बायोटेक और जीन एडिटिंग में कॅरियर

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में बहुत तेजी से ग्रो कर रही बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक कॅरियर उभरकर आए हैं, इन्हीं में से एक बहुत सुरक्षित और सफल कॅरियर है- जीन एडिटिंग का कॅरियर। भारत में वर्तमान समय को विशेषकर 2035 तक को लगातार बायोटेक्नोलॉजी के विकास का दशक माना जा रहा है। यही वजह है कि खेती से लेकर मेडिकल साइंस और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में अनगिनत क्रांति की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इसलिए साल 2035 तक माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में लगातार कॅरियर की न केवल संभावनाएं बेहतर बनी रहेंगी, बल्कि इसमें वृद्धि भी जारी रहेगी। आइए, बायोटेक और जीन एडिटिंग क्षेत्र में कॅरियर की संभावनाओं को क्रम से समझें।

क्या है बायोटेक और जीन एडिटिंग?

बायोटेक यानी बायोटेक्नोलॉजी वह विज्ञान है, जिसमें जीवित कोशिकाओं और जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं। जैसे तमाम तरह के रोगमुक्त करने वाली वैक्सीन, बायोयूल और अनेक तरह की दवाईयां। जबकि जीन एडिटिंग का काम किसी भी जीन को उन्नत बनाना है। जीन एडिटिंग दरअसल किसी जीन के डीएनए में किए गए परिवर्तन को कहते हैं।

आधुनिक तकनीक सीआरआईएसपीआर-सीएएस इस क्षेत्र को क्रांतिकारी बना दिया है। जहां तक इस क्षेत्र में कॅरियर हेतु प्रवेश की तैयारी का सवाल है तो 12वीं के बाद फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ ये बीएससी बायोटेक्नोलॉजी या बीटेक बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की जा सकती है। देश में इसकी पढ़ाई के लिए अनेक संस्थान है। सभी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटीएस), आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एआईआईएमएस) और डेल्ही यूनिवर्सिटी, जेएनयू, बीएचयू, जैसे देश की लगभग 100 से ज्यादा महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटीज में बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री की पढ़ाई होती है।

जहां तक ग्रेजुएशन के बाद का सवाल है तो इस क्षेत्र में एमएससी बायोटेक्नोलॉजी/जेनेटिक्स और एमटेक बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर सकते हैं और अगर इस क्षेत्र में रिसर्च करना है तो यह पीएचडी ज़रूरी होती है। यहां तक बायोटेक और जीन एडिटिंग के क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं का सवाल है तो जीएटी-बी (बायोटेक), सीएसआईआर-एनईटी और डीवीटी-जेआरएफ जैसी प्रवेश परीक्षाएं आपके कॅरियर को महत्वपूर्ण ऊंचाई पर ले जा सकती हैं।

कॅरियर के विकल्प

इस क्षेत्र में कॅरियर के कई विकल्प हैं। सबसे पहले आपके पास रिसर्च साइंटिस्ट बनने का मौका होता है। लैब में नई दवाईयां, वैक्सीन या जीन थैरेपी पर काम होता है। सरकारी या प्राइवेट संस्थानों में इसके लिए कई तरह के अवसर उपलब्ध होते हैं। जहां तक यह सवाल है कि रिसर्च साइंटिस्ट के लिए किन संस्थानों में नौकरी मिलती है तो दो संस्थान सबसे महत्वपूर्ण है। पहला- काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) तथा दूसरा महत्वपूर्ण संस्थान इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) इन दोनों संस्थानों में हज़ारों साइंटिस्ट काम कर रहे हैं। जहां शुरूआती सैलरी 6 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक हो सकती है और पांच साल के अनुभव के बाद 20 से 25 लाख रुपये सालाना बहुत आराम से होती है।

कॅरियर के दूसरे प्रमुख विकल्प के रूप में फार्मा और बायो-फार्मा इंडस्ट्री है, जिनमें दवाओं और वैक्सीन का विकास व परीक्षण होता है। कोविड-19 के बाद इस सेक्टर में ज़बर्दस्त वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र की देश की सबसे मशहूर कंपनियों में से है- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और बायोकान। जहां तक सैलरी का सवाल है तो शुरुआती सैलरी 5 से 8 लाख रुपये सालाना और कुछ सालों के अनुभव के बाद 20 से 25 लाख रुपये तक सालाना आराम से मिल जाती है। कॅरियर विकल्प में एग्री कल्चर बायोटेक भी इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स के लिए एक महत्वपूर्ण कॅरियर विकल्प है।

हाई-यील्ड और रोग-रोधी फसलें विकसित करना, जीन एडिटिंग से कृषि में ाढांति, एग्रीकल्चर बायोटेक का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भी शुरूआत में 4 से 6 लाख रुपये सालाना और कुछ सालों के अनुभव के बाद 12 से 15 लाख रुपये का सालाना का सैलेरी पैकेज आसानी से मिल जाता है। चूंकि जीन थैरेपी और मेडिकल साइंस में भी इन्हीं प्रोफेशनल्स की दरकार होती है। क्योंकि कैंसर, जेनेटिक रोगों आदि के इलाज में जीन एडिटिंग में माहिर लोगों की बड़ी भूमिका होती है। इस सबके अलावा बायोटेक प्रोफेशनल्स खुद की अपनी रिसर्च कंपनी खोल सकते हैं। लैब आधारित प्रोडक्ट (किट, टेस्ट, ऑर्गनिक सेल्यूशन) का निर्माण और लैब चला सकते हैं। जिस पर कमाई बहुत आसानी से आपकी मेहनत और कुशलता के हिसाब से 10 से 20 लाख रुपये और व्यापक विस्तार करने से करोड़ों रुपये तक की कमाई संभव है।

चूंकि बायोटेक और जीन एडिटिंग का तेजी से विकास करता क्षेत्र है, इसलिए देश और दुनिया में इसके प्रोफेशनल्स के लिए व्यापक कार्य अवसर मौजूद हैं। भारत सरकार के बायोटेक इंडिया विजन 2030 के मुताबिक बायोटेक सेक्टर अगले 4 सालों में 150 बिलियन डॉलर के आगे तक पहुंच जायेगा, जिससे इस क्षेत्र में न सिर्फ हज़ारों नौकरियां और स्टार्टअप शुरू होंगे, बल्कि बड़े पैमाने पर सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा होंगे। आने वाले सालों में बंग्लुरु, हैदराबाद, पुणे जैसे शहर भारत में बायोटेक हब बनकर उभरेंगे।

-कीर्तिशेखर

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button