मावजी महाराज के चौपड़ों की भविष्यवाणियां आज भी हो रही हैं अक्षरश: सिद्ध
देश में अलौकिक संतों एवं भक्त कवियों की परंपरा में आज से लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व वाग्वर प्रदेश (दक्षिण राजस्थान का मध्यप्रदेश एवं गुजरात से सटा दक्षिणांचल) की पुण्य धरा पर अवतरित त्रिकालज्ञ संत मावजी महाराज दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। कई लाख लोगों के लिए भगवद् स्वरूप मान्य मावजी महाराज को भगवान श्रीकृष्ण का लीलावतार मान कर अगाध श्रद्धा और आस्था भाव से स्मरण किया जाता है।
संत मावजी का जन्म पाम संवत् 1771 में वसंत पंचमी को साबला (डूंगरपुर जिला) में डालम ऋषि के घर माता केशरबाई की कोख से हुआ। घोर तपश्चर्या के उपरांत दिव्य लीलावतार के रूप में उनका जग समक्ष प्राकट्य पाम संवत् 1784 में माघ शुक्ल एकादशी को हुआ। उन्हीं की स्मृति में बेणेश्वर महामेला भरता है। उन्होंने बेणेश्वर तीर्थ सहित विभिन्न स्थानों पर घोर तपस्या की।
पौराणिक कथा
वृंदावन में एक बार श्रीकृष्ण की रास लीला भंग हो गई तो गोपिकाओं की प्रार्थना पर कृष्ण ने कहा था कि कलियुग में वे मावजी के रूप में अवतार लेंगे और अधूरी रास-लीला को बेणेश्वर टापू पर पूरी करेंगे। मावजी ने इस अधूरी रास को पूरा किया तथा प्रेम, भक्ति एवं श्रृंगार की गंगा बहाई। मावजी त्रिकालदृष्टा थे। माव परंपरा संदर्भ के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में 7 लाख 96 हजार रचनाएं सृजित कीं। उनके द्वारा तपस्या पूरी होने के बाद अहमदाबाद से 14 पेटी कागज मंगवाए गए, जिन पर धोलागढ़ शेषपुर में एकांतवास कर मात्र साढ़े तीन दिन में पांच बड़े चौपड़े (विशाल ग्रंथ) तथा चौपड़ियां (लघु पुस्तिकाएं) लिखकर भूत, भविष्य एवं वर्तमान के संबंध में दिव्य-वाणी को शब्द दिए।
इन चौपड़ों का आकार किसी खाट से छोटा नहीं है। उनकी तमाम भविष्यवाणियां आज भी अक्षरश सिद्ध हो रही हैं। विस्तृत फलक वाले इन चौपड़ों में अनुपम रंगीन चित्रकृतियों से वर्ण्य विषय को अच्छी तरह स्पष्ट किया गया है। इन चौपड़ों को मावजी महाराज ना चौपड़ा कहकर श्रद्धा का भाव व्यक्त किया जाता है। गुरु सहजानंद से प्राप्त ज्ञान एवं योगमार्ग से प्राप्त दिव्य संकेतों को उन्होंने इन चौपड़ों में व्यक्त किया। उन्होंने अपने शिष्य जीवनदास, रतनदास एवं केहरीदास के माध्यम से भी लोगों में दिव्य-वाणियों एवं भविष्य-वाणियों को प्रचारित करके धार्मिक चेतना जगाई और लोगों को दिव्य जीवन जीने की प्रेरणा दी।
मावजी महाराज के चौपड़े: भविष्यवाणी, ज्ञान और कला का दुर्लभ संगम
मावजी महाराज के पांच चौपड़ों में से चार इस समय यहां सुरक्षित हैं। इनमें मेघसागर हरि मंदिर साबला में है, जिसमें गीता ज्ञान उपदेश, भौगोलिक परिवर्तनों की भविष्यवाणियां हैं। सामसागर शेषपुर में है, जिसमें शेषपुर एवं धोलागढ़ की दिव्य वाणियां हैं। तीसरा प्रेमसागर डूंगरपुर जिले के पुंजपुर में है, जिसमें धर्मोपदेश, भूगोल, इतिहास तथा भावी घटनाओं की प्रतीकात्मक जानकारी है, चौथा चौपड़ा रतनसागर बांसवाड़ा के त्रिपोलिया रोड पर स्थित विश्वकर्मा मंदिर में है। इसमें रंगीन चित्र, रासलीला, कृष्णलीला आदि का मनोहारी वर्णन है। पांचवाँ चौपड़ा अनंत सागर मराठा आक्रमण के समय बाजीराव पेशवा द्वारा ले जाया गया, जिसे बाद में अंग्रेज ले गए। बताया जाता है कि इस समय यह लंदन के किसी म्यूज़ियम में सुरक्षित है। इसमें ज्ञान-विज्ञान की जानकारियां समाहित हैं।
देवनागरी लिपि में अंकित वागड़ी मावजी की मुख्य भाषा रही है, जिसमें गुजराती और मेवाड़ी का साफ प्रभाव परिलक्षित होता है। कुशल चित्रकार के रूप में मावजी ने रंगों के संयोजन से जिन चित्रों का निर्माण किया है, वे आज भी स्पष्ट एवं चटख हैं।
भविष्यवाणियों, ज्ञान-विज्ञान, आविष्कारों, लोक व्यवहार के बदलने वाले स्वरूपों, समाज शास्त्राय परिवर्तनों, परिवेशीय बदलाव, भक्तिधारा, लीलाओं, रास, महारास, कृष्णलीला के मनोहारी क्षणों, सुर-ताल, राग-रागिनियों, भावनाओं आदि की अभिव्यक्ति मावजी के चौपड़ों में हुई है। यह साहित्य मावजी को अलौकिक सर्जक, अप्रतिम चित्रकार और विलक्षण संगीतज्ञ के रूप में प्रकट करता है।
साबला में निष्कलंक संप्रदाय के विश्व पीठ हरि मंदिर का चौपड़ा बसंत पंचमी को पूजा जाता है, जबकि दीवाली को तमाम चौपड़ों की पूजा की जाती है। बरसों से होने वाली पूजा से इनके चित्र एवं पृष्ठ खराब हो रहे हैं। विशेष अवसरों पर इनका पठन होता है, जिसे मावजी महाराज के प्रति भक्ति रखने वाला जानकार व्यक्ति ही कर सकता है। इस प्राचीन एवं दुर्लभ साहित्य को प्रकाश में लाने के लिए स्वयं पीठाधीश्वर गोस्वामी श्री अच्युतानन्द महाराज एवं मावजी फाउण्डेशन द्वारा व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों की इन चौपड़ों के प्रति अगाध श्रद्धा है। बेणेश्वर पीठाधीश्वर द्वारा इन चौपड़ों के अध्ययन एवं शोध के लिए सार्थक प्रयास हो रहे हैं। मावजी महाराज के चौपड़ों में समाहित चित्रों, लिपियों आदि को प्रदर्शित किया गया है।
डॉ. दीपक आचार्य
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।





