साइबर ठगी रोकने में बैंकों की भूमिका अहम : पुलिस आयुक्त

हैदराबाद साइबराबाद पुलिस आयुक्त डॉ. एम. रमेश ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में विशेषकर म्यूल बैंक खातों की जाँच पड़ताल में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बैंक के सहयोग से म्यूल खातों की जांच कर साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

साइबराबाद पुलिस आयुक्तालय के सभागार में आज पुलिस आयुक्तालय की परिधि में आने वाले विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आयुक्त ने साइबर ठगी के मामलों की समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध के मामलों में बैंकों और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित करना है, जिससे इन मामलों की जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। खासकर म्यूल अकाउंट पर नियंत्रित करना, बैंक खातों को फ्रीज और अनफ्रीज करने की प्रक्रिया, पीड़ितों को पैसा वापस करना और डिजिटल फ्रॉड के मामलों की जांच करने में तेजी लाना है।

डॉ. एम. रमेश ने कहा कि साइबर अपराध आज के समय में सबसे खतरनाक खतरा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि लोग ऑनलाइन स्कैम, नकली इन्वेस्टमेंट स्कीम, प्री-लांच ऑफर, कॉल सेंटर फ्रॉड, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम वगैरह के ज़रिए बड़ी रकम गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने अपनी ज़िंदगी भर की बचत गंवा दी है और गंभीर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबराबाद में, 2025 में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को 438 करोड़ रुपये और 2026 में अब तक 104 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने साफ किया कि सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता बढ़ाने के बावजूद, ज्यादा सतर्कता और कड़े बचाव के उपायों की जरूरत है।

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हर बैंक में साइबर सेल बनाने की सलाह

रमेश ने कहा कि बैंकिंग डेटा सिक्योरिटी, म्यूल अकाउंट्स पर कंट्रोल और जांच के लिए बैंकों से समय पर सहयोग बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि शिकायतों पर तेज़ी से कार्रवाई करने के लिए हर बैंक में डेडिकेटेड और सेंट्रलाइज्ड साइबर सेल बनाने की सलाह दी। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे निवेश करने से पहले तथ्यों की अच्छी तरह से जांच करें, संदिग्ध गतिविधियों के बारे में तुरंत पुलिस को बताएं और अपराधियों का साथ न दें।

जांच में आने वाली चुनौतियों के बारे में बात करते हुए पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) टी. साई मनोहर ने कहा कि बैंकों से अकाउंट डिटेल्स, केवाईसी डॉक्यूमेंट्स और फ्रीज कन्फर्मेशन देने में देरी के कारण आरोपियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। बैंकर्स को म्यूल अकाउंट्स को नियंत्रित करते हुए साइबर अपराध के मामलों को सुनिश्चित रूप से नियंत्रित करने के लिए सलाह दी गयी कि अकाउंट फ्रीज होने के बाद कोई डेबिट ट्रांजैक्शन न हो। अकाउंट्स के फ्रीज़िंग और अनफ्रीज़िंग प्रोसेस में होने वाली देरी पर भी चर्चा की गई।

बैठक में सीएसबी पुलिस अधीक्षक साई श्री ने एनसीआरबी डेटा को एनालाइज करते हुए हर बैंक में अपडेटेड नोडल ऑफिसर डिटेल्स के साथ एक साइबर क्राइम रिस्पॉन्स डेस्क बनाने का सुझाव दिया। इससे न सिर्फ कम्युनिकेशन तेज़ होगा बल्कि कस्टमर के पैसे भी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे बैंक स्टाफ को साइबर क्राइम प्रोसेस पर ट्रेनिंग दें और कॉर्पोरेट अकाउंट्स से जुड़े रिलेशनशिप मैनेजर्स की डिटेल्स शेयर करें। बैठक में कुतुबुल्लापुर पुलिस उपायुक्त कोटि रेड्डी, पुलिस उपायुक्त (अपराध) ए. मुत्यम रेड्डी और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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