अजहरुद्दीन ने विधान परिषद सदस्य के रूप में शपथ ली

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हैदराबाद, तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन और सेवानिवृत्त प्रोफेसर एम. कोदंडराम ने राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) के रूप में सोमवार को शपथ ली। तेलंगाना विधान परिषद के अध्यक्ष गुथा सुखेन्द्र रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अन्य नेताओं की उपस्थिति में दोनों को शपथ दिलाई।

शपथ लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन ने कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री रेड्डी और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का आभार व्यक्त किया। अजहरुद्दीन ने कहा कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कई उपाय कर रहे हैं, और वह मंत्री के रूप में उनके और समाज के अन्य वर्गों के लिए काम करना चाहेंगे।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने आरोप लगाया था कि उन्हें पिछले साल जुबली हिल्स उपचुनाव में मुस्लिम वोट हासिल करने के लिए मंत्री बनाया गया था और उन्हें इस पद पर बरकरार नहीं रखा जाएगा। इन आरोपों पर अजहरुद्दीन ने कहा कि एमएलसी के रूप में उनका नामांकन ऐसी टिप्पणियों के लिए एक ‘‘तमाचे’’ की तरह है और मुख्यमंत्री रेड्डी अल्पसंख्यकों के विकास के लिए कई कार्यक्रम चला रहे हैं।

जब उन्हें बताया गया कि अगर राज्यपाल ने अप्रैल के अंत तक उनके नामांकन को मंजूरी नहीं दी होती, तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ता, इस पर अजहरुद्दीन ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री रेड्डी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। वहीं, कोदंडराम ने कहा कि वह जनता के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।

राज्यपाल शुक्ला ने 26 अप्रैल को राज्यपाल के कोटे के तहत अजहरुद्दीन और कोडंडाराम को एमएलसी के लिए मनोनीत किया। राज्यपाल ने सरकारी आदेश के अनुसार तेलंगाना विधान परिषद के सदस्यों के रूप में उनके नामांकन को मंजूरी दे दी। उनकी यह मंजूरी लंबे इंतजार के बाद आई, क्योंकि अजहरुद्दीन को छह महीने के भीतर यानी 30 अप्रैल तक विधानमंडल का सदस्य निर्वाचित होना आवश्यक था। उन्हें पिछले साल 31 अक्टूबर को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी।

अजहरुद्दीन को पिछले साल अगस्त में राज्य सरकार द्वारा राज्यपाल के कोटे के तहत एमएलसी के रूप में मनोनीत किया गया था। तेलंगाना आंदोलन में राजनीतिक दलों की संयुक्त कार्य समिति के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कोदंडराम को 2024 में एमएलसी के रूप में मनोनीत किया गया था। हालांकि, यह मामला अदालतों में लंबित है, क्योंकि बीआरएस शासन के दौरान मनोनीत किए गए श्रवण दासोजू और कुर्रा सत्यनारायण ने तत्कालीन राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन द्वारा उनके नामांकन को खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं। (भाषा)

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