उच्च न्यायालय : राइस मिलर्स की याचिकाएँ खारिज
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मिल्लिंग के लिए जारी किए गए धान को मिल्लर्स द्वारा मिल्लिंग किए बिना इसे अपने स्वयं के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाने के आरोपों की जाँच का आदेश देते हुए 107 पन्नों का अपना फैसला सुनाया। वर्ष 2022-23 के दौरान मिल्लिंग के लिए जारी किए गए धान का दुरुपयोग करने के आरोपों को चुनौती देते हुए मिल्लर्स द्वारा दायर याचिकाओं को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि निर्दिष्ट प्रयोजन के लिए नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी किए गए धान के समानांतर चावल की आपूर्ति मिल्लर्स द्वारा न किए जाने की जाँच की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि जारी किए गए धान का मिल्लर्स द्वारा अपने व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग करने के आरोप शिकायत के साथ ही प्राथमिक स्तर पर अपराध साबित हुए हैं। मामले की जाँच-पड़ताल प्राथमिक स्तर पर है, इसीलिए आपराधिक मामलों को खारिज करने के मिल्लर्स के अनुरोध को अदालत ने अस्वीकार किया।
मिल्लिंग के लिए जारी किए गए धान का दुरुपयोग किया गया, सरकार को जारी धान के समानांतर 3,960 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। इस कारण राज्य में 360 राइस मिल के मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करने का आग्रह करते हुए 56 राइस मिल संचालकों ने याचिकाएँ दायर की। इन याचिकाओं को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास राव ने 107 पन्नों का फैसला सुनाया।
मिलिंग खर्च का भुगतान न होने की दलील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि वर्ष 2022-23 के दौरान धान की फसल पर्याप्त न होने के कारण सरकार ने मिल्लिंग न करने का निर्णय लिया। इसके नेपेध्य में मिल्लर्स ने धान बाहर बेच दिया। उन्होंने कहा कि एक राइस मिल को 8 हजार मेट्रिक टन धान मिल्लिंग के लिए दिया जाना चाहिए, लेकिन 2 से 10 गुणा अधिक धान नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी किया गया। इसके अनुकूल अन्य खर्चों का भुगतान नहीं किया गया।
प्रतिवाद करते हुए सरकार की ओर से महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी, पुलिस की ओर से जन अधिवक्ता पल्ले नागेश्वर राव ने दलील दी। उन्होंने कहा कि मिल्लर्स के खिलाफ आपराधिक मामलों की जाँच पड़ताल प्राथमिक स्तर पर है और वास्तविकता को साबित करने के समय इन्हें खारिज करना अनुचित है। उन्होंने याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मिल्लिंग के लिए जारी धान दुरुपयोग करने के अलावा मिल्लर्स द्वारा सरकार को 3,960 करोड़ रुपये बकाया है।
न्यायाधीश ने कहा कि धान का दुरुपयोग कर प्राप्त पैसा मिल्लर्स ने अचल संपत्ति और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में निवेश किया है। उन्होंने बताया कि राज्य भर में 3,600 मिल्लर्स में से कुछ मिल्लर्स को छोड़कर अन्य मिल्लर्स द्वारा नियम के अनुसार धान से बनाया गया चावल नागरिक आपूर्ति विभाग को जारी किया है। दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा मिल्लर्स को जारी धान गुणवत्ता रहित बताए जाने की दलील को गलत बताया और कहा कि मिल्लर्स अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए आरोप लगा रहे हैं।
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जांच पूरी होने से पहले केस रद्द नहीं होगा
न्यायाधीश ने कहा कि एक बार धान स्वीकार करने के बाद वह कैसा है, इसकी जिम्मेदारी मिल्लर्स को लेनी चाहिए और इस प्रकार की आपत्ति धान स्वीकार करने से पहले ही बताई जानी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि आपराधिक मामलों की जाँच के जारी रहते और आरोपों को साबित किए बिना मामले को खारिज करना स्वीकार योग्य नहीं है। यदि इसे रोका गया, तो कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालना होगा।
न्यायाधीश ने कहा कि मिल्लर्स द्वारा इस मामले में अधिकार के दुरुपयोग के आरोप भी स्वीकार योग्य नहीं है। मिल्लिंग चार्ज, गन्नी बैग, स्टोरेज खर्च, का भुगतान किए बिना आपराधिक मामलों की जाँच करने को मिल्लर्स द्वारा अनुचित बताना स्वीकार योग्य नहीं है। न्यायाधीश ने कहा कि मिल्लर्स खर्च की माँग कर सकते हैं। इस दौरान सरकार द्वारा जारी धान मिल्लर्स के पास उपलब्ध रहने और इसे चावल के रूप में जारी न करने पर आपराधिक मामले दर्ज करना उचित है। उन्होंने कहा कि धान की जाँच करने के चार माह बाद आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
इसीलिए देरी से मामला दर्ज होने का मिल्लर्स द्वारा तकनीकी राहत प्राप्त करना भी कानून के विरुद्ध है। अदालत ने कहा कि मामले की जाँच करने के लिए प्राथमिक सबूत है, इसीलिए मामले खारिज करने के लिए मिल्लर्स द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला सुनाया जा रहा है।
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