अगहन अमावस्या है स्नान व दान का समय
विक्रम पंचांग के अनुसार, 19 नवंबर, बुधवार की सुबह 9 बजकर 43 मिनट से अगहन अमावस्या शुरु होगी, जो 20 नवंबर, गुरुवार की दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिष के नियम और उदया तिथि के अनुसार 20 नवंबर, गुरुवार को सूर्योदय की अमावस्या है।
विक्रम पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष का महीना दान -पुण्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसकी अमावस्या तिथि बड़ी पावन और विशेष मानी गई है। साल में 12 अमावस्या तिथियाँ पड़ती हैं। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को अगहन अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या को भूलकर भी किसी व्यक्ति को बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। अमावस्या के दिन बाल धोना भी वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या को सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान करने से साधक के सभी दुःख-कष्ट दूर होते हैं। अमावस्या को पितरों के मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे परिजनों पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
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