याचिकाकर्ता के खिलाफ एक करोड़ रुपये का जुर्माना
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक सनसनीखेज फैसला सुनाते हुए न्यायालय को गुमराह करने वाले याचिकाकर्ता वेंकट रामी रेड्डी के खिलाफ एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की राशि 10 अप्रैल के भीतर उच्च न्यायालय के विधि सेवा प्राधिकरण में जमा करने, राशि जमा न करने पर याचिकाकर्ता को न्यायाधीश के समक्ष पेश करने के लिए कार्रवाई करने हेतु उच्च न्यायालय के ज्युडिशियल रजिस्ट्रार को आदेश दिए।
इस मामले को फोरम शॉपिंग (साजिश के तहत अदालत से अनुकूल आदेश पाने का प्रयास) लेते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया। अदालत में गलत जानकारी के साथ याचिका दायर कर सच्चाई को छुपाकर अपने अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए किए गए इस प्रयास का खुलासा किया गया।
न्यायालय को गुमराह करने पर याचिकाकर्ता पर कड़ी कार्रवाई
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस भीमपाका नागेश ने इस मामले के संबंध में यह सनसनीखेज फैसला सुनाया। भू-विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में पहले से ही दूसरे न्यायाधीश की बेंच पर मामला लम्बित रहते हुए इसी मामले पर याचिकाकर्ता ने दूसरे न्यायाधीश से अपने अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए वास्तविकता को छुपाकर याचिका दायर की। इस व्यवहार की न्यायाधीश ने कड़ी आलोचना की।
कानून के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता ने याचिका में उल्लेखित मुद्दों के संबंध में पहले ही मामला दायर कर रखा है, तो नवीनतम याचिका में उन मुद्दों को बहुत स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए। लेकिन याचिकाकर्ता ने दूसरी याचिका दायर करके उच्च न्यायालय को गुमराह किया है। इस पर तीव्र असंतोष जताते हुए न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
वेंकट रामी रेड्डी ने याचिका में कहा कि बंड्लागुड़ा मंडल के कंदीकल सर्वे नं. 310/1 और 310/2 में 9.11 एकड़ भूमि है और अधिकारी इस भूमि का पंजीकरण नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वेदुला वेंकटरमणा ने दलील देते हुए बताया कि बंड्लागुड़ा तहसीलदार ने पंजीकरण कार्यालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि याचिकाकर्ता की जमीनों का पंजीकरण न किया जाए।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से अपनी भूमि का पंजीकरण करने के आदेश जारी करने का आग्रह किया। सरकारी अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि याचिकाकर्ता ने भूमि को अपनी भूमि बताते हुए कहा कि इस भूमि को उसने अपने पिता को बेच दी थी। वेंकट रामी रेड्डी के सिविल कोर्ट में मामला दायर करने पर वर्ष 1998 में फैसला सरकार के अनुकूल सुनाया गया।
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अदालत ने लगाया 1 करोड़ जुर्माना
वेंकट रामी रेड्डी के पिता वेंकटेशम का निधन होने पर वेंकट रामी रेड्डी ने इस मामले को संचालित किया और याचिका में आपत्तियों, प्रतिवादियों का बदलाव कर अन्य अदालत में याचिका को सुनवाई योग्य बनाते हुए अपने अनुकूल आदेश प्राप्त करने का प्रयास कर न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। पट्टादार पासबुक के लिए दिसंबर-2022 के दौरान याचिका दायर की और मार्च-2023 के दौरान याचिका वापस ले ली।
इसी प्रकार राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन के लिए फरवरी-2023 में याचिका दायर कर वर्ष 2024 के दौरान इसे भी वापस ले लिया। इस प्रक्रिया को फोरम शॉपिंग के तहत माना जाता है। सरकारी वकील ने कहा कि याचिका द्वारा बताए गए सर्वे नं. कंदीकल गाँव में मौजूद नहीं है और उस गाँव में सर्वे नं. 309/5 पर समाप्त होते हैं।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि याचिकाकर्ता वेंकट रामी रेड्डी की साजिश को रोका जाए, जिन्होंने झूठे दस्तावेज तैयार करके सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। बताया गया कि याचिकाकर्ता के पिता ने इस जमीन को लेकर पहले भी उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग मुकदमे दायर किए थे, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।
याचिकाकर्ता ने अपने हलफनामे में इन दो मुकदमों का उल्लेख तक नहीं किया। इस प्रकार पुरानी याचिकाओं का उल्लेख न करके अदालत को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि कंदिकल में सरकारी भूमि पर मालिकाना हक को लेकर पहले से ही अदालत में कानूनी विवाद चल रहा है।
इन दलीलों के बाद पुराने मामले के दस्तावेजों की जाँच कर न्यायाधीश नागेश भीमापाका ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जान-बूझकर अदालत को गुमराह किया है और अदालत का बहुमूल्य समय बर्बाद किया है। इस आधार पर उच्च न्यायालय के इतिहास में अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
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