ध्यान, ज्ञान और भक्ति से मुक्ति का मार्ग: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का सत्संग

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हैदराबाद, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आशुतोष महाराजजी की कृपा से पद्माराव नगर स्थित कोत्ता कामकोटि कल्याण वेदिका में मासिक सत्संग एवं भंडारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम का संचालन साध्वी भावना भारतीजी ने किया।

मुख्य वक्ता साध्वी निशंका भारतीजी ने कहा कि प्रभु की अंतर्यामिता को वही साधक समझ सकता है, जो अनन्य भाव से उनका भजन करता है। उन्होंने बताया कि जब शिष्य एकनिष्ठ भाव से सद्गुरु का चिंतन करता है, तब वह स्वयं उसके योग क्षेम का वहन करते हैं।

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ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रां में वर्णित सा विद्या या विमुक्तये के अनुसार वही ज्ञान सार्थक है जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने कहा कि अज्ञानी से जिज्ञासु श्रेष्ठ है, किंतु उससे भी श्रेष्ठ वह साधक है, जो तत्वनिष्ठ गुरु से प्राप्त ज्ञान का निरंतर अभ्यास कर उसे जीवन में उतारता है। साध्वीजी ने ध्यान साधना पर बल देते हुए कहा कि नियमित ध्यान से विवेक जागृत होता है। इससे जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने गुरु आज्ञा में रहकर नित्य प्रति ध्यान साधना करने का आह्वान किया। सत्संग के उपरांत उपस्थित साधकों ने सामूहिक साधना में भाग लिया। कार्यक्रम का समापन मंगल आरती और भंडारे के साथ हुआ।

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