भील प्रदेश की माँग ने जोर पकड़ा
जयपुर, राजस्थान में एक बार फिर आदिवासियों के लिए अलग भील प्रदेश की मांग जोर पकड़ रही है। दक्षिणी राजस्थान में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) और अन्य स्थानीय नेताओं की अगुवाई में मुहिम तेज करने की कोशिश की जा रही है। बीएपी के संस्थापक और लोकसभा सांसद राजुकमार रोत ने ना सिर्फ सोशल मीडिया पर नक्शा साझा करके पुरानी मांग पर नई बहस छेड़ी बल्कि हर साल होने वाली भील प्रदेश संदेश यात्रा का इस बार बड़े पैमाने पर आयोजन करके मुहिम को तेज करने की कोशिश की है।
भील भारत की एक प्रमुख जनजाति है जो मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य भारत में पाई जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इनकी अच्छी आबादी है। भील प्रदेश के समर्थक चार राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के 40 से ज्यादा जिलों को मिलाकर एक नए राज्य की मांग कर रहे हैं। रोत कहते हैं कि इन जिलों के लोगों की संस्कृति, भाषा, बोली और परंपरा अन्य से अलग है और इसलिए भील प्रदेश की मांग आजादी से पहले की है।
तीन राज्यों से श्रद्धालुओं का व्यापक आगमन
राजस्थान के बांसवड़ा, बाड़मेर, डूंगरपुर, जालोर, सिरोही, झालावड़, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारां, पाली, कोटा आदि लोग पहुँचे। मध्य प्रदेश के गुना, शिवपुरी, मंदसौर, इंदौर, रतलाम, नीमच, बुरहानपुर, धार, देवास, खंडवा, खरगोन, बड़वानी और अलीराजपुर से लोग पहुँचे। गुजरात के अरावली, महीसागर, पंचमहल, दाहोद, सूरत, बड़ोदरा, तापी, नवसारी, छोटा उदेपुर, नर्मदा, साबरकांठा, बनासकांठा, भरूच, वलसाड़ से लोग पहुँचे। महाराष्ट्र के नासिक, ठाणे, जलगांव, धुले, पालघर, नंदुबार लोग पहुँचे।
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बीएपी की ओर से शुरू की गई मुहिम का सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विरोध किया है। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के पूर्व उपनेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान की आन, बान और शान को तोड़ने की साजिश कभी सफल नहीं होगी।(एजेंसियाँ)
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