रेकी तकनीक मानसिक तनाव और शारीरिक पीड़ा से राहत का माध्यम

संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जताया रेकी का महत्व

हैदराबाद, नेशनल रेकी सिम्पोजियम मीडिया प्लस ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से रेकी मास्टर्स, हीलर्स और वेलनेस विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने शांति, उपचार और समग्र स्वास्थ्य के संवर्धन में रेकी के महत्व पर चर्चा की तथा आधुनिक तकनीकों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए।

रेकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान दौरान विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा करते हुए बताया कि रेकी संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कार्यक्रम का नेतृत्व रेकी कौंसिल ऑफ इंडिया के संस्थापक और प्रधान रेकी अन्वेष प्रोफेसर डॉ. दीपक राउत ने पारंपरिक रेकी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए ऊर्जा-आधारित उपचार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि रेकी मूलतः जापान की एक उपचार पद्धति है, जिसे पाम हीलिंग भी कहा जाता है। इसमें हथेलियों के माध्यम से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित कर दर्द और कष्ट को कम करने का प्रयास किया जाता है। इसे बायोफील्ड थेरेपी भी कहा जाता है और मानसिक तनाव कम करने की प्रभावी तकनीक माना जाता है।

कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए, जिनमें यामागुची कराटे इंटरनेशनल के संस्थापक एवं ग्रैंड मास्टर आर.के. कृष्णा तथा फिल्म बाहुबली की अभिनेत्री आश्रिता उपस्थित थीं। उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच शांति और समग्र उपचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर रेकी के जनक उसूई सेंसुई की 100वीं जयंती के उपलक्ष्य में उपचार, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ग्लोबल पीस अवॉर्ड प्रदान किए गए।

ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार ने सभी पुरस्कार विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए समाज में शांति, उपचार और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का समापन रेकी के माध्यम से शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने के सशक्त संदेश के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए विश्वभर में रेकी और समग्र उपचार पद्धतियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे मंचों की आवश्यकता पर बल दिया।

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