालयों को अल्टीमेटम दिया गया है कि वह जनवरी मासांत से पहले सरकारी इमारतों में स्थानांतरित हो जाएँ, ताकि फरवरी से किराए पर खर्च होने वाले पैसों को बचाया जा सके।
सरकार के विभिन्न विभागों ने किराये के भवनों में संचालित अपने कार्यालयों को स्थानांतरित करने की पक्रिया तेज कर दी है। 31 जनवरी की निर्धारित समय सीमा से पहले यह स्थानांतरण किया जाना है। हालांकि, अनुसूची 9 और 10 के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं के पास पर्याप्त कार्यालय स्थान उपलब्ध होने के बावजूद, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच लंबित विवादों के कारण यह स्थान अभी भी उपयोग में नहीं आ पाया है। राज्य पुनर्गठन के तहत आंध्र प्रदेश को आवंटित कई भवनों को अभी तक पूरी तरह खाली नहीं किया गया। लेक व्यू गेस्ट हाउस और हर्मिटेज भवन जैसे परिसर अभी भी पूरी तरह तेलंगाना सरकार के कब्जे में नहीं आए हैं। या तो बंद पड़े हैं या न्यूनतम स्टाफ के साथ संचालित हो रहे हैं। विभागों के पास सरकारी परिसरों में स्थानांतरण के लिए अब केवल 18 दिन शेष है।
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2024-25 में सरकारी कार्यालयों के किराए पर 198.92 करोड़ खर्च
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद शहर की सीमाओं के भीतर राज्य स्तर के 60 से अधिक सरकारी कार्यालय अन्य परिसरों से संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश को माह के अंत तक सरकारी भवनों में समायोजित किया जा सकता है। हालांकि आबकारी विभाग के स्टेशन हाउस ऑफिस, जिलों में स्थित उप-पंजीयक कार्यालय अभी भी किराये के भवनों से संचालित हो रहे हैं, क्योंकि इनके लिए स्थायी भवनों का निर्माण नहीं हो पाया है। यही स्थिति गाँवों में स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों और सहायक नर्स दाई उप-केंद्रों की है, जहाँ संबंधित स्थानों पर सरकारी ढाँचा उपलब्ध नहीं है।
सरकार ने वर्ष 2024-25 में 198.92 करोड़ और 2023-24 में 299.95 करोड़ विभिन्न सरकारी कार्यालयों के किराये के भुगतान पर खर्च किए गए। बताया जाता है कि हैदराबाद सिकंदराबाद शहरों में स्थित कार्यालयों के लिए लगभग 450 करोड़ का किराया दर्शाया जाता है इसलिए भी कि कोई वास्तविक धन लेन-देन नहीं होता, क्योंकि किरायेदार और भवन स्वामी दोनों राज्य सरकार के ही विभाग हैं। कई कार्यालय अर्ध-सरकारी संगठनों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व वाले परिसरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे मामलों में किराया केवल लेखा समायोजन के रूप में दर्ज होता है।
उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने हाल ही में विभागों को जारी एक परिपत्र में विभागाध्यक्षों और संस्थान प्रमुखों से अनुरोध किया कि वे आंध्र प्रदेश द्वारा खाली किए गए भवनों का तत्काल कब्जा लेकर अन्य परिसरों से संचालित कार्यालयों को वहाँ स्थानांतरित करें। विशेष मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वह इन भवनों के कब्जे की वर्तमान स्थिति की जानकारी एकत्र कर तत्काल मुख्य सचिव कार्यालय को रिपोर्ट करें।
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