चुनाव आयोग का बिहार मॉडल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार बिहार में जो भी व्यक्ति एक जनवरी 2003 की मतदाता सूची में है, उसे संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत प्राथमिक दृष्टिकोण से योग्य माना जाएगा। दूसरे शब्दों में, जिन लोगों के नाम उस सूची में हैं, उन्हें कोई कागज जमा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा, ताकि इसमें शामिल करीब 4.96 करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए गणना प्रपत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले संबंधित हिस्से को निकालने में सुविधा हो। कुमार ने बताया कि जिन मतदाताओं के माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, उन्हें केवल अपने जन्म स्थान/तिथि के बारे में दस्तावेज देने होंगे।
बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी का चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर होना और साथ ही बिहार बंद के बहाने विपक्ष का एकजुट होना, कहीं न कहीं एनडीए सरकार की नींद उड़ाने का काम कर रहा है, अब इंडिया गठबंधन। दरअसल देखा जाए तो राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से साफ-साफ कह दिया है कि आयोग का काम भाजपा का काम करने का नहीं है बल्कि संविधान की रक्षा करने का है और आयोग अपना काम नहीं कर रहा है।
राहुल गांधी ने कहा- चुनाव आयोग, मैं आपको साफ बोल रहा हूं। मैं बिहार और हिन्दुस्तान की जनता को स्पष्ट कह रहा हूं कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था और वैसे ही बिहार का चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही है। उन्हें पता है कि हमने महाराष्ट्र मॉडल समझ लिया, इसलिए वे बिहार मॉडल लाए हैं। ये गरीबों का वोट छीनने का तरीका है। बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण के मुद्दे पर विपक्ष के बुलाए बिहार बंद और चक्काजाम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पटना में शामिल हुए।
बिहार बंद में राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला
इस दौरान उनके साथ तेजस्वी यादव, दीपांकर भट्टाचार्य, पप्पू यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल रहे। इस मौके पर जहां विपक्ष ने अपनी एकजुटता दिखाई तो वहीं राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरने का काम किया। राहुल ने साफ-साफ चुनाव आयोग को निशाने पर लेते हुए कहा कि आयोग का काम भाजपा के लिए काम करना नहीं बल्कि संविधान के अनुसार चलने का है।
बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के मुद्दे पर बिहार बंद और चक्काजाम में राहुल गांधी ने शामिल होकर चुनाव आयोग और भाजपा को जमकर घेरा। राहुल ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा ने चुनाव आयोग की सांठ-गांठ से चुनाव जीतने नहीं बल्कि चोरी करने की कोशिश की और अब भाजपा उसी तर्ज पर बिहार का चुनाव भी चोरी करने की फिराक में है और हम ऐसा होने नहीं देंगे। मैं आपको साफ बताना चाहता हूं कि यह गरीबों का वोट छीनने का तरीका है लेकिन इनको पता नहीं है कि ये बिहार है और बिहार की जनता ऐसा कभी नहीं होने देगी।
इस कार्पाम के लिए पटना में महागठबंधन दल के सभी घटक दल के बड़े नेताओं का जुटान हुआ। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आयोजन में शामिल हुए। विपक्ष के सभी नेताओं ने आयकर गोलंबर से निर्वाचन आयोग कार्यालय तक मार्च किया। राहुल गांधी ने राजद, कांग्रेस, वाम दल और वीआइपी नेताओं कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और कहा कि महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में चुनाव आयोग हमारे मतदाताओं की चोरी कर रहा है।
बिहार में चुनावी साजिश पर विपक्ष का हमला
पहले इन्होंने महाराष्ट्र में जनादेश छीना। अब बिहार की बारी है। इनका तरीका नया है मगर साजिश पुरानी है। जनता का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे। महागठबंधन बिहार की जनता के साथ खड़ा है। लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन जीतकर आया जबकि विधानसभा चुनाव में हमारा गठबंधन बुरी तरह हार गया। उस समय हम लोगों ने कुछ नहीं कहा, लेकिन इस गंभीर विषय पर काम शुरू किया।
हमने जांच की तो पता चला कि लोकसभा से ज्यादा मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में मतदान किया। आश्चर्यजनक ढंग से एक करोड़ वोट बढ़ गए। एक दिन में चार से पांच हजार वोट रजिस्टर हुए। गरीबों के वोट काटे गए। जब हमने चुनाव आयोग से कहा कि आप हमें वोटर लिस्ट दीजिए, तब चुनाव आयोग ने एक शब्द नहीं कहा। राहुल गांधी बोले कि हमने चुनाव आयोग से कहा कि कानून कहता है कि हमें वोटर लिस्ट दी जाए लेकिन आज तक महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट हमें नहीं मिली। वे सच्चाई छिपाना चाहते हैं।
यही खेल वे बिहार में भी करना चाहते हैं। मैं बिहार की जनता से कहता हूं कि जैसे महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था, वैसे ही बिहार चुनाव भी चोरी करने की कोशिश की जा रही है। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भारत बंद को मोदी सरकार के खिलाफ जन आक्रोश करार दिया। बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है।
यह भी पढ़ें… बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर क्यों मच रहा बवाल!
मतदाता पात्रता पर अनुच्छेद 326 की व्याख्या
इस क्रम में विपक्ष ने बिहार बंद के जरिये अपनी लड़ाई को सड़क तक पहुंचा दिया है। चुनाव आयोग के इस कदम को लेकर राहुल गांधी के साथ ही तेजस्वी यादव भी बिहार बंद में शामिल हो गए। इस बीच चुनाव आयोग ने अनुच्छेद 326 को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट किया है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि बिहार मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित होगा कि सभी पात्र लोग इसमें शामिल हों।
चुनाव आयोग द्वारा कहा गया है कि लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्क मताधिकार के आधार पर होना लोक सभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के लिए निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है और ऐसी तारीख को, जो समुचित विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस निमित्त नियत की जाए, कम से कम अठारह वर्ष की आयु का है और इस संविधान या समुचित विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन अनिवास, चित्तविकृति, अपराध या भ्रष्ट या अवैध आचरण के आधार पर अन्यथा निरर्हित नहीं कर दिया जाता है, ऐसे किसी निर्वाचन में मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने का हकदार होगा।
इससे पहले बिहार की मतदाता सूची का जिक्र रते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में जो भी व्यक्ति एक जनवरी 2003 की मतदाता सूची में है, उसे संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत प्राथमिक दृष्टिकोण से योग्य माना जाएगा। दूसरे शब्दों में, जिन लोगों के नाम उस सूची में हैं, उन्हें कोई कागज जमा करने की जरूरत नहीं है।
मतदाता सूची संशोधन में दस्तावेज़ी प्रक्रिया स्पष्ट
कुमार ने कहा कि आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा, ताकि इसमें शामिल करीब 4.96 करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए गणना प्रपत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले संबंधित हिस्से को निकालने में सुविधा हो।
कुमार ने बताया कि जिन मतदाताओं के माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, उन्हें केवल अपने जन्म स्थान/तिथि के बारे में दस्तावेज देने होंगे। बिहार में अभी 243 विधानसभा सीट पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। राज्य में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। कुमार ने बताया कि जिन मतदाताओं के माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, उन्हें केवल अपने जन्म स्थान/तिथि के बारे में दस्तावेज देने होंगे।

बिहार में अभी 243 विधानसभा सीट पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। राज्य में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इस प्रक्रिया की जल्दबाजी और अपारदर्शी प्रकृति से लाखों योग्य मतदाताओं के गलत तरीके से बहिष्कृत होने का जोखिम है, जो न केवल चुनावी प्रणाली की अखंडता के लिए बल्कि समानता, बंधुत्व और न्याय के संवैधानिक मूल्यों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



