बार असोसिएशन के कार्यक्रम में राज्यपाल ने किया आह्वान, युवाओं तक संविधान की पहुँच करें सुनिश्चित

हैदराबाद, संविधान के सिद्धांतों को जानना, विशेषकर युवाओं के मन में उन्हें बिठाना, प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने बुधवार को अभिभावकों, शिक्षकों, सरकारी संस्थानों और नागरिक समाज से इस प्रक्रिया में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके तहत युवाओं को रचनात्मक और अनुभवात्मक तरीके से संविधान के बारे में जानने के तरीके समझाकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 76 वें संविधान दिवस के अवसर पर राज्य उच्च न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की जीवनदायिनी के समान है। उन्होंने कहा कि सात दशकों से भी अधिक समय से यह विविधता में एकता की भावना को जगा कर खुद को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित करने में सक्षम रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि इसने चुनौतियों के समय में भी स्थिरता प्रदान की है और लोगों में संविधान के प्रति विश्वास जगाया है। उन्होंने कहा कि संविधान में उल्लिखित आंतरिक जांच, संतुलन, जवाबदेही और पारदर्शिता जिम्मेदार शासन प्रदान करते हैं, साथ ही एक व्यवस्था में सत्ता के केंद्रीकरण को रोकते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का सहयोग अपरिहार्य है, जो संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करता है।

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मुख्य न्यायाधीश ने संविधान को जीवन में अपनाने की बात कही

राज्यपाल ने कहा कि तेलंगाना का गठन संविधान द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है, जिससे क्षेत्रीय विविधता सुनिश्चित हुई है। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह ने कहा कि संविधान की भावना केवल संस्थाओं और न्यायालयों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक घर और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकारों के साथ-साथ उत्तरदायित्व और जवाबदेही प्रदान करके दिशा प्रदान करता है।

राज्यपाल ने कहा कि संविधान को पुस्तकालयों और अलमारियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके दर्शन को लोगों के दैनिक कार्यों में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा का दायित्व केवल न्यायिक, विधायी और कार्यपालिका प्रणालियों पर ही नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा देने वाले शिक्षकों, इसे लागू करने वाले प्रशासकों, लोगों में जागरूकता बढ़ाने वाले मीडिया, अधिकारों की जानकारी देने वाले नागरिक समाज, परिवार और दैनिक आधार पर संवैधानिक नैतिकता के अनुसार जीवन जीने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर है। कार्यक्रम में महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी, बार काउंसिल के अध्यक्ष ए. नरसिम्हा रेड्डी, सरकारी वकील पल्ले नागेश्वर राव, उच्च न्यायालय बार असोसिएशन के अध्यक्ष ए. जगन, न्यायाधीश और अन्य लोग शामिल हुए।

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