भगवान महावीर की वाणी अमृतबूंद के समान : राजमतीश्रीजी
हैदराबाद, भगवान महावीर की वाणी अमृत की बूंद के समान है। जिसने अमृत की बूंदों को पिया, उसका भव खत्म हो गया, सात सुखों को प्राप्त कर लिया, जन्म मरण से छुटकारा कर लिया। उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद जैन भवन कोरा में श्री जैन श्रावक संघ कोरा के तत्वावधान में आचार्य सम्राट 1008 जयमलजी म.सा. की 318वीं जयंती पर राजमतीश्रीजी म.सा. राजुल आदि ठाणा-3 ने व्यक्त किये।
महामंत्री गौतम मुथा द्वारा पूज्यश्री ने कहा कि भगवान महावीर की वाणी अमृत है। व्यक्ति रोग ग्रस्त है, तो उसे अमृत की बूंद पिला दी जाती है, तो वह ठीक हो जाता है। वैसे भव भव भटकने वाले प्राणी को जन्म मरण का सुख-दुख में भटकने वालों के लिए भगवान महावीर की वाणी अमृत की बूंद के समान है।
म.सा. ने कहा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं, इसलिए समय रहते धर्म ध्यान करें। युवा अवस्था में तिजोरियाँ भरने में लगे रहते हैं और बुढ़ापे में संयम लेना है। बुढ़ापे में शरीर साथ नहीं देता, उपवास नहीं होता। जिस समय करने की उम्र थी, तब किया नहीं, अब करना चाहते हैं, तो शरीर साथ नहीं देता। किस समय क्या करना है सोच लें। शरीर के रहते रिटायर होने से पहले चेत जाएँ।
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मंच संचालन करते हुए महामंत्री गौतमचंद मुथा ने सभी का का स्वागत व अभिवादन किया। जोधपुर से पधारे सुरेश कुमार रूणवाल, सूरत से पधारे प्रकाशचंद सिंघवी, नरेंद्र कुमार नोहरा का संघ के द्वारा स्वागत किया गया। अवसर पर महावीरचन्द कटारिया, गौतमचंद श्रीश्रीमाल, सज्जन भंडारी, गौतमचंद मुथा, सुरेश भंसाली, पारस सुखानी, अशोक तातेड़, सुरेश मुणोत, विनोद श्रीश्रीमाल कोठारी व अन्य उपस्थित थे।
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